साल में 50 से ज्यादा सिगरेट पैक पीने जितनी घातक है निगेटिव सोच, Immunity से है संबंध

सेहत को लेकर नकारात्मक सोच बीमारियों के साथ जल्दी ही बुढ़ापा लाती है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

सेहत को लेकर नकारात्मक सोच बीमारियों के साथ जल्दी ही बुढ़ापा लाती है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

कोरोना संक्रमण के दौर में इम्युनिटी बढ़ाने (how to boost immunity power naturally amid coronavirus infection) पर जोर दिया जा रहा है. पॉजिटिव सोच से भी इम्युनिटी (positive attitude affects immunity) मजबूत होती है, वहीं सेहत को लेकर नकारात्मक सोच जल्दी बुढ़ापा लाती है.

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कोरोना के दौर में कुछ सबसे ज्यादा बोले जा रहे शब्दों में से एक है इम्युनिटी पावर (immunity power) यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता. कई शोध कह रहे हैं कि बेहतर इम्युनिटी वालों को कोरोना संक्रमण होने का डर कुछ हद तक कम हो जाता है, या फिर होता भी है तो मरीज उतना गंभीर नहीं होता. ऐसे में जाहिर तौर पर इम्युनिटी बढ़ाने के तरीके खोजे जा रहे हैं.

पॉजिटिव सोच का सेहत से ताल्लुक 

कई स्टडीज में ये निकलकर आया है कि जीवन और अपनी सेहत के लिए सकारात्मक सोच रखने वालों की बीमारियों से लड़ने की क्षमता काफी बेहतर होती है. ड्यूक यूनिवर्सिटी (Duke University) में एटिट्यूड और इम्युनिटी में संबंध को समझने के लिए एक प्रयोग हुआ. इसके तहत लगभग 3000 लोगों को शामिल किया गया, जो 15 से 50 साल की उम्र के थे. इनमें पूछा गया कि वे अपनी सेहत को किस श्रेणी में रखते हैं. बता दें कि इसके लिए चार श्रेणियां तैयार की गई थीं, जो बहुत खराब से बहुत बढ़िया कहलाती थीं.

positive thoughts and immunity
सेहत या जीने को लेकर खराब सोच से क्रॉनिक स्ट्रेस पैदा होता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

उम्र में तीन गुना फर्क 

पाया गया कि जिन लोगों ने अपनी सेहत को खराब बताया था, उनकी बजाए उन लोगों के बेहतर जीवन जीने और जीवित रहने की दर तीन गुना ज्यादा थी, जिन्होंने खुद को शानदार सेहत वाला कहा. यहां ये भी जानना जरूरी है कि शोध में उन्हीं लोगों को लिया गया, जो वाकई में सेहतमंद ही थे और हाई बीपी, डाइबिटीज या कैंसर जैसी कोई समस्या नहीं थी. इसके बाद भी अपने को कमजोर मानने वालों की मौत की दर ज्यादा रही.

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स्मोकिंग जितना खराब असर करती है निगेटिविटी 

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी (John Hopkins University) की एक स्टडी और भी बेहतर तस्वीर खींचती है. इसमें 5000 लोगों को लिया गया, जिनकी उम्र 65 से ज्यादा थी. इसमें देखा गया कि जो लोग खुद को कमजोर मानते थे, उनकी मौत 5 सालों के भीतर हो गई, वहीं खुद को मजबूत और सेहतमंद मानने वाले कई तरह की बीमारियों के बाद अच्छी जिंदगी जीते रहे. शोधार्थियों ने इस दौरान पाया कि सेहत और जीवन को लेकर नकारात्मक सोच सालभर में 50 से ज्यादा सिगरेट पैक पीने या फिर हार्ट फेल होने से भी ज्यादा बुरा असर डालती है.

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नकारात्मक सोच से ब्रेन में कई बदलाव होते हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

नकारात्मक सोच से शरीर में क्या होता है?

सेहत या जीने को लेकर खराब सोच से क्रॉनिक स्ट्रेस पैदा होता है. इससे सीधे हमारे हॉर्मोन्स पर असर होता है. इससे ब्रेन में उस हॉर्मोन का स्त्रावण घट जाता है, जो खुशी देता है. डोपामाइन नामक ये हॉर्मोन जैसे ही कम होता है, वैसे ही हमारी इम्युनिटी भी कम होने लगती है.

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कौन-सी बीमारियों का खतरा?

विज्ञान ने ये भी साबित कर दिया है कि तनाव और नकारात्मक सोच का सीधा और बेहद खराब असर हमारे DNA पर होता है और इसके कारण DNA के सिरों पर पाए जाने वाले टेलोमीटर छोटे होते जाते हैं. इससे हमारे भीतर बुढ़ापे के लक्षण जैसे बाल सफेद होना, हड्डियों का कमजोर होना, जैसे बुढ़ापे के लक्षण उम्र से पहले आने लगते हैं. साथ ही हाइपरटेंशन, कार्डियोवस्कुलर डिजीज और पाचनतंत्र से जुड़ूी बीमारियों का भी खतरा रहता है. इन सारी बीमारियों का एक बार फिर से इम्युनिटी पर असर होता है और व्यक्ति का किसी भी तरह के संक्रमण का शिकार होने का डर रहता है.

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निगेटिव सोच वाले लोगों पर कार्डियोवस्कुलर डिजीज का खतरा रहता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

हवा से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम होता है 

देखा गया है कि सकारात्मक सोच रखने वालों की उम्र बढ़ जाती है. ऐसे लोगों के डिप्रेशन में जाने का खतरा घटता है. कई रिपोर्ट्स ये भी साफ कर चुकी है कि कैसे ऐसे लोग हवा से फैलने वाली बीमारियों (airborne illnesses) से कई गुना सुरक्षित रहते हैं. खुद आपने देखा होगा कि हमेशा खुश रहने और खुद को स्वस्थ मानने वालों पर मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी का असर भी कम से कम दिखता है.

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किन चीजों से बढ़ती है सकारात्मकता 

ये तो हुए सकारात्मक सोच के फायदे. अब ये भी समझते चलें कि सकारात्मक सोच के लिए किन चीजों की मदद ली जा सकती है. इसमें सबसे पहले है कसरत. सप्ताह में कम से कम तीन दिन आधे घंटे की शारीरिक कसरत से डोपामाइन हॉर्मोन निकलता है, जो खुश रहने में मदद करता है. इससे सेहत भी दुरुस्त रहती है.

पॉजिटिव सोच के लिए डायट का भी खास महत्व

बढ़िया खाएंगे तो सोच भी बेहतर होगी. यहां बढ़िया से मतलब स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि पौष्टिक खाना है. उम्र और काम के मुताबिक डायट होनी चाहिए, जिसमें प्रोटीन, कार्ब्स, विटामिन और मिनरल- सबका संतुलन हो. इससे सोच के साथ मोटापा और दूसरी क्रॉनिक बीमारियां दूर रहती हैं.

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