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OPINION: एनकाउंटर पर खुशी की लहर, मतलब पब्लिक का धैर्य जवाब दे रहा है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: December 6, 2019, 2:47 PM IST
OPINION: एनकाउंटर पर खुशी की लहर, मतलब पब्लिक का धैर्य जवाब दे रहा है
हैदराबाद में जहां गैंगरेप और मर्डर के आरोपियों का एनकाउंटर हुआ वहां लोग फूल बरसा रहे हैं

हैदराबाद गैंगरेप और मर्डर के आरोपियों को हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर के बाद मार गिराया, इसके बाद सोशल मीडिया पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी. ये संकेत कम से कम हमारे नीति निर्धारकों के लिए अलार्मिंग भी है.

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  • Last Updated: December 6, 2019, 2:47 PM IST
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शायद ये देश में पहली बार ऐसा हो रहा होगा जब पुलिस एनकाउंटर पर पूरे देश में खुशी की लहर है. लोग हैदराबाद पुलिस को बधाई दे रहे हैं. 27 नवंबर की रात चार दरिंदो ने जिस तरह एक महिला वेटनरी डॉक्टर से हाइवे के पास पहले गैंगरेप किया और फिर क्रूर तरीके से उसे जिंदा ही जला दिया, उससे सारे देश में सिरहन महसूस की गई थी.

उसे लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही थीं. संसद जैसी जगह पर कई ऐसे सांसदों ने कहा कि इस मामले में हमें शरीयत से शिक्षा लेते हुए इन अपराधियों को तुरंत मौत के घाट उतार देना चाहिए. संसद से जब इस तरह की आवाज आ रही हो तो बाहर जनता में इसे लेकर कितना गुस्सा रहा होगा, वो समझा जा सकता है, लेकिन हर कानून शासित राज की अपनी मजबूरियां भी होती हैं. गंभीर से गंभीर और क्रूरतम अपराध में भी अपराधियों को अदालती प्रक्रिया से गुजरना होता है, जो काफी लंबी होती है.

इस तरह की लंबी प्रक्रिया में कई बार अपराधी बच जाता है, तो कई बार उसे सजा होती है. गैंगरेप जैसे कानून में भी ऐसे छेद हैं कि हमारे यहां बहुत कम अपराधियों को मौत की सजा हो पाती है, वो भी कई साल बाद. इतने समय में भुग्तभोगी परिवार और पीड़िया अपने आप रोज मरते रहे हैं. हमारा समाज भी उनके साथ खड़ा नहीं दिखता.

सात साल से निर्भया के गुनहगारों को फांसी नहीं 

वर्ष 2012 में जब दिल्ली में निर्भया गैंगरेप और मर्डर कांड हुआ, तो पूरी दिल्ली ही नहीं बल्कि देश दहल गया था. लंबी लंबी रैलियां निकलीं, कैंडल मार्च हुए. ये सोच-विचार हुआ कि ऐसे जघन्य मामलों में हम कितनी जल्दी अपराधियों को सजा दे सकते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि सात साल होने के बाद भी अब तक उसके चारों गुनहगारों को फांसी की सजा नहीं हो पाई है.

क्या पब्लिक का धैर्य जवाब दे रहा है
जब सिस्टम सड़ जाता है तो वहीं होता है, जो हम हैदराबाद में देख रहे हैं. पहली बार किसी एनकाउंटर पर ऐसा जश्न हो रहा है. कानूनी पहलू अपनी जगह, लेकिन लोगों ये इंसाफ फिल्मी अंदाज में मिला है, इसीलिए जश्न हो रहा है. ये नीति निर्धारकों के लिए सबक है. ऐसे मामलों की समयबद्ध तरीक़े से सुनवाई हो. नहीं तो पब्लिक का धैर्य जवाब दे रहा है.पुलिस को कम मिलती है इस तरह की शाबासी
अगर सोशल मीडिया को देखिए तो वहां पुलिस को बधाइयों का तांता लगा हुआ है. उस जगह पर लोग फूलों की बारिश कर रहे हैं जहां एनकाउंटर हुआ है, समझा जा सकता है कि लोगों के मन में कितना गुस्सा रहा होगा. हालांकि, हर किसी को पुलिस की उस कहानी पर शायद ही विश्वास हो कि ये चारों अपराधी पुलिस पर हमला करके भागने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद पुलिस इस बार उनके लिए शाबासी की हकदार है.

