तब पाकिस्तान टीम भी वर्ल्ड कप में हिंदू कवि का लिखा राष्ट्रगान गा रही होती

07 अगस्त 1947 को मोहम्मद अली जिन्ना जब भारत छोड़कर पाकिस्तान पहुंचे तो उन्होंने लाहौर रेडियो के अफसरों से कहा कि नेशनल एंथम लिखने के लिए कोई हिंदू शायर तलाशा जाए, उन्होंने ऐसा इसलिए किया था ताकि दुनिया उन्हें नेहरू से बड़ा सेक्युलर नेता समझे.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 3:44 PM IST
तब पाकिस्तान टीम भी वर्ल्ड कप में हिंदू कवि का लिखा राष्ट्रगान गा रही होती
पाकिस्तान क्रिकेट टीम
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 3:44 PM IST
वर्ल्ड कप में तीन देश गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का लिखा या कंपोज संगीत के आधार पर बना राष्ट्रगान गा रहे हैं. पाकिस्तान भी वो देश हो सकता था, जो एक हिंदू कवि द्वारा लिखा राष्ट्रगान (नेशनल एंथम) गाता. लेकिन ऐसा क्यों नहीं हो सका, इसकी भी एक कहानी है. पाकिस्तान जब आजाद हुआ था तो बहुत दिनों तक इस देश में हिंदू कवि द्वारा लिखा गीत राष्ट्रगान के तौर पर स्वीकार किया गया था.

14 अगस्त 1947 की आधी रात रेडियो लाहौर से एक राष्ट्रगान प्रसारित हुआ था, जिसे सुनकर पूरा पाकिस्तान रोमांचित हो गया था. कम लोगों को पता है कि पाकिस्तान का राष्ट्रीय तराना लाहौर में रहने वाले एक हिंदू शायर ने लिखा था, जो बाद में भारत आ गया.



बाद में पाकिस्तान ने इस राष्ट्रगान को हटाकर एक पाकिस्तानी शायर के गीत को एंथम के तौर पर शामिल किया. क्योंकि पाकिस्तान की सियासी जमात एक हिंदू के लिखे गीत को राष्ट्रगान नहीं बनाना चाहती थी. हालांकि जब तक कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना जिंदा रहे, तब तक इसी हिंदू कवि का गीत पाकिस्तान का राष्ट्रगान बना रहा. जैसे ही जिन्ना की मौत हुई, उसके कुछ दिनों बाद ये कौमी तराना बदल दिया गया.

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जिन्ना ने कहा हिंदू शायर को तलाशो
पाकिस्तान का पहला नेशनल एंथम एक हिंदू ने क्यों लिखा, इसकी भी एक कहानी है. सात अगस्त 1947 को जब मोहम्मद अली जिन्ना नई दिल्ली से कराची पहुंचे तो उनके सामने बेहिसाब काम थे. आठ अगस्त को अचानक उन्हें खयाल आया कि पाकिस्तान का एक कौमी तराना यानी राष्ट्रगान भी होना चाहिए. तुरंत रेडियो लाहौर के अफसरों को बुलाया गया.

mohammad ali jinnah, मोहम्मद अली जिन्ना
जिन्ना चाहते थे कि पाकिस्तान का राष्ट्रगान कोई हिंदू लिखे, ताकि दुनिया को जता सकें कि वो नेहरू से बड़े  सेक्युलर हैं

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इन अफसरों को हुक्म दिया कि अगले 24 घंटों में पाकिस्तान में उम्दा हिंदू शायर की तलाश की जाए, जो पाकिस्तान का कौमी तराना लिखेगा. पता लगा कि लाहौर में एक बहुत ही काबिल हिंदू शायर हैं, जगन नाथ आजाद. उर्दू में उनके आसपास मुस्लिम विद्वान भी नहीं ठहरते. इस पर अच्छी बात ये थी कि उन्होंने ठान रखा था कि बंटवारे के बाद लाहौर में ही रहेंगे.

हिंदू शायर से तुरंत कौमी तराना लिखने को कहा गया
अफसरों ने तुरंत कायदे आजम के पास ये जानकारी पहुंचाई. उन्होंने अगला हुक्म दिया कि उस शायर से कहो कि अगले पांच दिनों में पाकिस्तान का एक उम्दा सा कौमी तराना लिखें. हालांकि जिन्ना के मुस्लिम सहयोगी और अफसर नाखुश जरूर हुए कि पाकिस्तान का राष्ट्रगान कोई हिंदू क्यों लिखे, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं थी कि वो जिन्ना की बात का विरोध कर सकें. इसकी पुष्टि बाद में खुद जगन नाथ आजाद के बेटे आदर्श आजाद और उनकी बेटी ने एक बातचीत में की. इंटरनेट पर पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान वेबसाइट पर इसे लेकर काफी बहस चली. यहां तक जियो टीवी और अन्य टीवी चैनल्स पर इसे लेकर बहस भी हुई.

jagan nath azad
हिंदू शायर जगन नाथ आजाद जिन्होंने जिन्ना के कहने पर पाकिस्तान का नेशनल एंथम लिखा था


जिन्ना क्यों चाहते थे ऐसा
दरअसल, जिन्ना ने मुसलमानों के लिए एक अलग देश हासिल तो जरूर कर लिया था, लेकिन दुनिया को दिखाना चाहते थे कि वह बेहद सेक्युलर हैं. इसीलिए उन्होंने शुरू में पाकिस्तान को न केवल सेक्युलर राष्ट्र घोषित किया बल्कि राष्ट्रगान को एक हिंदू से लिखाना तय किया. उन्हें लगता था कि इससे उनका कद जवाहर लाल नेहरू की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखेगा.

