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हमशक्ल जुड़वां बच्चों के पीछे क्या होता है रहस्य, वैज्ञानिक सुलझाने की ओर

हमशक्ल जुड़वां बच्चों के पीछे क्या होता है रहस्य, वैज्ञानिक सुलझाने की ओर

हमशक्ल जुड़वां (Identical Twins) से संबंधित इस खोज से बहुत से अनुवांशकीय विकारों को समझने में मदद मिलेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हमशक्ल जुड़वां (Identical Twins) से संबंधित इस खोज से बहुत से अनुवांशकीय विकारों को समझने में मदद मिलेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हमशक्ल जुड़वां (Identical Twins) के अध्ययन के मुताबिक अब बताया जा सकता है कि क्या किसी व्यक्ति ने अपनी मां की शुरुआती गर्भावस्था (Pregnancy) में अपने जुड़वां (monozygotic identical twin) को गंवाया था या नहीं.

    इंसान के शरीर से लेकर उसके आचार विचार तक का निर्धारण जीन्स से तय होते हैं और उसी से बदलते हैं. मानव स्वास्थ्य की कई समस्या जीन्स के स्तर पर ही पैदा होती हैं और उनका समाधान भी उसी स्तर पर तलाशा भी जाता है. नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने हमशक्ल जुड़वां (Identical twins) के संबंध में बड़ी जानकारी पाने की उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने ऐसे जुड़वां के विशेष डीएनए संकेतों (DNA Signatures) के बारे में पता लगाया है जिससे अब पता चल सकेगा कि एक युग्मज (Zygote)  गर्भ में दो हिस्सों में कैसे बंट जाता है. उम्मीद की जा रही है इससे हमशक्ल जुड़वां संबंधी समस्याओं से भी निपटने में मदद मिलेगी.

    नीदरलैंड के इन वैज्ञानिकों ने हमशक्ल जुड़वांओं में  एपीजेनेटिक (Epigenetic) डीएनए संकेतों का पता लगा लिया है. वैज्ञानिक यह जानते हैं कि हमशक्ल जुड़वां निषेचित अंडे और स्पर्म से बने एक ही युग्मज के दो भ्रूणों में बंटने से बनते हैं. लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि बंटने की यह प्रक्रिया क्यों होती है.

    पुरानी मान्यता हुई पूरी तरह से खारिज
    इस चिकित्सकीय रहस्य को सुलझाने के लिए वे लंबे समय से प्रयास कर रहे थे. इस नए अध्ययन से पता चला है कि भ्रूण का बंटना संभवतः गैरअनुवांशिकीय कारणों से होता है. इससे पहले माना जाता था कि यह विभाजन अनियमित और अनिश्चित तौर से होता है. लेकिन इस अध्ययन ने इस मान्यता को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.

    कई विकारों को समझने में मिलेगी मदद
    वैज्ञानीकों ने इस अध्ययन में पहचाने गए एपीजेनेटिक संकेतों के जरिए दर्शाया है कि व्यक्ति का डीएनए का परीक्षण कर 80 प्रतिशत सटीकता के साथ यह बताया जा सकता है कि क्या वह हमशक्ल जुड़वा था या नहीं. इस खोज से वैज्ञानिकों बहुत सी अनुवांशकीय विकारों की समझ बढ़ाने में मदद मिल सकेगी.

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    इससे पहले वैज्ञानिकों को भ्रूण (Embryo) के विभाजन होकर हमशक्ल जुड़वां बनने का कारण नहीं पता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    कितनी बड़ी खोज
    ऐम्स्टर्डैम की व्राज यूनिवर्सिटी में बायोलॉजीकल साइसकोलॉजी की प्रोफेसर और इस अध्ययन की अगुआई करने डोरेट बूम्समा ने बताया कि यह एक बहुत बड़ी खोज है.  यह पहली बार है जब मानवों की इस प्रक्रिया के जैविक चिह्न पता लगे हैं. इसकी व्याख्या जीनोम में नहिं बल्कि एपीजीनोम में हैं.

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    एपीजीनोम होता है अहम
    वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पड़ताल से बताया जा सकता है कि क्या किसी व्यक्ति ने अपनी मां की शुरुआती गर्भावस्था दौरान अपने एकयुज्मक जुड़वां भाई या बहन को खो तो नहीं दिया था. एपीजीनोम उन नियंत्रक तत्वों से बनता जो अनुवांशकीय सामग्री के आसपास रहकर जिन्स की अभिव्यक्ति को प्रभावित करते हैं.

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    वैज्ञानिकों को ऐसे डीएनए संकेत (DNA Signatures) मिले हैं जो यह सारी जानकारी दे सकते हैं. (फाइल फोटो)

    कैसे काम करता है एपीजीनोम
    वैज्ञानिकों ने इस समझाते हुए बताया कि जैसे यदि कीबोर्ड का एक अक्षर ए एक जीन है और उसे पता है कि सक्रिय किए जाने पर उसे क्या टाइप करना है, एपीजेनेटिक  नियंत्रक तत्व इस मामले में शिफ्ट बटन  की तरह होगा जो यह प्रभावित कर सकता है कि  ए अक्षर कैसे टाइप होगा, कैपिटल होगा या छोटा होगा, या जीन अभीव्यक्ति के मामले में कहें तो जीन कैसे अभिव्यक्त होगा.

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    यह अध्ययन नेचर कम्यूनिकेशन्स में प्रकाशित हुआ है. इस पड़ताल ने सबसे बड़ी बात यही बताई है कि क्या किसी व्यक्ति का कोई हमशक्ल जुड़वां था, यह जानकारी उसके डीएनए में ही लिखी हुई है. अभी इस मामले में काफी काम किया जाना है जिससे यह स्पष्ट रूप से पता चल सके कि इन खोजे संकेतों का अनुवांशिकीय विकारों से कैसा और कितना संबंध है.

    Tags: Gene, Health, Research, Science

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