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25 हजार करोड़ से कैसे पूरे होंगे अधूरे पड़े लाखों हाउसिंग प्रोजेक्ट

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Updated: November 7, 2019, 6:38 PM IST
25 हजार करोड़ से कैसे पूरे होंगे अधूरे पड़े लाखों हाउसिंग प्रोजेक्ट
वित्तमंत्री ने अटके पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 25 हजार करोड़ के फंड का ऐलान किया है

बिल्डरों (builders) के चंगुल में फंसे लाखों होम बायर्स (home buyers) के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Niramala Sitharaman) ने बड़ा ऐलान किया है. सरकार 25 हजार करोड़ के फंड से अटके हुए पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट (housing project) को पूरा करेगी. जानिए इससे जुड़े हर सवाल का जवाब...

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  • Last Updated: November 7, 2019, 6:38 PM IST
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बिल्डरों (builders) के अधूरे पड़े प्रोजेक्ट (housing projects) को पूरा करने और होम बायर्स (home buyers) को उनका घर दिलवाने के लिए 25 हजार करोड़ के फंड देने का ऐलान किया है. सरकार बिल्डरों के चंगुल में फंसे होम बायर्स को बाहर निकालने के लिए एक अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड (AIF) बनाने की मंजूरी दी है.

वित्तमंत्री ने कहा है कि 25 हजार करोड़ रुपए के फंड के जरिए देशभर में अधूरे पड़े लाखों फ्लैट्स (flats) और घरों को पूरा किया जाएगा. इससे देश के रियल्टी सेक्टर (reality sector) में सुधार होगा और होम बायर्स को उनका घर मिल सकेगा. लेकिन सरकार के इस ऐलान को लेकर कई सवाल हैं.

क्या 25 हजार करोड़ की रकम सरकार देगी?

सरकार इस फंड में 10 हजार करोड़ की रकम डाल रही है. सरकार के अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एलआईसी 15 हजार करोड़ की रकम देगी. इस तरह से ये फंड 25 हजार करोड़ रुपए का होगा.

क्या सभी प्रोजेक्ट इस फंड की मदद से पूरा होंगे?

इस फंड को हासिल करने के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं. सिर्फ रेरा रजिस्टर्ड हाउसिंग प्रोजेक्ट ही इस फंड को हासिल कर सकते हैं. इस फंड को हासिल करने के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट का नेटवर्थ पॉजिटिव होना चाहिए. यानी प्रोजेक्ट के मालिक की जेब खाली नहीं होनी चाहिए.


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क्या एनपीए में गए प्रोजेक्ट भी इसमें शामिल होंगे?

ऑल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड का इस्तेमाल वैसे प्रोजेक्ट भी कर पाएंगे, जिन्हें नॉन परफॉर्मिंग असेट घोषित किया गया है. वैसे प्रोजेक्ट जिनका एनसीएलटी में इनसोलवेंसी प्रोसिडिंग्स चल रही है, वो भी इसमें शामिल किए जाएंगे. सरकार के अनुमान के मुताबिक देशभर में करीब 1600 प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जो इसके दायरे में आ सकते हैं. इससे करीब 4.58 हाउसिंग यूनिट्स को पूरा किया जाएगा.

एक बड़ी शर्त ये है कि फंड का इस्तेमाल सिर्फ उन्हीं प्रोजेक्ट में होगा, जिनका नेटवर्थ पॉजिटिव हो. यानी प्रोजेक्ट घाटे में चल रहा हो लेकिन बिल्डर के पास इतने पैसे हों कि वो फंड का इस्तेमाल कर अपना प्रोजेक्ट पूरा करने की स्थिति में हो. एकदम दिवालिया या बैंकरप्ट प्रोजेक्ट में इस फंड का इस्तेमाल नहीं होगा.

किन इलाकों में फंसे प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा?

