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कैसे कायम रखते हैं यूरेनस नेप्च्यून जैसे विशाल ग्रह अपनी मैग्नेटिक फील्ड

कैसे कायम रखते हैं यूरेनस नेप्च्यून जैसे विशाल ग्रह अपनी मैग्नेटिक फील्ड

यूरेनस (Uranus) और नेप्च्यून (Neptune) गैसीय ग्रह होने के बाद भी अपनी मैग्नेटिक फील्ड रखते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यूरेनस (Uranus) और नेप्च्यून (Neptune) गैसीय ग्रह होने के बाद भी अपनी मैग्नेटिक फील्ड रखते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यूरेनस (Uranus) और नेप्च्यून (Neptune) ग्रहों की मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic Field) के पीछे इन ग्रहों के आंतरिक हिस्सों में पाई जाने वाली सुपरआयोनिक बर्फ कारण हो सकती है.

    हमारे सौरमंडल में सभी ग्रहों की अपनी  विशेषताएं हैं. इनमें यूरेनस (Uranus) और नेप्चूयन (Neptune) दूसरों से कई मायनों में बहुत अलग ग्रह हैं. पथरीले ग्रह ना होने के बाद भी इन दोनों ग्रहों में मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic Field) की मौजूदगी हैरान करने वाली लगती है. ये ग्रह गैसीय ग्रह या विशाल बर्फीले ग्रह भी कहा जाता है. वैज्ञानिकों की एक टीम ने इन ग्रहों पर पाई जाने वाली खास बर्फ का अध्ययन किया. इस अध्ययन में इस बर्फ पर एक दशक हजारों प्रयोग कर उन्होंने पाया कि इन ग्रहों पर मौजूद सुपरआयोनिक बर्फ इनकी मैग्नेटिक फील्ड पैदा करने के लिए जिम्मेदार हो सकती है.

    दो तरह की सुपरआयोनिक बर्फ
    इन ग्रहों पर एक ‘गर्म’ विद्युत सुचालक बर्फ का रूप ऐसे हालात पैदा करने के लिए जिम्मेदार हो सकता है. कारनेगी और शिकागो यूनिवर्सीट के सेंटर फॉर एडवांस रेडिएशन सोर्सेस के शोध से ऐसे हालातों का पता चला है जिसमें दो ऐसी सुपरआयोनिक बर्फ बन सकती है. उनका शोध नेचर फिजिक्स में प्रकाशित हुआ है.

    बर्फ के रूप में विविधताएं
    पानी का रासायनिक सूत्र H2O होता है जिसमें दो परमाणु हाइड्रोजन और एक परमाणु ऑक्सीजन का होता है. पानी जिन हालातों में मौजूद रहता है उसी के मुताबिक इन परमाणु की स्थिति और गुणों का निर्धारण होता है. साधारण बर्फ में क्रिस्टल की तरह की एक जाली होती है जिसमें अणु दो हाइड्रोजन या हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच के बंध से जुड़े रहते हैं. लकिन हाइड्रोजन बंध के कारण इनकी सरंचना में बहुत विविधता होती है. कुल 18 तरह के प्रारूप पाए जाते हैं जो चरम पर्यावरणीय स्थितियों के कारण बन सकते हैं.

    सुपरआयोनिक बर्फ का प्रारूप
    इन्हीं में से सुपरआयोनिक प्रारूप भी होते हैं, जो उच्च दाब और तापमानों में बनते हैं. इनमें परंपरागत पानी के अणुबंध अपनी जगह बदल लेते हैं इससे हाइड्रोजन परमाणु ऑक्सीजन की जालीनुमा संरचना में उन्मुक्त तैर पाते हैं. इससे बर्फ में लगभग धातु पदार्थों की तरह विद्युत सुचालन की क्षमता आ जाती है.

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    सुपरआयोनिक बर्फ (Superionic Ice) की संरचना बर्फ की 18 प्रकार की सरंचनाओं में से एक होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    सुपरआयोनिक बर्फ के गुणों का मापन
    प्रयोगशाला में बनी गर्म सुपरआयोनिक बर्फ के अवलोकनों ने विरोधाभासी नतीजे दिए हैं. इसलिए शिकागो यूनिवर्सीटी के विटाली प्राकापेंका की अगुआई में  हुए अध्ययन में शोधकर्ताओ ने स्पेक्ट्रोस्कोपिक उपकरणों का उपयोग कर सामान्य वायुमंडलीय दाब से 15 लाख गुना दबाव और 11200 डिग्री फेहरनाइट तापमान पर बर्फ की सरंचना में आए बदलावों और गुणों का मापन किया.

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    आंकड़े जुटाने के लिए हजारों प्रयोग
    इस प्रयोग के द्वारा शोधकर्ता सुपरआयोनिक बर्फ के दो प्रारूपों का निर्धारण कर सके. जिसमें से एक यूरेनस और नेप्चून के आंतरिक हिस्सों में पाया जा सकता है. इस संरचना वाली पदार्थ की अवस्था पर चरम स्थितियों में प्रयोग करने के लिए शोधकर्ताओं ने उसे दो हीरों के बीच लेजर से ग्रम किया. इन चुनौतीपूर्ण प्रयोगों को करने में शोधकर्ताओं के एक दशक तक हजारों प्रयास करने पड़े जिससे उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले  आंकड़े मिल सकें.

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    यूरेनस (Uranus) और नेप्च्यून (Neptune) को बर्फीले ग्रह भी कहते हैं क्योंकी इनमें बर्फ के टुकड़े काफी मात्रा में मौजूद रहते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    इस बर्फ के हालात
    सिम्यूलेशन्स से पता चला कि यूरेनस और नेप्च्यून के मैग्नेटिक फील्ड एक पतली द्रव्य की परत में बनी है जो उथली गहराई पर पाई जाती है. सुपरआयोनिक बर्फ की सुचालकता इस तरह के क्षेत्र पैदा करने में सक्षम है. शोधकर्ताओं का मानना है कि इन हालातों में सुपरआयोनिक बर्फ की उन दो सरंचनाओं में से एक हो सकती है जो इस तरह के चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती है.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि इस सुपरआयोनिक संरचना की सुचलाक गुणों और इन हालातों में  बर्फ के चरणों का गाढापन को समझने के लिए और ज्यादा अध्ययन की जरूरत है. फिलहाल इन ग्रहों के बारे में आंकड़े पृथ्वी पर से ही किए जाने वाले आंकडों से जानकारी मिल सकी है. लेकिन इन पर केंद्रित अध्ययनों की सख्त जरूरत है.

    Tags: Research, Science, Solar system, Space

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