एलियंस की तरह सिर होगा अंतरिक्ष में जन्मे शिशु का, रंग भी पूरी तरह बदल जाएगा

स्पेस बेबी की कल्पना अजीब तो है लेकिन वैज्ञानिक अब इसे साकार करने की ओर बढ़ रहे हैं- सांकेतिक फोटो (flickr)

अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता है, ऐसे में सामान्य प्रसव मुमकिन ही नहीं. किसी तरह से शिशु-जन्म (human birth in space) हो भी जाए तो भी रेडिएशन और कई वजहों से स्पेस बेबी (space baby), धरती के बच्चों से एकदम अलग होगा.

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    अगले कुछ दशकों में धरती की आबादी इतनी बढ़ जाएगी कि शायद यहां रहने की जगह ही न बचे. ये भी सकता है कि पर्यावरण इतना प्रदूषित हो जाए कि लोगों का जीना मुश्किल हो जाए. ऐसे में इंसान किसी दूसरे ग्रह पर रहना शुरू कर सकता है. इसके साथ ही स्पेस में मानव शिशु के जन्म की गुंजाइश भी बढ़ेगी. लेकिन बात ये है कि क्या स्पेस में जन्मा शिशु हमारी तरह होगा या फिर उसके नाक-नक्श और सोच एलियन की तरह होंगे.

    क्या स्पेस में इंसान का गर्भधारण मुमकिन है?
    अंतरिक्ष में अब तक कई जीव-जंतु प्रेग्नेंट हो चुके हैं, जिनमें चूहे से मछलियां तक शामिल हैं. दुनिया के कई देशों में महिला अंतरिक्ष यात्री भी लंबे समय के लिए स्पेस ट्रैवल कर रही हैं लेकिन अब तक इनमें से कोई भी इस स्पेस यात्रा के दौरान गर्भवती नहीं हुई. ऐसे में स्पेस बेबी की कल्पना अजीब तो है लेकिन वैज्ञानिक अब इसे साकार करने की ओर बढ़ रहे हैं.

    अगले 3 दशक में ऐसा कोई प्रयोग संभव 
    यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिक इसपर बात कर रहे हैं. वे मानते हैं कि अगले 30 सालों के भीतर यानी 2050 तक स्पेस बेबी कोई कल्पना नहीं होगी, बल्कि सच होगा. यानी हो सकता है कि तब तक मंगल या पास के किसी ग्रह पर जीवन के अनुकूल हालात खोज लिए जाएं और रहने की शुरुआत हो जाए. तब उन ग्रहों पर आबादी बढ़ाना एक बड़ी जिम्मेदारी होगी, लेकिन ये उतना आसान नहीं होगा.

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    हो सकता है कि स्पेस में जन्मे लोग धरती से इतने अलग हो जाएं कि उन्हें एक अलग स्पीशीज मानना पड़े- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    प्रसव के दौरान हड्डियां टूटने का डर 
    सबसे पहली समस्या तो होगी कि क्या अंतरिक्ष में प्रेग्नेंसी पूरे 9 महीनों तक सुरक्षित चल सकेगी. असल में स्पेस में रेडिएशन इतना ज्यादा होता है कि कई तरह के खतरे हो सकते हैं. अंतरिक्ष यात्रियों की बोन डेनसिटी भी तेजी से घटती है, जो कि गर्भवती की अपनी जान पर खतरा ला सकता है. बता दें कि स्पेस में जाने पर हर महीने लगभग 2% तक बोन डेनसिटी कमजोर हो जाती है. ऐसे में प्रसव के दौरान हड्डियां टूटने का डर रहेगा.

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    ग्रेविटी न होने के कारण सामान्य डिलीवरी नहीं 
    इसके अलावा गुरुत्वाकर्षण भी एक समस्या है. स्पेस में ग्रेविटी इतनी कम होती है कि सामान्य डिलीवरी संभव ही नहीं. यानी सर्जरी ही एक रास्ता होगी, जिसके अलग खतरे होंगे.

    अलग हो सकता है स्पेस बेबी 
    मान लो ये सारी बातें हो भी जाएं तो अंतरिक्ष में जन्मा शिशु, धरती के शिशुओं से काफी अलग होगा. जैसे सामान्य प्रसव न होने के कारण उसका सिर बड़ा होगा. साथ ही उसका रंग भी हमसे अलग हो सकता है. ये इसलिए क्योंकि कॉस्मिक किरणों से बचाव के लिए हमें हमेशा किसी सुरक्षा में रहना होगा. धीरे-धीरे रंग पूरी तरह बदल सकता है. ये बातें बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों के हवाले से दी गई हैं.

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    स्पेस में ग्रेविटी इतनी कम होती है कि सामान्य डिलीवरी संभव ही नहीं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    शिशु की देखभाल कैसे हो सकेगी?
    धीरे-धीरे ये भी हो सकता है कि स्पेस में जन्मे लोग धरती के लोगों से इतने अलग हो जाएं कि उन्हें एक अलग ही स्पीशीज की श्रेणी में रखना पड़े. हालांकि ये सब होना मुमकिन भी है या नहीं, फिलहाल इस बारे में पक्का नहीं कहा जा सकता. इसके पीछे केवल प्रेग्नेंट होना या सेफ ढंग से शिशु जन्म ही समस्या नहीं, बल्कि नवजात की देखभाल भी काफी बड़ी चुनौती होगी.

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    स्पेस में जीरो- ग्रेविटी और भयंकर रेडिएशन के बीच शिशु को सेफ रखने लिए अलग तरह के घरों की जरूरत होगी. ये काफी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्टर होगा, जिसकी लागत भी काफी होगी. इस पूरी प्रक्रिया में अभी कई दशक लग सकते हैं.

    डच कंपनी ने दिया अनोखा प्रस्ताव
    स्पेस बेबी की बहस के बीच कई स्पेस कंपनियां नए विचार भी ला रही हैं. जैसे नीदरलैंड की एक कंपनी स्पेसलाइफ ऑरिजिन ने कहा कि वो प्रसव से ठीक पहले किसी गर्भवती को धरती से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर ले जाकर उसकी डिलीवरी कराना चाहती है. लेकिन फिलहाल तक कंपनी के इस प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिल सकी है.

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