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आजाद ने लिखा तराना
जगन नाथ आजाद के पास पांच दिनों का समय था. उनकी कलम चली. उन्होंने एक ऐसा तराना लिखा, जो पाकिस्तान का पहला कौमी तराना बनने वाला था. पाकिस्तान रेडियो ने इसे कंपोज किया. इसे जिन्ना को सुनाया गया. इसे सुनकर वह खुश हो गए, क्योंकि ये उनकी उम्मीदों पर कहीं ज्यादा खरा था. उनकी मंजूरी के बाद इसे कौमी तराने के रूप में पहले 14 अगस्त की आधी रात को रेडियो लाहौर से प्रसारित किया गया. फिर 15 अगस्त को. अगले 18 महीनों तक इसे पाकिस्तान के कौमी तराने का दर्जा हासिल रहा. हालांकि शीर्ष मुस्लिम नेताओं और मुस्लिम शायरों को ये काफी चुभता था.

jagan nath azad
पाकिस्तान के हालात आजादी के बाद बदलने लगे थे


आजाद के लिए हालात बदलने लगे थे
जगन नाथ आजाद को लाहौर के जर्रे-जर्रे से बेपनाह मोहब्बत थी. उन्होंने मन बनाया कि किसी हालत में भारत नहीं जाएंगे. जिन्ना ने जब ये कहा कि पाकिस्तान में सभी धर्म के लोगों का स्वागत है तो उन्हें काफी राहत मिली थी. वह उन दिनों लाहौर की एक साहित्यिक पत्रिका में नौकरी करते थे. अगले कुछ दिनों में हालात बुरी तरह बिगड़ने लगे. मारकाट हो रही थी.
जगन नाथ की बेटी पम्मी ने पिता को समर्पित वेबसाइट जगननाथआजाद डॉट इंफो में लिखा कि सितंबर आते ही एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया. किसी तरह कुछ मुस्लिम मित्रों ने सुरक्षित रखने की कोशिश की लेकिन बाद में उन्हीं मित्रों ने सलाह दी कि उन्हें भारत चले जाना चाहिए.

भरे मन से कहा अलविदा
जगन नाथ ने भरे मन से उस जमीन को अलविदा कहा, जहां वो पैदा हुए थे. उन्होंने दिल्ली आकर लाला लाजपत राय भवन के पास बने शरणार्थी कैंप में शरण ली. फिर डेली मिलाप में नौकरी कर ली. फिर कुछ समय बाद जोश मलीहाबादी ने दिल्ली का अपना बड़ा मकान उन्हें दे दिया, क्योंकि उन्हें सरकारी मकान अलाट हो गया था. 1948 में आजाद सूचना प्रसारण मंत्रालय की उर्दू पत्रिकाओं में असिस्टेंट एडीटर हो गए. हालांकि बाद में समय के साथ उन्हें काफी तरक्की भी मिली.

आजादी के बाद पाकिस्तान में हालात जिस तरह विस्फोटक हो रहे थे, उसकी वजह से जगन नाथ आजाद भारत आ गए थे. उन्होंने बहुत बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तान का नेशनल एंथम उन्होंने लिखा था


आजाद क्यों चुप रहे
जगन नाथ आजाद ने भारत आने के बाद शुरुआती सालों में शायद ही कभी किसी को ये बताया कि उन्होंने पाकिस्तान का पहला राष्ट्रगान लिखा था. उनके बड़े बेटे आदर्श आजाद कहते हैं कि इसके पीछे कई वजहें थीं. हालांकि उनके पाकिस्तानी मित्र बखूबी इसे जानते थे. बाद में आजाद ने अपने एक इंटरव्यू में ही इसका खुलासा किया कि किन हालात में जिन्ना के कहने पर उन्होंने पाकिस्तान का राष्ट्रगान लिखा था.

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पाकिस्तान में आज भी लोकप्रिय हैं जगन नाथ 
जगन नाथ का निधन वर्ष 2004 में हुआ. उन्होंने 70 से ज्यादा किताबें लिखीं. उर्दू साहित्य पर खूब काम किया. कुछ सालों से पाकिस्तानी मीडिया में खूब बहस होती रही है कि कौन सा राष्ट्रगान ज्यादा बेहतर है. पाकिस्तान में अब भी ये बहस चलती है कि आजाद का तराना नेशनल एंथम के तौर पर ज्यादा बेहतर रहता.

पाक गायकों ने गाया आजाद का तराना
90 और 2000 के दशक में जब पाकिस्तान में ये पता लगना शुरू हुआ कि उनके देश का पहला राष्ट्रगान जगन नाथ आजाद ने लिखा था तो कई गायकों ने इसे अपनी आवाज में गाया. फहीम मजहर और युवा गायक सनवर ने इसे अपने-अपने अंदाज में गाया, जो यूट्यूब पर है और पाकिस्तान में खूब लोकप्रिय है. इन दोनों को ही पाकिस्तान रेडियो ने भी प्रसारित किया.




पाकिस्तान में टीवी पर बड़ी बहस
पाकिस्तान का शायद ही कोई टीवी चैनल बचा हो, जिस पर जगन नाथ आजाद के कौमी तराने को लेकर बहस नहीं हुई हो. विषय हमेशा यही होता है कि आजाद का तराना ज्यादा बेहतर या फिर हफीज जालंधरी का.

आजाद के दूसरे तराने
प्रोफेसर जगन नाथ आजाद बहुत मशहूर शायर थे. लिहाजा उन्हें लगातार पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी
अरब देशों में बुलाया जाता था. कहा जा सकता है कि हर शायरी की महफिल में वह वाहवाही लूट ले जाते थे.





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