हमारे नॉनवेज खाने की वजह से खत्म हो गए ये पशु-पक्षी

हमारे नॉनवेज खाने की वजह से खत्म हो गए ये पशु-पक्षी
हमारे नॉनवेज खाने की वजह से बहुत सी प्रजातियां विलुप्त होने जा रही हैं (Photo-pixabay)

फ्रांस (France) में साल 1993 में ओर्टोलेन (ortolan) प्रजाति के पक्षियों को खाने पर मनाही लग गई, इसके बाद भी हर साल 30 हजार से ज्यादा पक्षियों का शिकार होता है. ओर्टोलेन ही नहीं, हमारे नॉनवेज खाने के कारण बहुत सी स्पीशीज खत्म होने की कगार (animals we are eating into extinction) पर हैं.

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केरल (Kerala) के मल्लपुरम में एक गर्भवती हथिनी की मौत (Kerala elephant death) चर्चा में है. लगातार इसपर बात हो रही है कि इंसानी क्रूरता के कारण कितने मासूम जानवरों की जान जा रही है. हमारे मांसाहार के शौक की भी ये जानवर बड़ी कीमत चुका रहे हैं. माना जा रहा है कि हमारे नॉनवेज खाने की वजह से बहुत सी प्रजातियां विलुप्त होने जा रही हैं. कई स्टडीज इस ओर इशारा करती हैं.

Marine Conservation Society (MCS) की एक स्टडी बताती है कि 10 प्रजातियां लगभग खत्म होने जा रही हैं. इसमें सबसे ऊपर है Chinese giant salamander. एक वक्त पर पूरे चीन में मिलने वाला छिपकली की तरह दिखने वाला ये जीव तेजी से गायब हुआ. पानी और जमीन दोनों में मिलने वाले सैलामेंडर को चीनी लोग चाव से खाते हैं. यही वजह है साल 1960 तक ही इसकी आबादी 80 फीसदी तक कम हो गई. इसे चीन की सरकार ने Endangered Species of Wild Fauna and Flora में सबसे ऊपर रखा ताकि इसे बचाया जा सके लेकिन तब भी चीन के लोग इसे खाते रहे. अब सैलामेंडर इतना कम हो चुका है कि ब्लैक मार्केट में काफी ऊंचे दामों पर मिलता है.

अब सैलामेंडर इतना कम हो चुका है कि ब्लैक मार्केट में काफी ऊंचे दामों पर मिलता है (Photo-pixabay)




Dodo भी ऐसी ही एक स्पीशीज है. ये पंक्षियों की एक प्रजाति है जो उड़ नहीं पाती है. इसका वजह टर्की से भी ज्यादा होता है और एक औसत डोडो पक्षी लगभग 23 किलो का होता है. साल 1507 में पुर्तगालियों ने इसे खाने की शुरुआत की थी. इसके बाद व्यापार के लिए लगातार यात्रा करने वाले व्यापारी और सैलानी भी इसे चाव से खाने लगे. साल 1681 में दुनिया का आखिरी डोडो भी मार दिया गया. अब सिर्फ म्यूजियम में इसके अवशेष रखे हुए हैं.



एक और स्तनधारी Pangolin को भी खूब खाया जाता है. चीन से फैले कोरोना वायरस के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि ये पेंगोलिन या फिर चमगादड़ से फैला है, वैसे इसका कोई प्रमाण फिलहाल नहीं मिल सका है. साल 2000 से पेंगोलिन की दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी हो रही है. चीन में लोग न केवल इसे खाते हैं, बल्कि चिकित्सा में भी इसका इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि ये स्पीशीज तेजी से घट रही है.

चीन से फैले कोरोना वायरस के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि ये पेंगोलिन या फिर चमगादड़ से फैला है (Photo-pixabay)


एक खास तरह की मछली, जिसे European eel कहते हैं, ये भी इस श्रेणी में आती है. ये मछली अटलांटिक से निकलकर ताजे पानी की ओर माइग्रेट करती है ताकि इसका विकास ठीक तरह से हो सके. पूरे विकास के बाद ईल वापस अटलांटिक लौट जाती है. ये पूरे यूरोप में बहुत पसंद की जाती है और खाई जाती है. तेजी से घटती संख्या को देखते हुए इसे खाने पर भी रोक लगा दी गई लेकिन तब भी इसकी तस्करी जारी है.

बंदरों की एक प्रजाति Red colobus का मांस नॉनवेज खाने वालों को इतना पसंद आता है कि इसे गुड फैमिली मील कहा जाता है. अफ्रीका में मिलने वाले बंदरों की ये स्पीशीज तेजी से कम हो रही है. माना जा रहा है कि इसके शिकार और खाए जाने की दर कम नहीं हुई तो अगले 5 सालों में ये पूरी तरह से गायब हो जाएंगे.

माना जा रहा है कि अब केवल 30 ही Saola बचे हैं


हिरण की तरह दिखने वाला एक जंतु Saola भी काफी तेजी से गायब हो रहा है. ये लाओस और वियतनाम की सीमा पर मिलने वाला पशु है, जिसे स्थानीय लोग भैंस की श्रेणी में रखते हैं और खाते हैं. ये उनके रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा हुआ करता था, जिसमें कई सारे परिवार एक साथ मिलकर गोश्त का आनंद लेते. साल 1990 में पहली बार पता चला कि ये प्रजाति गायब हो रही है, जब इनकी सींगें स्थानीय शिकारियों के घर मिलीं. माना जा रहा है कि अब केवल 30 ही Saola बचे हैं.

अब अगर पूरी तरह से खत्म हो चुकी स्पीशीज की बात करें तो इसमें सबसे पहला नाम Woolly Mammoth का आता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में  Mammuthus primigenius कहते हैं. हाथी और गैंडे से मिलती-जुलती ये प्रजाति स्तनधारियों में सबसे प्राचीन मानी जाती है, जो हमारे खाने की वजह से ही आज से 7500 साल पहले गायब हो गई. वैसे ब्रिटेनिका में आई रिपोर्ट के अनुसार हमारे शिकार के अलावा तापमान का बढ़ना भी इसके विलुप्त होने की वजह रहा.

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