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वैज्ञानिकों ने सूक्ष्मजीवों से भरी बूंदों से ऑक्सीजन की जगह बनाई हाइड्रोजन

वैज्ञानिकों ने केवल एक बूंद (one droplet) में ऐसी स्थितियां बनाई जिसमें ऑक्सीजन (Oxygen) की जगह हाइड्रोजन (Hydrogen) बनने लगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: )
वैज्ञानिकों ने केवल एक बूंद (one droplet) में ऐसी स्थितियां बनाई जिसमें ऑक्सीजन (Oxygen) की जगह हाइड्रोजन (Hydrogen) बनने लगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: )

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2020, 1:21 PM IST
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हम सभी जानते हैं कि प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया से ऑक्सीजन (Oxygen) पैदा होती है. इसी तरह की प्रक्रिया कई बैक्टीरिया (Bacteria)) भी कर लेते हैं. लेकिन अगर इस प्रक्रिया में सभी कुछ वैसा ही हो और ऑक्सीजन की जगह हाइड्रोजन (Hydrogen) निकले तो यह क्रांतिकारी कदम साबित होगा. ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने ऐसा ही कर दिखाया है जो भविष्य में ऊर्जा का बड़ा और अहम स्रोत (Energy Source) साबित हो सकता है.

किसने किया यह शोध
ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी और चीन में हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम की यह पड़ताल नेचर कम्यूनिकेशन्स में प्राकशित हुई है. वैज्ञानिकों ने एक छोटी बूंदों में सूक्ष्मजीवों की फैक्ट्री बनाई है जो हवा में सूर्य के प्रकाश में ऑक्सीजन की जगह हाइड्रोजन को पैदा करती हैं.

केवल एक बदलाव
आमतौर पर शैवाल (Algal) कोशिकाएं  कार्बन डाइऑक्साइड को प्रकाश संष्लेषण (Photosynthesis) द्वारा ऑक्सीजन में बदल देती हैं. इस अध्ययन में शैवाल कोशिकाएं से भरी शक्कर की बूंदों का उपयोग किया जिसमें फोटोसिंथेसिस से ऑक्सीजन की जगह हाइड्रोजन पैदा हुई.



हाइड्रोजन की अहमियत
हाइड्रोजन  एक बहुत ही पर्वायवरण के अनुकूल एक तटस्थ ईंधन है जो भविष्य में ऊर्जा के बहुत से स्रोतों के तौर पर उपयोग में लाया जा सकता है. इसके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसका उत्पादन बहुत ही महंगा और इसके उत्पादन में काफी ऊर्जा की जरूरत होती है. इसलिए यह खोज बहुत ही उपयोगी साबित हो सकती है.

केवल एक ही मिलीलीटर पानी में
टीम ने ऑस्मोटिक कंप्रैशन से हजारों शैवाल कोशिकाओं को एक बूंद में समेटा. इन कोशिकाओं का बूंदों में डालने से इनका ऑक्सीजन स्तर कम हो गया जिससे हाइड्रोजनेसेस एंजाइम ने फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया में  दखल देकर हाइड्रोजन का उत्पादन करना शुरू कर दिया. इस तरह से उन्होंने ढाई लाख सूक्ष्मजीवों की फैक्ट्रियां बना डाली. इसमें प्रत्येक का आकार मिलीमीटर के दसवें हिस्से का था. यह सब केवल एक मिलीलीटर के पानी में ही बनाया जा सकता है.

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इस प्रक्रिया में खास तरह के एंजाइम (Enzyme) को बैक्टीरिया (Bacteria) में सक्रिय कराया गया.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


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कैसे तैयार किया कोशिकाओं को प्रक्रिया के लिए
हाइड्रोजन के उत्पादन का स्तर बढ़ाने के लिए शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया की एक पतली खोल पर जिंदा माइक्रोरिएक्टरस की परत चढाई,  जिन्होंने ऑक्सीजन को गहराई से खोजा और शैवाल कोशिकाओ को हाइड्रोजेनेस प्रक्रिया के लिए तैयार किया. इस टीम में ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ केमिस्ट्री के प्रोफेसर स्टीफन मान और डॉ मेई ली के साथ चीन की हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर जिन हुआंग और उनके साथी शामिल थे.



एक बड़ी उपलब्धि के लिए अहम कदम
हालांकि यह शुरुआती अवस्था है, लेकिन यह काम प्राकृतिक एरोबिक हालातों में  फोटोबायोलॉजीकल ग्रीन एनर्जी के विकास की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा. प्रोफेसर स्टीफन मैन ने बताया, “केवल कुछ सामान्य सी बूंदों से शैवाल कोशिकाओं के प्रकाश संश्लेषण को नियंत्रित करने से हाइड्रोजन उत्पादन की एक बढ़िया तकनीक मिल गई है.”

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हार्बिन इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर जिन हुआंग ने बताया, “हमारी पद्धति नाजुक है और बड़े पैमाने पर बिना कोशिकाओं की क्षमताओं को कम किए इसे काम करना चाहिए. यह लचीली भी लगती है मिसा ल के तौर पर हमने हाल ही में एक खमीर की कोशिकाओं को बड़ी संख्या में बंदों में समेट कर देखा था और सूक्ष्मजीवी रिएक्टर का उपयोग इथोनॉल के उतप्दान में किया था.
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