इस फंड का इस्तेमाल सिर्फ दिल्ली-मुंबई में फंसे प्रोजेक्ट के लिए नहीं होगा. बल्कि देश के हर हिस्से का प्रोजेक्ट अगर निर्धारित शर्तों को पूरा करता है तो वो फंड का इस्तेमाल कर सकता है. दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं. एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में करीब 67 प्रोजेक्ट फंसे हैं. इन प्रोजेक्ट की कीमत तकरीबन 82 हजार करोड़ रुपए है. 1.18 लाख फ्लैट्स में करीब 69 फीसदी बनकर तैयार हैं. अटके हुए प्रोजेक्ट में 98 फीसदी प्रोजेक्ट सिर्फ नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हैं.

how will the home buyers dream come true with 25 thousand crore fund for stalled housing projects in reality sector
सरकार के फंड से लाखों होम बायर्स को उनका घर मिल सकेगा.


कैसे किया जाएगा फंड का इस्तेमाल?

ऑल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड (AIF) को प्रोफेशनल इंवेस्टमेंट मैनजरों की टीम मैनेज करेगी. SBICAP वेंचर लिमिटेड इसके लिए काम करेगी. शुरुआत में SBICAP एआईएफ को एक एस्क्रो अकाउंट के जरिए मैनेज करेगी. पहले फंसे हुए प्रोजेक्ट के बारे में पूरी जानकारी हासिल की जाएगी.

इस बात का भी पता लगाा जाएगा कि फंड के इस्तेमाल से इसे पूरा करना संभव है कि नहीं. अगर प्रोजेक्ट सभी शर्तों को पूरा करता है तो उसके लिए एक एस्क्रो अकाउंट खोला जाएगा. उसके बाद जरूरत के हिसाब से कई स्तरों पर प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए फंड रिलीज किया जाएगा.

क्या फंड का इस्तेमाल हर कीमत वाले हाउसिंग यूनिट को पूरा करने के लिए किया जाएगा?

नहीं. ऐसा नहीं है. सरकार ने इस फंड के दायरे में आने वाले हाउसिंग यूनिट की कीमतें तय की हैं. मुंबई में 2 करोड़ वाले हाउसिंग यूनिट को पूरा करने मे इस फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है. उसी तरह से दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे मेट्रो शहरों के लिए अधिकतम 1.5 करोड़ और नॉन मेट्रो शहरों के 1 करोड़ से नीचे की कीमत वाले फ्लैट्स को पूरा करने में इस फंड का उपयोग किया जा सकेगा.

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करीब 1600 प्रोजेक्ट सरकार के फंड के दायरे में आएंगे


क्या आम्रपाली और जेपी बिल्डर के अटके पड़े प्रोजेक्ट भी इसमें शामिल होंगे

इस फंड का इस्तेमाल किन बिल्डरों के अटके पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट में किया जाएगा, इसको लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. फिलहाल देशभर के 1600 प्रोजेक्ट के इसके दायरे में आने की बात की जा रही है. उन 1600 प्रोजेक्ट के नाम सामने आने पर ज्यादा अच्छे तरीके से पता चलेगा कि इससे किसको कितना फायदा होगा.

इस फंड का इस्तेमाल करने में एक शर्त सबसे जरूरी है. और वो है प्रोजेक्ट के नेटवर्थ का पॉजिटिव होना. यानी जिस बिल्डर की जेब खाली नहीं होगी, वही इस फंड का इस्तेमाल कर पाएगा. इस लिहाज से देखें तो आम्रपाली और जेपी ग्रुप के प्रोजेक्ट इस फंड के दायरे से बाहर होंगे. उनके अटके पड़े प्रोजेक्ट सरकार के इस फंड से पूरा नहीं हो पाएंगे.

क्या प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए बिल्डर को डायरेक्ट पैसे दिए जाएंगे

नहीं. पैसे डायरेक्ट बिल्डर को नहीं दिए जाएंगे. अगर प्रोजेक्ट फंड हासिल करने के दायरे में आने की सभी शर्तें को पूरा करता हो तो उसके नाम पर एक एस्क्रो अकाउंट खोला जाएगा. फंड मैनेजर इस प्रोजेक्ट के लिए कई स्तरों पर निर्माण कार्यों को देखते हुए फंड रिलीज करेंगे. जिस स्तर के निर्माण के लिए जितने पैसों की जरूरत होगी, उतने ही पैसे रिलीज किए जाएंगे.
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First published: November 7, 2019, 4:09 PM IST
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