FAQ: क्या कोरोना से निपटने के लिए लॉकडाउन सही रणनीति है?

महाराष्ट्र में लगातार बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले

महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर फिर तेज होती दिख रही है. हालांकि उसकी तीव्रता वैसी नहीं रह गई है. मृतकों की संख्या भी काफी कम हो चुकी है. ऐसे में क्या लाकडाउन लगाना सही रणनीति है और टीकाकरण इस हालत में कितना अहम रोल निभाएगा. इन्हीं बातों को सवाल - जवाब के तौर पर समझाने की कोशिश की गई है.

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    ऐसा लग रहा है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर फिर कई राज्यों में आ गई है. हालांकि इसकी तीव्रता और संख्या वैसी नहीं है, जैसी पहली लहर में नजर आई थी. हालांकि महाराष्ट्र में कोरोना मामले बहुत तेजी से रोजाना बढ़ रहे हैं. वहां फिलहाल 16000 केस रोज आ रहे हैं. अगर यही हालत रहती है कि तो राज्य में रोजाना कोरोना मरीजों की संख्या 20,000 रोजाना की हो सकती है. मुंबई के कुछ हिस्सों में लाकडाउन लगा दिया गया है. कोरोना की संख्या को कम किया जा सके, इसके लिए और भी हिस्सों में लाकडाउन की बात कही जा रही है.

    क्या कोरोना के मामलों में लाकडाउन लगाना क्या सामाजिक और आर्थिक असर के तौर पर सही है या ऐसा करना कोविड से भी ज्यादा नुकसानदायक होगा, जैसा कि हमने कोरोना के पहले चरण की लहर के बाद देखा. ये भी बात सही है कि अब जो कोरोना फैल रहा है वो पहले की तुलना में कम खतरनाक है. केस बढ़ने के बाद भी ये नजर आ रहा है कि बीमार जल्दी ठीक हो रहे हैं और मौतों की संख्या भी काफी कम है. उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र में मृतकों की संख्या 01 फीसदी से भी कम है. महाराष्ट्र सरकार के कोरोना से निपटने की रणनीति पर कुछ सवाल जवाब

    सवाल - क्या महाराष्ट्र सरकार की संक्रमित जोन बनाने की रणनीति ठीक है
    - इसमें कुछ भी गलत नहीं है. कोरोना का कर्व अलग-अलग इलाकों में अलग पहलुओं के कारण अलग है. ये वहां के भूगोल, मौसम के पैटर्न और उस इलाके की इंटरनेशनल कनेक्टिविटी पर भी निर्भर करता है. इन कर्व के बारे में सही सही अनुमान लगा पाना भी अभी आसान नहीं है. सही बात तो ये ही कि दुनियाभर में कहीं कोरोना की ट्रेजेक्ट्री का सही तरीके से आकलन नहीं किया जा सका है. हर जगह की अपनी विविधताएं हैं.

    सवाल - क्या महाराष्ट्र में फिर से लाकडाउन लगाना मदद करेगा
    - विशेषज्ञों का कहना है वायरस के फैलाव को बढ़ने से रोकने के लिए ये सही रणनीति है. लाकडाउन केवल कुछ ठहराव का काम करता है. बहुत शुरुआती दौर में आपदा में ये खास भूमिका निभाता है ताकि हम इससे बचाव की तैयारी कर सकें. इससे शुरुआती दिनों में भारत में भी लाकडाउन लगाकर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर किया गया. अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाई गई, लैब नेटवर्क बढ़ाया और आक्सीजन से जुड़ी सुविधाएं और वेंटीलेटर में इजाफा किया गया.

    लेकिन अब जबकि कोरोना से निपटने के लिए हमारा सिस्टम तैयार हो चुका है, ऐसे में लाकडाउन और संक्रमित जोन की रणनीति ज्यादा काम नहीं आने वाली. जबकि लाकडाउन के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव बहुत ज्यादा हैं. इससे कितना और कैसा नुकसान होता है, हम सभी देख चुके हैं, ये और बड़ी समस्या को जन्म दे सकता है.

