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कैसे होती है IAS अधिकारियों की केंद्रीय नियुक्ति, क्यों है यह चर्चा में

कैसे होती है IAS अधिकारियों की केंद्रीय नियुक्ति, क्यों है यह चर्चा में

अभी भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Services) कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति में केंद्र सरकार के निर्णय राज्य सरकार की सहमति से होते हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अभी भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Services) कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति में केंद्र सरकार के निर्णय राज्य सरकार की सहमति से होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

भारत (India) की केंद्र सरकार ने हाल ही में एक प्रस्ताव दिया है जसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative services) के अफसरों की केंद्रीय नियुक्ति (Central Deputation) के नियमों में बदलाव का प्रावधान है. यह एक संवेदनशील मुद्दा है और इसकी वजह से केंद्र और राज्यों के बीच संबंध तक प्रभावित होते रहे हैं. केंद्र सरकार ने यह कदम अपने डेप्यूटेशन रिजर्व में अधिकारियों की कमी को देखते हुए उठाया है.

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    भारत (India) के शासन और प्रशासन तंत्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Services) एक रीढ़ का काम करती हैं. इसी की वजह से भारत जैसे विशाल देश का संघीय ढांचा अब तक सुचारू रूप से काम कर रहा है.  हाल ही में केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियमों में कुछ सुधारों का प्रस्ताव किया है जिससे केंद्रीय आईएस अधिकारियों की नियुक्ति (Deputation of IAS Officers) पर ज्यादा नियंत्रण हो सकता है. केंद्रीय अधिकारियों की नियुक्ति अकसर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विवाद का कारण रहा है.  आइए जानते है कि प्रशासनिक सेवा के केंद्रीय अधिकारियों की नियुक्ति कैसे होती है, उससे संबंधित समस्याएं क्या हैं और केंद्र सरकार का क्या प्रस्ताव है.

    क्या है वर्तमान में व्यवस्था
    भारत की राज्य सरकार के कलेक्टर, उसके समकक्ष और अन्य शीर्ष अधिकारी भारतीय प्रशासिनिक सेवा के अधिकारी होते हैं. फिलहाल जो केंद्र सरकार द्वारा आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति के नियम हैं वह आईएएस कैडर नियम 1954  के नियम 6 (1) के तहत होते हैं इसके अनुसार एक कैडर अफसर की केंद्र सरकार या दूसरी राज्य सरकार, या किसी कंपनी, किसी सरकारी संघ या व्यक्तियों के निकाय में नियुक्ति केंद्र और राज्य सरकार की सहमति से होगी.

    केद्र सरकार का निर्णय
    इस नियम में यह भी कहा गया है कि असहमति होने की स्थिति में यह मामला केंद्र सरकार और राज्य सरकार या संबंधित सरकारें केद्र सरकार के निर्णय को प्रभावशील करेंगी. जनवरी 2021 तक देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के 5200 अधिकारियों में से 458  केंद्र द्वारा नियुक्त किए गए थे.

    पर्याप्त अधिकारी नहीं
    एक महीने पहले भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखा था कि, “..कई राज्य/संयुक्त कैडर केंद्रीय डेप्यूटेशन रिजर्व के लिए केंद्रीय नियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारियों को प्रायोजित नहीं कर रहे हैं. इसका नतीजा यह है कि केंद्रीय नियुक्ति के लिए जितने भी अधिकारी  उपलब्ध हैं उनकी संख्या केंद्र की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

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    भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Services) की केंद्रीय नियुक्ति में केंद्र सरकार का निर्णय प्रभावी होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    मौजूदा नियम का हवाला
    इस पत्र में अलग से नियम 6 (1) की एक शर्त का भी हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है. “हर राज्य सरकार को केंद्र सरकार के लिए डेप्यूटेशन उपलब्ध कराना होगा.  इसमें ऐसे विभिन्न स्तरों के योग्य अधिकारी होंगे जो सेंट्रल डेप्यूटेशन रिजर्व ममें नियामवली के नियम 4 (1) के तहत बताए गए हैं.

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    नए प्रस्ताव में क्या
    अब जो इस नए प्रस्ताव में अभी मौजूद शर्त, ”यदि असहमति हुई …तो राज्य सरकार या सरकारें केंद्र सरकार के निर्णय को मानेंगी ”, में “निश्चित समय सीमा में” शब्दों को जोड़ने की बात कही गई है. केद्र सरकार ने इस पर 25 जनवरी तक टिप्पणियां मांगी हैं और राज्य सरकारों को रिमाइंडर भी भेजे हैं.

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    इस विषय पर कई बार केंद्र (Central Government) और राज्य सरकार के बीच विवाद की स्थिति भी बनी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock) (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    आपत्ति भी मिली है
    इस मामले में कुछ राज्य सरकारों ने उत्तर दिए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल ने  इस पर कुछ आपत्तियां दर्ज की है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममत बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पत्र लिख कर  कहा है कि ये प्रस्ताव सहोयगात्मक संघीय भावनाओं के खिलाफ हैं और यह राज्य के प्रशासन के प्रभावित करेंगे. ऐसे में राज्यों की योजनाओं में काम कर रहे अफसरों पर केंद्रीय डेप्यूटेशन का हिस्सा होने डर बैठ जाएगा और उनके जाने से कामकाज प्रभावित होगा.

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    केंद्र हर साल ऐसे आईएएस अधिकारियों (इसमें आईपीएस और भारतीय वन सेवा भी शामिल है) की “प्रस्तावित सूची” मांगता है, जो केंद्रीय डेप्यूटेशन पर जाने के लिए इच्छुक हैं. इनमें से वह अधिकारियों का चुनाव करता है. नियम 6 (1) कहता है कि असहमति होने पर राज्य को केंद्र सरकार का फैसला प्रभावी करना होगा. लेकिन राज्य सरकार के पास असहमति के बाद भी केंद्र से बचने के कई तरीके हैं जो कई बार राज्य केंद्र विवाद के रूप में सामने आए हैं. नया प्रस्ताव समाधान का प्रयास है या फिर केंद्र सशक्तिकरण का प्रयास एक बहस का विषय हो सकता है.

    Tags: Central government, IAS, India, Research

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