ये पुलिस एनकाउंटर साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जानार हीरो बने हुए हैं. सज्जनार के बारे में कहा जाता है कि वो विनम्र पुलिस अफसर हैं, लेकिन ऐसे मामलों को वो अक्सर अलग तरीके से टेकल करने में विश्वास करते हैं.



ट्विटर पर वाह वाह
ट्विटर पर ये एनकाउंटर कई नामों से ट्रेंड कर रहा है. हर जगह पुलिस की वाह वाह हो रही है. मुझको याद नहीं पड़ता इससे पहले पुलिस की कार्रवाई को अखिल भारतीय स्तर पर एक स्वर से इतनी दाद मिली हो. दरअसल, ये तारीख असल में पब्लिक की सही समय पर न्याय नहीं मिल पाने की पीड़ा की अभिव्यक्ति भी है.

दुनियाभर में सबसे तेजी से निपटाए जाते हैं रेप के मामले
दुनियाभर के ज्यादातर देशों में रेप के मामलों को सबसे ज्यादा तेजी से अदालत में निपटाने के कोशिश होती है. क्योंकि इसके सामाजिक पक्ष और मानवीय पक्ष के साथ मनोवैज्ञानिक पहलू भी हैं. ये बात हमारे कानूनविदों और संसद में बैठे लोगों को समझनी होगी.

हैदराबाद गैंगरेप और मर्डर के आरोप, जिनका अब एनकाउंटर हो चुका है


कई देशों में चट न्याय पर विश्वास
दुनियाभर में तमाम देश ऐसे भी हैं, जो रेप के मामलों में चट न्याय और कड़ी सजा पर विश्वास करते हैं. चीन में हर साल 1000 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है, जिसमें काफी बड़ी संख्या रेप अपराधियों की होती है. सऊदी अरब को महीने भर के भीतर उनकी सजा मुकर्रर हो जाती है और सिर कलम कर दिया जाता है. ईरान, इराक, वियतनाम ऐसे देश हैं, जहां रेप सबसे जघन्य अपराधों की श्रेणी में आता है और माना जाता है कि रेपिस्ट को जिंदा रहने का अधिकार नहीं.

कई बार ऐसे कड़े कानून अगर जरूरी होते हैं तो अपराधियों में खौफ भी पैदा करते हैं. उसी की जरूरत अब भारत में भी है ताकि हम सभी की मां, बेटियां और बहनें महफूज रहें.

हमारे देश में रेप के भयावह आंकड़े
आंकड़ें कहते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा रेप के मामलों में भारत की जगह चौथे नंबर पर है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने वर्ष 2013 की रिपोर्ट में कहा कि वर्ष 2012 में सालभर में देश में 24,923 रेप के मामले दर्ज किये गए. यानी देश में हर रोज करीब 70 रेप के मामले होते हैं. ये आंकड़ें सात साल पहले के हैं, इसमें बढोतरी ही हुई है.

ट्विटर पर हैशटैग एनकाउंटर में किसी नारायण चौधरी ने ट्वीट किया,
"हिंदुस्तान यही न्याय तो मांग रहा था
न मुकदमा न अपील, न वकील, न मिलार्ड, न मानवतावादी गैंग का ड्रामा न राष्ट्रपति के पास कोई गुहार
और सीधे इंसाफ
हैदराबाद के चारो बलात्कारियों को मार गिराया गया, ये दरिंदों को संदेश है कि अब बहन बेटियों की तरफ आंख भी उठाया तो सीधे नर्क "
यकीन मानिए ट्विटर आज इस तरह के लाखों ट्वीट्स से भरा पड़ा है.

इन संदेशों को बहुत से लोग खतरनाक कह रहे हैं, कुछ लोग ये कह रहे हैं कि अपराधियों ने चाहे कितना जघन्य अपराध किया, लेकिन उन्हें न्याय प्रक्रिया से गुजरना चाहिए था. हालात वाकई सोचने लायक भी और खतरनाक भी. ये नीति नियंताओं के लिए एक अलार्म भी कि महिलाओं को सबसे ज्यादा सुरक्षित करने के लिए वो क्या कर सकते हैं?

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First published: December 6, 2019, 1:19 PM IST
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