हमारा Immune system तैयार नहीं हैं पृथ्वी के बाहर के Germs झेलने के लिए

हमारा Immune system तैयार नहीं हैं पृथ्वी के बाहर के Germs झेलने के लिए
वैज्ञानिकों को मानना है कि हमारा प्रतिरोधक तंत्र अंतरिक्षीय सूक्ष्मजीवों के साथ प्रतिक्रिया करने में समय लगा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक शोध से पता चला है कि इंसान का इम्यून सिस्टम (Immune System) पृथ्वी के बाहर के अनजाने सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) से निपटने के लिए तैयार नहीं है.

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इस महीने दो देशों ने अपने मंगल (Mars) अभियान के लिए यान प्रक्षेपित किए. यूएई (UAE) और चीन (China) के इस कदम से जाहिर है कि मंगल ग्रह को पूरी दुनिया कितनी अहमियत दे रही है. नासा (NASA) भी अगले दशक तक मंगल पर इंसान भेजनी की तैयारी गंभीरता से कर रहा है. मंगल पर इंसान को जाने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, इस पर भी शोध चल रहे हैं. नए अध्ययन के अनुसार इंसान का इम्यून सिस्टम (Immune system) दूसरे ग्रहों के कीटाणु (Germs) की पहचाने करने और उस पर प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार नहीं है.

कैसे किया अध्ययन
यूके की एबरडीन और एक्जीचर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस बात की पड़ताल की कि क्या होगा अगर इंसान का सामना उन सूक्ष्मजीवों से हो जो दूसरे ग्रहों या चंद्रमा से आएं. उन्होंने चूहों को प्रयोग के लिए चुना क्योंकि चूहों की प्रतिरोधी कोशिकाएं इंसान की प्रतिरोधी कोशिकाएं जैसी ही काम करती हैं. उन्होंने इस बात का अवलोकन किया कि कैसे ये चूहे उन तत्वों पर प्रतिक्रिया करते हैं जो पृथ्वी से बाहर पाए जाने वाले बाह्यसूक्ष्मजीवों में पाए जाते हैं.

पृथ्वी के बाहर भी होते हैं सूक्ष्मजीव
एक्टर यूनिवर्सिटी के बयान के मुताबिक पृथ्वी से बाहर भी सूक्ष्मजीव मौजूद रह सकते हैं और वे उन अमीनोएसिड से बहुत अलग हो सकते हैं जो पृथ्वी पर पाए जाते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि  एलियन पेप्टाइड्स पर प्रतिरोध की क्रिया पृथ्वी पर पाए जाने वाले पेप्टाइड्स की तुलना में कम कारगर रही. यह अध्ययन माइक्रोऑर्गनिज्म जर्नल में प्रकाशित हुआ है.



उल्कापिंड के अमीनोएसिड से की जांच
शोधकर्ताओं ने जांचा कि कैसे टी-कोशिकाएं (T cells), जो कि प्रतिरोध के लिए जरूरी हैं, कैसे आइसोवलाइन और एल्फाअमीनोआइसोब्यूटाइरिक जैसे अमीनोएसिड वाले पेप्टाइड्स पर प्रतिक्रिया करते हैं ये अमीनोएसिड आमतौर पर उल्कापिंड में पाए जाते हैं. डॉ कात्जा शेफेर का कहना है कि शोध ने दर्शाया कि स्तनपायी प्राणियों में का इम्यून सिस्टम  रासायनिक रूप से बदले  हुए एक्जोपेप्टआइड्स की पहचान तो कर सकते हैं लेकिन उस पर उनकी प्रतिक्रिया कम कारगर होती है.

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उल्कापिंड में पाए जाने तत्वों के आधार पर शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया. (फाइल फोटो)


को कितने तैयार है हम
उन्होंने कहा, “ इसलिए हमने पाया कि पृथ्वी से बाहर के सूक्ष्मजीव आगामी अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से जोखिम भर हो सकते हैं. ऐसे में दूसरे ग्रहों और चंद्रमा से भी ऐसे नमूने लाना जिनमें सूक्ष्मजीव हो सकते हैं, खतरनाक होगा.”

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नासा की यह है योजना
गौरतलब है कि नासा जो अगले महीने जो पर्सिवियरेंस रोवर मंगल ग्रह पर भेज रहा है. उसका एक काम वहां से मिट्टी के नमूने जमा करना भी है. इसके बाद नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी उन नमूनों को वापस लाने की योजना भी तैयार कर चुके हैं कई वैज्ञानिकों ने इन नमूनों में खतरनाक सूक्ष्म जीव होने की आशंका भी जताई है.

नासा का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल पर मिट्टी के नमूने जमा करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कोरोना वायरस ने भी बढ़ाई आशंका
ऐसी आशंका तब से और ज्यादा बढ़ गई है जब से पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में आई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब दुनिया कोरोना वायरस जैसी आपदा से निपटने के लिए तैयार नहीं है तो मंगल ग्रह से नमूने लाने का जोखिम क्यों लिया जा रहा है.

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इन तमाम आशंकाओं के बाद भी नासा अगले महीने पर्सिवियरेंस रोवर का प्रक्षेपण करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. यह रोवर अगले साल 18 फरवरी को मंगल ग्रह पर उतारा जाएगा. इसे अभियान को नासा के मंगल ग्रह पर जाने की योजना तैयारी का हिस्सा ही माना जा रहा है.
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