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लगातार बिजी रहने की आदत भी एक बीमारी है, हो जाएं सावधान

News18Hindi
Updated: December 24, 2019, 3:40 PM IST
लगातार बिजी रहने की आदत भी एक बीमारी है, हो जाएं सावधान
अच्छी नहीं है खुद को हमेशा बिजी रखने की आदत

हम लोगों में से ज्यादातर की व्यस्तता को एक आदत बना चुके हैं. चाहे ऑफिस हो या घर, हम किसी ना किसी रूप में खुद को काम में डुबो लेते हैं. ये खतरनाक स्थिति है, जो आपको कई बीमारियों की ओर धकेल सकती है.

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हममें से बहुत से ऐसे लोग होंगे जो ऑफिस में घंटों काम में जुटे रहते हैं. जब वो घर में आते हैं तो वहां भी किसी काम में खुद को बिजी कर लेते हैं. अगर वो खाली या रिलैक्स होकर बैठने की कोशिश करते हैं तो उन्हें एंजॉयटी होने लगती है. बहुत से लोगों ने इसे महसूस किया होगा. आखिर क्या है ये

दरअसल लगातार बिजी रहन मानसिक और भावनात्मक तौर पर थकाने वाला होता ही है, लेकिन सेहत के लिए बहुत खतरनाक भी. जॉन कबाट-जिन्न ने अपनी किताब "Where you go,There you are" में लिखते हैं कि आप हमेशा व्यस्त रहकर खुद के साथ नाइंसाफी करते हैं. बिजी रहना अक्सर ये जाहिर करता है कि आप खुद दूसरों से अलग होकर अपने में ही जीना चाहते हैं. ये स्थिति भी एक तरह का बहाना ही है.

पिछली शताब्दी की जिन सभी पुस्तकों में इस मुद्दे पर बात की गई है, उनमें एलन वाट्स की The Wisdom of Insecurity: A Message for an Age of Anxiety (असुरक्षा का ज्ञान) भी एक  बेहतरीन किताब है.

1951 में प्रकाशित किताब के लेखक वाट्स को पता था कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका एक अजीब सी स्थिति की ओर बढ़ रहा है, जहां सामाजिक पर अस्थिरता और तकनीकी तौर पर  तेजी है. उस समय बहुत से लोग बिजी रहने का बहाना पेश करने लगे थे. अधिक घंटे काम कर रहे थे. लेकिन वो ऐसा क्यों कर रहे थे, इसका कोई जवाब उनके पास नहीं था.





वाट्स ने लिखा कि लोग पैसे बनाना और बचाना तो जानते हैं लेकिन उसका इस्तेमाल करना नहीं. वे जिंदगी की आनंद लेने में नाकाम रहते हैं. वो सही मायनों में जीवन को समझते ही नहीं. जब आराम करने का समय आता है तो वे ऐसा नहीं कर पाते.

एक किस्म की बीमारी है ये...
जॉन कबाट-जिन्न ने अपनी किताबों के माध्यम से लगातार लिखा है कि दरअसल व्यवस्तता एक किस्म की बीमारी ही है. ये सहज स्थिति नहीं है. जॉन कबाट ने अपना पूरा करियर में व्यस्तता की बीमारी को रोकने की कोशिश में लगा दिया.

सत्तर के दशक के अंत तक कबाट-जिन्न ने मैसाचुसेट्स मेडिकल स्कूल विश्वविद्यालय में माइंडफुलनेस-आधारित तनाव न्यूनीकरण (एमबीएसआर) में आठ सप्ताह का कोर्स लॉन्च किया, जो उनके करियर का आधार बन गया.

खुद को कुछ कम बिजी रखिए
ध्यान और दिमागी कसरत पर आधा शताब्दी तक मेहनत करने के बाद, कबाट-जिन्न ने लिखा कि खुद को कम व्यस्त रखने की जरूरत है. अपनी नई पुस्तक "द हीलिंग पावर ऑफ माइंडफुलनेस" में वो कहते हैं, "मैं खुद को व्यस्त नहीं रख रहा हूं बल्कि जिंदगी का आनंद ले रहा हूं."



कई तरीके हैं जिनसे हम अपनी चेतना पर ध्यान फोकस करना चाहिए. कोशिश करना चाहिए कि हम खुद को अनावश्यक तौर पर व्यस्त करने से रोककर कैसे सहज और रिलैक्स रह पाएं.

उन्होंने सुझाव दिया कि अच्छी किताबें ज़रूर पढ़ें. अच्छी कहानियां आपको अनजान जगहों पर ले जाती हैं. 60-90 मिनट के लिए योग का अभ्यास करें. संगीत सुनें. अपने दोस्तों से मिलें. पैदल टहलें. टीवी और फ़ोन से दूर रहे.

हमारे तंत्रिका तंत्र और पर्यावरण के बीच का रिश्ता है जो सबसे महत्वपूर्ण है.  हमेशा जल्दी में रहना, परेशान, विचलित और चिंतित महसूस करना खतरनाक है. ये हमें एक बीमारी की ओर ही धकेल रहा है. ये एक तरह का संकट है जिसे पहचानिए.

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First published: December 24, 2019, 3:40 PM IST
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