    सवाल - ऐसे में क्या किया जाना ज्यादा बेहतर होता
    - सबसे असरदार तरीका ऐसे में अपने सर्विलेंस यानि निगरानी सिस्टम को मजबूत करना होगा. यानि कहीं ज्यादा तेजी से कांट्रैक्ट ट्रेसिंग की जाए, मॉनिटर क्लिक बढ़ें और घर के आइसोलेशन में रह रहे लोगों की निगरानी सुनिश्चित की जाए. जितनी संभव हों, उतनी फील्ड यूनिट्स इसके लिए सक्रिय की जाएं.

    सवाल - वैक्सीनेशन यानि टीकाकरण की भूमिका क्या होगी
    -टीकाकरण की निश्चित तौर पर अहम भूमिका यहां होगी. इंडियन मेडिकल रिसर्च कौंसिल द्वारा किए गए सीरोसर्व के रिजल्ट बताते हैं कि ज्यादातर जगहों पर 20-25 फीसदी से ज्यादा लोग वायरस से संक्रमित नहीं हुए. इसलिए इन लोगों के लिए इम्युनिटी हासिल करना बेहतर हो सकता है. फिर जितनी तेजी से टीकाकरण होता जाएगा, लोग उतनी ही तेजी से इस बीमारी से इम्युन होते जाएंगे. इसलिए हम उतनी ही तेजी से उस स्टेज पर पहुंच जाएंगे, जहां हर्ड इम्युनिटी काम करने लगेगी.

    सवाल - टीकाकरण तो अब चरणबद्ध तरीके से हो रहा है. ये सबके लिए क्यों उपलब्ध नहीं है.
    - हालांकि वैक्सीन के जो ट्रायल हुए हैं, उनके परिणाम बहुत बेहतर और उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं. लेकिन हमें साथ ही इसे लेकर बहुत सावधानी भी बरतनी होगी. क्योंकि अभी हमारे पास जो डाटा है, वो बहुत कम समय का है. इसलिए बेहतर होगा कि जिन्हें वैक्सीन दी जा रही है, उन पर इसके असर को मॉनिटर किया जा सके. इसके लिए एक मॉनिटरिंग सिस्टम एईएफआई सर्विलेंस शुरू किया गया है, जिसमें इस पर निगाह रखी जा रही है कि टीका लगने के बाद कोई प्रतिकूल असर तो नहीं हो रहा. अगर ऐसा हुआ हो तो उसे जांचा और समझा जा सके.

    सवाल - वैक्सीन के लिए काफी बड़े स्तर पर डाक्यूमेंटेशन की क्या जरूरत है
    - वैक्सीनेशन के लिए बड़े पैमाने पर डॉक्यूमेंटेशन फिलहाल हो रहा है. इससे एनालाइज करने और ज्यादा डाटा हासिल करने में मदद मिलेगी. तब हम इसकी सेफ्टी और असर के बारे में भी ज्यादा बेहतर तरीके से समझ पाएंगे.

    सवाल - कब वैक्सीन सबके लिए उपलब्ध होगी
    - एक - दो महीने में वैक्सीन सबके लिए उपलब्ध हो जाने की उम्मीद है. लेकिन अभी इसके चरणबद्ध तरीके से किया जाना हर लिहाज से सही तरीका है.

    सवाल - जिन लोगों ने वैक्सीन के दोनों डोज ले लिए हैं, क्या उन्हें अब भी सावधानी की जरूरत है
    - कोई भी वैक्सीन 100 फीसदी असरदार नहीं है. खासकर कोविड-19 की तो बिल्कुल नहीं. इसका मतलब ये हुआ कि व्यक्तिगत स्तर पर जोखिम वैक्सीन लगाने के बाद भी रह सकता है. हालांकि ऐसा होने की आशंका बहुत कम ही रहेगी लेकिन अभी हमें इसके कितने समय तक ये असर करेगी, इसके बारे में नहीं मालूम. इसका उत्तर आने वाले समय में ही पता चलेगी. इसलिए खास सलाह यही है कि वैक्सीन लगाने के बाद भी लोगों को कोविड की सावधानियों का पूरा पालन करना चाहिए.

    सवाल - हमें कब तक मास्क के साथ रहना होगा
    - ये कहना बहुत कठिन है. अभी अनिश्चितता की स्थिति है. कोरोना के नए नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं. इसलिए वैक्सीन उन सभी के खिलाफ कितनी कारगर है, ये नहीं मालूम. इसलिए जरूरी है कि मास्क लगाकर रखा जाए और दूरी का पालन किया जाए.

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