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उम्मीद से ज्यादा गर्म रहता है इंसान का दिमाग- शोध

इंसान के दिमाग (Brain) का तापमान कई कारणों से एक सा नहीं रहता है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इंसान के दिमाग (Brain) का तापमान कई कारणों से एक सा नहीं रहता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मानव मस्तिष्क (Human Brain) पर हुए नए अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि मानव मस्तिष्क का तापमान एक सा नहीं होता है बल्कि जितना समझाता रहा है उससे कुछ ज्यादा ही होता है. Magnetic Resonance Spectroscopy की नई तकनीक से हुए अध्ययन के नतीजों ने मानव मस्तिष्क के बारे में कई पुरानी धारणाओं को तोड़ने का काम किया है. इससे मस्तिष्क की चोटों(Brain Injuries) और रोगों के उपचार में मदद मिल सकेगी.

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    प्रकृति की बनाई हुई अगर दुनिया की सबसे कोई जटिल चीज है तो वह शायद मानव मस्तिष्क (Human Brain) ही है. इस पर कई गहन शोध होने के बाद भी अभी तक हमें इसके बारे में केवल कुछ ही जानकारी मिल सकी है. चौंकाने वाली बात लगती है, लेकिन नए अध्ययन में वैज्ञानिकों को पता चला है कि हमारे मस्तिष्क का तापमान (Temperature of Brain) जो समझा जाता रहा है उससे कहीं अधिक बदलता है. इस अध्ययन से कई धारणाओं के साथ यह धारणा भी टूटी है कि शरीर और मस्तिष्क का तापमान एक ही रहता है. यह खोग मस्तिष्क संबंधी रोगों (Brain diseases) और व्याधियों के निदान और उपचार में बहुत सहायक हो सकती है.

    ज्यादा ही बदलाव
    इस अध्ययन में यह भी पाया गया है कि मस्तिष्क के दैनिक तापमान के चक्र का मस्तिष्क की चोटों से उबरने का गहरा संबंध है. पाया गया है कि मानव मस्तिष्क के तापमान में ज्यादा ही बदलाव आते हैं और यह एक सेहतमंद दिमाग की निशानी हो सकती है. जहां पुरुष और महिला दोनों के स्वस्थ शरीर का तापमान 37 डिग्री सेंटीग्रेड या 98.6 डिग्री फोरनहाइट माना जाता है,

    कितना होता है तापमान?
    लेकिन पाया गया है कि मानव का औसत तपामान 38.5 डिग्री सेंटीग्रेड या 101.3 डिग्री फोरनहाइट होता है और उसकी गहराई में कई बार यह तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेड या 104 डिग्री फोरनहाइट तक पहुंच जाता है. ऐसा विशेष तौर पर महिलाओं के साथ ज्यादा होता है कि उनके मस्तिष्क तापमान दिनभर पुरुषों की तुलना में ज्यादा होता है.

    पहले क्या होता था?
    मानव मस्तिष्क की पिछली पड़तालों में दिमाग की चोट लगे वाले गंभीर मरीजों से मिले आंकड़ों पर निर्भरता ज्यादा रहती थी, जहां दिमाग पर सीधी निगरानी की जरूरत ज्यादा हुआ करती थी. लेकिन हाल ही में मस्तिष्क पर निगरानी की नई स्कैनिक तकनीक सामने आई जिसे मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पैक्ट्रोस्कोपी (MRS) कहते हैं. इस मस्तिष्क को बिना खोले ही उसके अंदर के तापमान की जानकारी मिल सकती है.

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    महिलाओं (Women) के मस्तिष्क का तापमान पुरुषों के मुकाबले अलग ही रहता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    तापमान के लिए उपयोग नहीं
    लेकिन अजीब बात यह है कि एमआरएस को अभी तक मस्तिष्क के तापमान में बदलाव के अध्ययन के लिए उपयोग में ही नहीं लाया गया था. यूके के कैम्ब्रिज में मेडिकल रिसर्च काउंसिल (MRC) लैबोरेटरी फॉर मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिकों के नए अध्ययन में पहली बार स्वस्थ मस्तिष्क के तापमान का 4डी मैप बनाया है.

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    कौन कौन से कारक
    इस मैप को बनाते समय उन्हें पता चला है कि दिमाग का तापमान उसके क्षेत्रों, उम्र, लिंग, और दिन के समय के मुताबिक आश्चर्यजनक रूप से बदलता है. इस अध्ययन के नतीजों ने कई पूर्व धारणाओं को तोड़ा है जिसमें एक सबसे अहम यह भी है कि शरीर का तापमान और मस्तिष्क का तपामान एक ही सा रहता है.

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    कई बार तो दिमाग का तापमान (Brain Temperature) इतना ज्यादा होता है जो शरीर के हिसाब से बुखार का तापमान होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    दिमाग की चोटें
    यह अध्ययन हाल ही में जर्नल ब्रेन में प्रकाशित हुआ है. इसमें उन लोगों को भी अध्ययन किया गया जिन्हें मस्तिष्क में चोट लगने के बाद घाव हो गए थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसे मामलों में बचने का दैनिक मस्तिष्क चक्र से गहरा संबंध है. यह अध्ययन मस्तिष्क में लगी चोटों और उनके घावों के निदान और उपचार में काफी हद तक मददगार हो सकता है.

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    इस अध्ययन में स्वस्थ प्रतिभागियों का तापमान 38.5 38.5 डिग्री सेंटीग्रेड या 101.3 डिग्री फोरनहाइट पाया गया जो जीभ पर मापा जाने वाले तापमान से दो डिग्री ज्यादा था. अध्ययन में यह भी पाया गया कि दिमाग के तापमान में दिन के समय, दिमाग के क्षेत्र, लिंग और महिलाओं को मासिक चक्र और उम्र के कारण भी विविधता आती है. वैज्ञानिकों के लिए हैरानी की बात यह रही कि कई बार दिमाग का तापमान इतना ज्यादा हो जाता है जो शरीर के हिसाब से बुखार के स्तर का होता है.

    Tags: Brain, Health, Research, Science

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