1947 के बाद 72 साल में कैसे बदलता रहा है भारत का नक्शा?

1947 में आजाद होने के बाद भारत की बाहरी और आंतरिक सीमाओं में बदलाव हुए हैं.
1947 में आजाद होने के बाद भारत की बाहरी और आंतरिक सीमाओं में बदलाव हुए हैं.

भारत (India) को आजाद हुए 72 साल बीत चुके हैं. इस दौरान देश के राजनीतिक नक्शे (Political Map) में बदलाव होता रहा है. सिक्किम, गोवा और पॉन्डिचेरी जैसे राज्यों के जुड़ने से बाहरी सीमाएं बदलीं तो कई राज्यों के निर्माण की वजह से आंतरिक सीमाओं में बदलाव हुआ.

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भारत फिलहाल नेपाल द्वारा बेवक्त उठाए गए सीमा विवाद में उलझा हुआ है. नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया है जिसे मानने से भारत ने इंकार कर दिया है. हालांकि भारत और नेपाल का सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. भारत को आजाद हुए 72 साल बीत चुके हैं. इस दौरान देश के राजनीतिक नक्शे में बदलाव होता रहा है. कभी नए राज्यों के निर्माण की वजह से तो कभी सिक्किम जैसे राज्य के भारत में मिल जाने की वजह से. कुछ महीने पहले जम्मू-कश्मीर राज्य को दो संघशासित प्रदेशों में बदले जाने के बाद बदलाव आया है. आइए जानते हैं कि बीते सालों में भारत का नक्शा कैसे इवॉल्व हुआ है.

1947 में भी जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तानी कब्जे (POK) के बावजूद भारत आज भी उसे अपना अंग मानता है. भारत अब भी इसे अपने राजनीतिक नक्शे का अभिन्न अंग मानता है. इसके बाद 1963 में चीन के साथ सीमा विवाद जो 1950 के दशक से चला आ रहा था. जिसे हम आज अक्साई चिन के नाम से जानते हैं. इसके अलावा गोवा (1961), पॉन्डिचेरी (1962) और फिर सिक्किम(1975) में भारत की बाहरी सीमा में बदलाव हुआ. इन राज्यों के भारत में मिलने से देश की सीमाओं में विस्तार हुआ.

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भाषाई आधार पर राज्यों के बंटवारे के पक्षधर नहीं थे.




आजादी के बाद भारत की आंतरिक सीमाओं में पहला सबसे बड़ा फेरबदल सन 1956 में हुआ था. दरअसल 1953 में भाषाई आधार पर मद्रास राज्य के तेलुगु भाषी लोगों के लिए आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ था. इसके बाद स्टेट रिऑर्गेनाइजेशन कमीशन बनाया गया जिससे राज्यों की रिस्ट्रक्चरिंग की जा सके. दक्षिण भारत में भाषाई आधार पर राज्यों की मांग जोर पकड़ चुकी थी. 1956 में देश में 14 राज्य और 6 केंद्रित शासित प्रदेशों में विभक्त कर दिया गया. भारत में ये राज्यों का अब तक का सबसे बड़ा बंटवारा था और इस वक्त कई राज्य बने. विशेष रूप से मद्रास राज्य से टूटकर तमिलनाडु, केरल, आंध्र और कर्नाटक जैसे राज्य बनाए गए. लेकिन कमीशन ने बॉम्बे प्रांत और पंजाब के भाषाई आधार पर बंटवारे की पेशकश को गलत बताया था.
लेकिन इससे कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ा और भाषाई आधार पर संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन और महागुजरात आंदोलन की वजह से देश में दो नए राज्य बने. बॉम्बे प्रांत टूटकर महाराष्ट्र और गुजरात में विभक्त हो गया. ये सबकुछ 1960 में हुआ.

इसके बाद अकाली दल की अगुवाई में चलाए गए पंजाब सूबा आंदोलन की वजह से 1966 में सिख मेजॉरिटी वाला पंजाब बना. साथ ही हिंदी मेजॉरिटी वाले हरियाणा राज्य का निर्माण हुआ. इसके पहले पंजाब के कुछ पूर्वी पहाड़ी हिस्सों को हिमाचल प्रदेश के साथ मिला दिया गया था.



70 के दशक में भारत में राज्य की सीमाओं में कई परिवर्तन हुए. मणिपुर और त्रिपुरा को राज्य बनाने की संस्तुति कर दी गई. मेघालय और मिजोरम को 1972 में असम से अलग किया गया. तीन साल बाद सिक्किम में जनमत संग्रह हुआ और फिर सिक्किम भारत का हिस्सा बना. 1980 के दशक में मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश राज्य बनाए गए. 1987 में ये दोनों राज्य बनाए गए थे. इसी साल गोवा, दमन और दिउ में गोवा को राज्य बनाया गया और दमन-दिउ को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला.

इसके बाद अगले बड़े बदलाव 21 शताब्दी के पहले दशक में आए जब उत्तरांचल, झारखंड और छत्तीसगढ़ बनाने का फैसला किया गया. इन राज्यों को उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से अलग कर बनाया गया. इन इलाकों में राज्य की मांग लंबे समय से चली आ रही थी. इन्हें क्षेत्रीय पहचान की वजह से इन्हें अलग किया गया था. फिर साल 2014 में आंध्र प्रदेश को विभक्त कर तेलंगाना राज्य बना. सबसे आखिरी परिवर्तन 2019 में जम्मू-कश्मीर राज्य को दो संघशासित प्रदेशों में विभक्त कर किया गया है.

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