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वैक्सीन परोपकार के लिए दुनिया किस तरह कह रही है 'भारत आभार'

भारत की वैक्सीन सप्लाई म्यांमार जैसे कई पड़ोसी देशों तक पहुंच चुकी है.

भारत की वैक्सीन सप्लाई म्यांमार जैसे कई पड़ोसी देशों तक पहुंच चुकी है.

तकलीफ में अक्सर हम स्वार्थी हो ही जाते हैं लेकिन कठिन समय में भी भारत ने जिस तरह सबके दर्द को समझकर हमदर्दी का हाथ बढ़ाया, उसके लिए दुनिया की शीर्ष संस्थाओं (Top Institutions) से लेकर वैज्ञानिकों (Top Scientist) तक भारत को मिसाल बता रहे हैं.

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    भारत में वैक्सीन दिए जाने का दूसरा फेज़ (Second Phase of Vaccination) शुरू होने के बीच कई देशों में वैक्सीन कार्यक्रम शुरू होने के पीछे भी भारत का हाथ रहा है. एक टॉप अमेरिकी वैज्ञानिक (US Scientist) ने दुनिया के कष्ट के समय में भारत के योगदान को इस तरह रेखांकित किया, 'दुनिया को घातक कोरोना वायरस (Corona Virus) से बचाने में भारत के अहम रोल को कम नहीं आंका जा सकता.' सिर्फ वैज्ञानिकों ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई कोनों और अहम नामों से भारत के Covid-19 टीकों व टीकाकरण के लिए वाहवाही मिल रही है.

    कोविड-19 महामारी के दौर में कई देशों की नज़र भारत की ओर इसलिए भी रही क्योंकि भारत को दुनिया की फार्मेसी के तौर पर भी जाना जाता है. भारत ने इस समय में अपनी दरियादिली का सबूत भी दिया तो कई देश वैक्सीन के लिए भारत के आगे लाइन लगाकर खड़े भी दिखे. भारत को किस तरह सराहा जा रहा है, यह जानना सुखद है.

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    WHO से मिला धन्यवाद
    भारत के वैक्सीन कार्यक्रम को सराहने में ताज़ा नाम अमेरिकी वैज्ञानिक का जुड़ा है. लेकिन, इससे पहले जबसे भारत में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुआ, तबसे ही भारत को तारीफें मिलने का सि​लसिला शुरू हुआ था. इस फे​हरिस्त को सिलसिलेवार बताते हुए सबसे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन के आभार का ज़िक्र अहम है.

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    भारत के योगदान के चलते 60 से ज़्यादा देशों में टीकाकरण शुरू हो सका.


    WHO के प्रमुख टेड्रोस ने करीब दो हफ्ते पहले कहा था कि कोरोना महामारी को हराने के लिए भारत के प्रयास बेहद सराहनीय रहे हैं और वैक्सीन निष्पक्षता के लिए भारत के नज़रिये को एक उदाहरण के तौर पर देशों को समझना चाहिए. यही नहीं, WHO ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि भारत के योगदान के चलते ही 60 से ज़्यादा देशों में टीकाकरण शुरू हो सका.

    अमेरिकी मीडिया ने थपथपाई पीठ
    गौरतलब यह है कि अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के दौर में वैक्सीनेशन शुरू होकर बुरी तरह फ्लॉप भी हो गया था. ऐसे में अमेरिकी मीडिया ने भारत में एक बेहतर उदाहरण देखा. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने जनवरी में ही लिखा था 'भारत का वैक्सीन वितरण का विशाल कार्यक्रम की मिसाल को दुनिया को फॉलो करना चाहिए'.

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    इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत का फार्मा सेक्टर ने केवल अपने देश बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए वैक्सीन उत्पादन कर रहा है. खास तौर से सिरम इंस्टीट्यूट की तारीफ करते हुए इस रिपोर्ट ने यूरोप के वैक्सीनेशन की तुलना में भी भारत के कार्यक्रम को बेहतर बताया था.

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    विदेशी मीडिया ने भारत के वैक्सीन रोलआउट को मिसाल बताया.


    वेबिनार में गूंजा भारत का नाम
    अमेरिका स्थित ह्यूस्टन के इंडो अमेरिकन कॉमर्स चेम्बर ने जो वेबिनार आयोजित किया, उसकी थीम थी कि वैक्सीनेशन से कैसे दुनिया सामान्य जीवन की तरफ लौट पाएगी. इसमें अमेरिका के टॉप वैज्ञानिकों में शुमार डॉ. पीटर हॉटेज़ ने भारत के सेटअप को दुनिया की ज़रूरतों के लिए अहमियत वाला करार देकर काफी चर्चा की.

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    हॉटेज़ ने भारत की इस बात की तारीफ की कि देश ने वैक्सीन डेवलपमेंट से लेकर उत्पादन तक दुनिया के देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर और आपसी समझ के साथ काम किया ताकि वैक्सीन से सिर्फ भारत नहीं बल्कि कई देशों का दर्द दूर हो सके. कई यूनिवर्सिटियों के साथ मिलकर वैक्सीन बनाने से लेकर बेहतरीन ढंग से सप्लाई करना भारत का काबिले तारीफ कदम हॉटेज़ ने बताया.

    बिल गेट्स फाउंडेशन से मिली वाहवाही
    तीसरी दुनिया यानी पिछड़े और गरीब देशों की पहुंच तक वैक्सीन ले जाने के मद्देनज़र विश्व स्तर पर Gavi और बिल व मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने एक अभियान चलाया था, जिसमें भारत की प्रमुख वैक्सीन निर्माता फार्मा कंपनियां जुड़ीं. इस करार के चलते भारत में​ निर्मित वैक्सीन के लाखों करोड़ों डोज़ ज़रूरतमंद देशों की आबादी तक पहुंचे, जिसके लिए फाउंडेशन ने भारत की खासी वाहवाही सोशल मीडिया के ज़रिये भी की.



    आभारी देशों ने कहा 'शुक्रिया भारत'
    घाना, सेशेल्स और एंटीगुआ जैसे कई अफ्रीकी देशों के साथ ही गरीब एशियाई देश भी इस फेहरिस्त में शुमार हैं, जैसा कि WHO ने 60 से ज़्यादा ऐसे देशों का ज़िक्र किया. एंटीगुआ व बरबूडा के पीएम गैस्टन ब्राउन ने कहा कि 'सदियों में कभी ही इस तरह की भलाई के काम करने का मौका आता है, जो भारत ने किया.'

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    यही नहीं, वॉल स्ट्रीट जर्नल हो या न्यूयॉर्क टाइम्स, कई प्रतिष्ठित संस्थाओं ने पड़ोसियों, दोस्तों और पराये देशों तक को लाखों डोज़ मुहैया कराने के लिए भारत को मिसाल और आदर्श तक करार दिया. दुनिया के साझा दुख में इलाज को भी खुले दिल से साझा करने के लिए भारत की भूमिका को कई देश लंबे समय तक याद रखने वाले हैं.

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