क्या कोरोना का नया स्ट्रेन मौत की वजह बन सकता है? किसे है ज़्यादा खतरा?

यूके में तेज़ी से फैल रहा है नया वैरिएंट.

यूके में तेज़ी से फैल रहा है नया वैरिएंट.

यूनाइटेड किंगडम (UK) में पाए गए Covid-19 के नए केंट और दक्षिण अफ्रीका वैरिएंट (New Variants of corona virus) को लेकर तेज़ी से रिसर्च चल रही हैं, लेकिन नई स्टडीज़ में इन स्ट्रेनों के लक्षणों, टारगेट वर्गों और खतरों को लेकर गंभीर बातें सामने आ रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 3, 2021, 11:22 AM IST
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यह गलत नहीं है कि कोरोना वायरस के यूके वैरिएंट (B.1.1.7) और साउथ अफ्रीका स्ट्रेन (B.1.351) को कुछ ही हफ्तों पहले खोजा गया है, लेकिन इनके बारे में लगातार हो रहे अध्ययनों (Scientific Studies) में कुछ गंभीर बातें सामने आ रही हैं. यह पता चल चुका है कि ये वैरिएंट्स ज़्यादा तेज़ी से फैलने वाले हैं. यह भी देखा गया कि इन स्ट्रेनों के संक्रमण के बाद कुछ लक्षण (New Variants' Symptoms) भी अलग दिख रहे हैं और ये उन लोगों को चपेट में ले रहे हैं, जिन्हें पहले तुलनात्मक रूप से ज़्यादा सुरक्षित माना जा रहा था. अब एक सवाल है कि क्या ये वैरिएंट जानलेवा (Fatal Strains) भी पाए गए हैं?

रिपोर्ट्स की मानें तो जिन एज समूहों को पहले हेल्दी मानकर कोरोना का खतरा कम होने की बात कही गई थी, ये नए वैरिएंट्स उस एज ग्रुप के लिए भी जोखिम बन गए हैं. यही नहीं, कुछ ताज़ा रिपोर्ट्स का कहना है कि कई मामलों में इन स्ट्रेनों के चलते मृत्यु दर में इज़ाफा हो सकता है. भारत में इन स्ट्रेनों के केस पाए जा चुके हैं, ऐसे में यह समझना अहम है कि ये स्ट्रेन कितने गंभीर हो सकते हैं और क्यों.

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कितना ज़्यादा जानलेवा है नया स्ट्रेन?
यूनाइटेड किंगडम के कुछ हिस्सों में तेज़ी से फैले इस वैरिएंट के बारे में ताज़ा रिसर्च लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में हुई. इसमें पाया गया कि यह वैरिएंट पहले के वायरस की तुलना में 33% ज़्यादा जानलेवा साबित हो सकता है. इस तरह के अध्ययनों के बीच लंदन के वैज्ञानिक नवंबर 2020 से जनवरी 2021 के बीच पॉज़िटिव पाए गए 8,50,000 से ज़्यादा लोगों के नमूनों को देख रहे हैं कि वो किस वैरिएंट से संक्रमित हुए.

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इसके अलावा और भी कुछ स्टडीज़ में यह बताया गया है कि यह नया वैरिएंट संक्रमित लोगों में खतरा बढ़ा देता है. ऑस्ट्रेलिया में हुई एक स्टडी में कहा गया कि अगर कोई मरीज़ नए वैरिएंट से संक्रमित है तो एज फैक्टर बढ़ने के साथ मौत का खतरा बढ़ जाता है. यही नहीं, इसी तरह की बात इंपीरियल कॉलेज लंदन की स्टडी में भी कही गई कि यह वैरिएंट ज़्यादा प्राणघातक दिख रहा है. कौन ज़्यादा जोखिम में है?

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किसे ज़्यादा खतरा है?
इसका जवाब वही है, जो पहले के वायरस के बारे में बताया गया यानी बीमार, कमज़ोर इम्युनिटी और ज़्यादा उम्र के लोग इस वैरिएंट की चपेट में जल्दी आ सकते हैं. 70 से 84 साल की उम्र के वर्ग में इस वैरिएंट से संक्रमण होने पर मृत्यु दर 5 फीसदी तो 85 से ज़्यादा उम्र वर्ग में 7 फीसदी तक बढ़ जाती है. यही नहीं, ये नया वैरिएंट कम उम्र और सेहतमंद लोगों को भी पिछले वायरस की तुलना में ज़्यादा और जल्दी चपेट में ले सकता है. ऐसा क्यों है?

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यह पाया जा चुका था कि B.1.1.7 वैरिएंट ओरिजनल वायरस की तुलना में सभी उम्र, कल्चर और जेंडर वालों के लिए ज़्यादा घातक है, अब एक और ताज़ा रिसर्च यह भी कह रही है कि यह नया स्ट्रेन 20 साल से कम उम्र के युवाओं और खासकर बढ़ते बच्चों के लिए जोखिम का सौदा है. चूंकि यह स्ट्रेन ज़्यादा बड़ी आबादी को टारगेट कर सकता है इसलिए भी संक्रमण के मामले ज़्यादा बढ़ रहे हैं.

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यूके में लाखों सैंपलों में देखा जा रहा है कि नए वैरिएंट के कितने केस रहे.


क्यों ज़्यादा खतरनाक है स्ट्रेन?
हालांकि अभी कई रिसर्च चल रही हैं, फिर भी अब तक यही खोजा गया ​है कि इस वैरिएंट की सतह पर स्पाइक प्रोटीन मौजूद है, जो एटीबॉडी को जल्दी पार कर लेता है इसलिए जल्दी संक्रमित करता है. इसी वजह से यह भी कहा जा रहा है कि इस वैरिएंट के खिलाफ मौजूदा वैक्सीनों के स्ट्रॉंग डोज़ देने होंगे. दूसरी बात यह है कि कोरोना वायरस की मौजूदगी तो आप सामान्य पीसीआर टेस्ट से जांच सकते हैं, लेकिन इस वैरिएंट की जांच जेनेटिक सीक्वेंस से होती है, जो फिलहाल कठिन है. क्या कोई और भी खतरा है?
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