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भारत में धर्मस्थलों के पास अकूत संपत्ति, क्या कोरोना से लड़ाई में देंगे आर्थिक मदद

पद्मनाभ स्वामी के मंदिर को देश का सबसे अमीर धार्मिक स्थल माना जाता है.

पद्मनाभ स्वामी के मंदिर को देश का सबसे अमीर धार्मिक स्थल माना जाता है.

कोरोना वायरस से जारी जंग के बीच सोशल मीडिया पर ऐसी भी प्रतिक्रियाएं आई हैं जिनमें कहा गया कि इस समय धार्मिक स्थलों के खजाने को आम लोगों को बचाने के लिए खोल देना चाहिए.

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    कोरोना वायरस को लेकर भारत सरकार निर्णायक लड़ाई लड़ रही है. देश इस समय संक्रमण के दूसरे फेज में है.  तीसरे में पहुंचने के लिए अभी कुछ दिन बाकी हैं. अगर सरकार इस वैश्विक महामारी को दूसरे चरण में ही फैलने से रोक पाती है तो शायद हम उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएं जिन्होंने कोरोना के खिलाफ जंग जीती है. इन देशों में सिंगापुर, जापान, हांग-कांग और ताइवान जैसे देश शामिल हैं. इन देशों ने अपने यहां कोरोना का संक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ने ही नहीं दिया. लेकिन इन सबके बीच सरकार के बड़े प्रयासों के बड़े फंड की भी जरूरत होगी.

    पूरे देश में लागू आपातकालीन लॉकडाउन की वजह से सभी उद्योग धंधे बिल्कुल बंद हैं. कई व्यापारिक घराने इस लड़ाई में सरकार की मदद कर रहे हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर ये प्रतिक्रियाएं आईं हैं कि इस समय धार्मिक स्थलों को अपना खजाना आम लोगों को बचाने के लिए खोल देना चाहिए. अब इस मांग को लेकर क्या होगा या क्या नहीं, ये तो बाद बात है. आइए जानने की कोशिश करते हैं कि देश के धार्मिक स्थलों के पास कितनी संपत्ति है. सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई है.

    तिरुपति बालाजी को देश का दूसरा सबसे अमीर मंदिर माना जाता है


    इंडिया टुडे में 2016 में प्रकाशित एक रिपोर्ट का दावा है कि देश के दस मंदिरों के पास इतना खजाना है कि अगर ये खोल दिया जाए तो भारत की गरीबी मिट सकती है. ये रिपोर्ट नोटबंदी के समय की गई थी जब प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के पुराने नोट तत्काल बंद कर दिए थे. इस रिपोर्ट में दस मंदिरों और उनकी संपत्ति का जिक्र किया गया था. आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं-

    पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल)- 20 बिलियन डॉलर (तकरीबन डेढ़ लाख करोड़ रुपए)

    तिरुपति मेदिर (आंध्र प्रदेश)- हर साल करीब 650 करोड़ का चढ़ावा.

    साईं बाबा मंदिर (शिरडी)- सालाना करीब 360 करोड़ का चढ़ावा.

    वैष्णोदेवी मंदिर- सालाना 500 करोड़ की कमाई.

    सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई)-सालाना चढ़ावा 50 करोड़ से 125 करोड़ के बीच

    गोल्डेन टेंपल अमृतसर- इस मंदिर की छत सोने की बनी हुई है.

    मीनाक्षी मंदिर मदुरै- इस मंदिर में सालाना करीब 6 करोड़ का चढ़ावा आता है.

    जगन्नाथ मंदिर, पुरी- मंदिर की संपत्ति का निश्चित आंकड़ा लगाना मुश्किल है. लेकिन माना जाता है कि यहां पर करीब 130 किलो सोना और 220 किलो चांदी है.

    सोमनाथ मंदिर-सालाना 33 करोड़ चढ़ावा

    विश्वनाथ मंदिर-सालाना चढ़ावा 4 से पांच करोड़

    अन्य धर्मों में भी आते हैं चंदे
    अगर हिंदू धर्म के अलावा बात की जाए तो अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों पर भी चंदे की मोटी रकम आती है. इनमें हाजी अली दरगाह, अजमेर शरीफ दरगाह भी शामिल हैं. धर्म में लोगों की आस्था और पैसे की आवक बढ़ने के साथ ही धार्मिक स्थल पर चंदों के आकार ने वृदह रूप ले लिया है. कई धार्मिक स्थलों पर ऑनलाइन धार्मिक चंदे का भी प्रावधान है.

    मठों के पास है करोड़ों की संपत्ति
    इसके अलावा देशभर में फैले हुए हजारों मठों के पास करोड़ों की संपत्ति मौजूद है. हिंदू धर्म के विभिन्न संप्रदायों के ताल्लुक रखने वाले इन मठों के अनुयायियों की संख्या लाखों में होती है जो चंदा देते हैं.

    शिरडी साईंबाबा का मंदिर.


    सामाजिक कार्यों में करते हैं खर्च
    मंदिरों और मठों या अन्य धार्मिक स्थलों द्वारा कई सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं. तिरुपति बालाजी मंदिर की देखरेख करने वाला वाला ट्रस्ट कई अस्पताल और इंस्टीट्यूट चलाता है. इसके अलावा सत्यासाईं ट्रस्ट आंध्र में की कई योजनाएं चलाता है. शिरडी साईं बाबा संस्थान अस्पताल, शिक्षा, और अन्य सामाजिक कार्यों में अपनी आय का पचास फीसदी तक खर्च करता है. संस्थान ने सुपर-स्पेशिलिटी अस्पताल के अलावा सड़क निर्माण, जल प्रबंध और शिर्डी हवाई अड्डे के विकास जैसे कई कार्य किए हैं.

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