राजीव गांधी को न पाकिस्तान पर हमले की भनक थी, न ही बाबरी मस्जिद खुलने की!

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी.
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी.

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव (Former PM Rajiv Gandhi) गांधी को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन एक हालिया प्रकाशित किताब में कुछ ऐसे प्रसंगों को नए सिरे से छेड़ा गया है, जो काफी समय से यादों में धुंधले हो गए थे.

  • News18India
  • Last Updated: November 16, 2020, 9:59 AM IST
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एक ऐसा सैन्य ऑपरेशन (Military Operation) भारत की तरफ से प्लान हो चुका था, जिससे पाकिस्तान टुकड़े-टुकड़े (Pakistan Divide) हो जाता. 1971 में पाकिस्तान का हिस्सा न रहकर बांग्लादेश एक अलग मुल्क बना था, उसी तर्ज़ पर भारतीय सेना ने 15 साल बाद एक और रणनीति बनाकर पाकिस्तान पर बहुत बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) का इरादा कर लिया था. ताज्जुब की बात यह थी कि इसकी खबर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Ex PM Rajiv Gandhi) को नहीं थी! यह भी एक ताज्जुब है कि गांधी को बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के गेट खोले जाने के फैसले के बारे में भी नहीं पता था!

जी हां, इस तरह के खुलासे हुए हैं. सैन्य ऑपरेशन की बात काफी आगे बढ़ गई थी और अमेरिका से लेकर रूस तक इस मामले में इन्वॉल्व हो गए थे. भयानक युद्ध की कगार पर पहुंच गए इस कदम को भारत ने ऐन वक्त पर वापस लिया, वरना भारत और पाकिस्तान के इतिहास में शायद सबसे बड़े युद्ध के तौर पर यह अध्याय दर्ज होता. राजीव गांधी के रोल पर आगे चर्चा करेंगे, पहले जानते हैं कि भारतीय सेना की यह कवायद क्या थी.

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क्या था ऑपरेशन ब्रासटैक्स?
राजस्थान में जो सीमा पाकिस्तान के साथ जुड़ती है, उसके नज़दीक 1986 से 1987 के बीच भारतीय सेना के करीब 5 लाख जवान पहुंच चुके थे यानी उस वक्त आधी भारतीय सेना. इसे सैन्य अभ्यास कहा जा रहा था, लेकिन इसके पीछे कथित तौर पर पाकिस्तान पर ज़ोरदार हमले का मकसद था. तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री अरुण सिंह और सेना के जनरल कृष्णस्वामी सुंदरजी ने इस ऑपरेशन को अमली जामा पहनाया था.

पंजाब की तरफ से भी पाकिस्तान पर हमले की योजना बन चुकी थी और पाकिस्तान को चार अलग राज्यों या मुल्कों में तोड़ देने की एक पूरी रणनीति तैयार थी, जिसे आधुनिक भाषा में ज़ोरदार सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में समझा जा सकता है. लेकिन हुआ ये कि रूस और अमेरिका को भारतीय सेना की इस कवायद की भनक लग गई तो उन्होंने राजीव गांधी से बातचीत की.

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सैन्य अभ्यास के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.


राजीव गांधी को जब इस ऑपरेशन के बारे में पता चला, तो बात बहुत आगे बढ़ चुकी थी. यहां तक कि पाकिस्तान ने साफ तौर पर कह दिया था कि भारत ने अगर इस तरह की कोई कार्यवाही की, तो पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों का प्रयोग करने से नहीं चूकेगा. आखिरकार, पीएम राजीव गांधी के सख्त निर्देशों के बाद सेना ने अपने हमलावर तेवर ढीले किए थे.

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क्या वाकई अनजान थे राजीव?
इतना बड़ा ऑपरेशन प्लान हो चुका था, पाकिस्तान परमाणु हमले की धमकी दे चुका था, रूस और अमेरिका तक हवा पहुंच गई थी और राजीव गांधी को नहीं पता था! बात ज़रा अजीब सी है, लेकिन अब तक ऐसे कई संस्मरण सामने आ चुके हैं, जिनके आधार पर इस तथ्य पर ज़ोर दिया जाता है. एक नहीं, कई किताबें और लेख इस चैप्टर का खुलासा कर चुकी हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नटवर सिंह ने अपनी किताब 'वन लाइफ इज़ नॉट इनफ' में इस बारे में लिखा था. सिंह के मुताबिक 1986 में जब राजीव और वो एयरपोर्ट पर अफगानी नेता नजीबुल्लाह की अगवानी के लिए जा रहे थे, तब अचानक राजीव ने उनसे पूछा था 'क्या हम पाकिस्तान के साथ फिर जंग करने जा रहे हैं?' इस पूरे प्रसंग को सिंह ने विस्तार से लिखा था.

सिंह के अलावा कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि अरुण सिंह और सुंदरजी ने मिलकर राजीव गांधी को धोखे में रखा था. वो भी तब जब रक्षा मंत्रालय खुद राजीव के पास ही था, भारतीय सेना और भारत के परमाणु हथियार तक हाई अलर्ट पर आ गए थे.

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क्यों प्रासंगिक है ऑपरेशन ब्रासटैक्स?
इस पूरी कहानी के बाद आप सोच रहे होंगे कि अचानक इस बारे में चर्चा क्यों की जा रही है! अस्ल में राजीव गांधी के सहयोगी रहे ब्यूरोक्रेट वजाहत हबीबुल्लाह की हालिया प्रकाशित किताब 'माय इयर्स विद राजीव' में भी इस बारे में यही पुष्टि की गई है कि राजीव को इस ऑपरेशन की खबर नहीं थी. किताब के मुताबिक राजीव को इसकी भनक उस अनौपचारिक बातचीत में लगी थी, जो उन्होंने आर्मी डे के मौके पर वेस्टर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीके हूण के साथ की थी.

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हबीबुल्लाह की किताब में राजीव गांधी से जुड़े कई प्रसंगों की चर्चा है.


बाबरी मस्जिद के ताले खुलने से भी अनभिज्ञ थे राजीव
हबीबुल्लाह ने अपनी किताब में यह भी खुलासा किया है कि फरवरी में 1986 में बाबरी मस्जिद के दरवाज़े हिंदुओं के लिए खोले जाने के फैसले में भी राजीव गांधी शामिल नहीं थे. हबीबुल्लाह के मुताबिक तब राजीव गांधी ने उनसे कहा था 'मुझे इस बारे में सूचना नहीं दी गई. मैंने वीर बहादुर सिंह (उप्र के सीएम) से जवाब तलब किया है. मुझे शक है कि अरुण (नेहरू) और फोतेदार (माखनलाल) इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, लेकिन मुझे इसकी पुष्टि करना है. अगर यह सच निकला तो दोनों के खिलाफ एक्शन लेना होगा.'

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अस्ल में, एक समाचार पत्र के लिए वरिष्ठ पत्रकार करण थापर ने जो कॉलम लिखा है, उसमें हबीबुल्लाह की किताब में दर्ज राजीव के कुछ किस्सों का खुलासा किया. गौरतलब है कि 1986 की इसी घटना के बाद राम जन्मभूमि आंदोलन ने गति पकड़ी थी और छह साल बाद 1992 में बाबरी विध्वंस कांड हुआ था.
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