लंच और डिनर में खाता था फास्ट फूड तो चली गई आंखों की रोशनी, आप भी संभल जाएं!

अगर आप भी फलों और सब्जियों की जगह जंक फूड के दीवाने हों तो संभल जाएं. इससे विटामिन और कॉपर का लेवल नीचे गिरता है. फिर एक के बाद एक बीमारियां घेरते चली जाती हैं

News18Hindi
Updated: September 3, 2019, 9:47 PM IST
लंच और डिनर में खाता था फास्ट फूड तो चली गई आंखों की रोशनी, आप भी संभल जाएं!
जंक फूड ले लेगा आंखों की रोशनी..
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Updated: September 3, 2019, 9:47 PM IST
ब्रिटेन में एक किशोर चर्चा का विषय बना हुआ है. वो पिछले कुछ सालों से केवल चिप्स और फ्रेंच फ्राइज खा रहा था. उसका लंच यही होता था और डिनर में भी वो फास्ट फ़ूड ही खा रहा था. अब ये युवक एक ऐसी बीमारी का शिकार हो गया है, जिससे उसकी आंखों की रोशनी चली गई और सुनाई देना भी बंद हो गया है.

खबरों के अनुसार 19 साल के ये एक लड़का पिछले तीन साल से केवल चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, व्हाइट ब्रेड और सॉसेज खा रहा था. तीन सालों तक लगातार सिर्फ फास्ट फ़ूड खाने की वजह से अब वो पूरी तरह ब्लाइंड हो गया है. दरअसल इस खुराक ने उसके शरीर में विटामिन-12 और कॉपर लेवल को इतना कम कर दिया कि आखों की ऑप्टिक नर्व डैमेज हो गईं. साथ ही विटामिन-डी भी उसके शरीर में बहुत कम हो चुका है.

मेल आनलाइन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ये लड़का जो खाना खा रहा था, उसमें कोई न्यूट्रेंट्स यानि पोषक तत्व नहीं थे. वो लंच और डिनर में केवल चिप्स और फ्रेंच फ्राइज खा रहा था.



दस सालों से ना फल और ना ही सब्जी
ये किशोर ब्रिस्टल का रहने वाला है, जानकारी के अनुसार उसने दस सालों से कोई फल या सब्जी नहीं खाई है. वो एक आईटी कॉलेज का ड्रॉपआउट है.

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इन फूड हैबिट्स ने उसे तमाम बीमारियों का शिकार भी बना डाला. आंखों की बीमारी की शुरुआत उसमें तभी हो चुकी थी, जबकि वो 14 साल का था. इस बीमारी को न्यूट्रिशिनल ऑप्टिक न्यूरोपैथी (एनओएन) कहते हैं.

ब्रिटेन में एक लड़का पिछले कुछ सालों से केवल चिप्स और फ्रेंचफ्राइज खा रहा था, अब वो तमाम बीमारियों के साथ ऐसी ब्लाइंडनेस का शिकार हो गया है, जो कभी ठीक नहीं हो सकती


डॉक्टरों ने उसे अंधा घोषित कर दिया है
इस किशोर की कद और काठी सामान्य है लेकिन विटामिन की कमी ने आंखों के पीछे के नर्व को डैमेज कर दिया. आंख उस कंडीशन में जा चुकी है कि ठीक नहीं हो सकती.

मैं सबसे अलग-थलग पड़ गया था
उसने ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स से कहा, मैं एकदम अलग-थलग पड़ गया था. जब मैं छोटा था तब मैं अपने दोस्तों के साथ जाता था और फुटबॉल खेला करता था. लेकिन अब ऐसा करने से मुझे डर लगता है.

ये लड़का चिप्स, ब्रेड और सॉसेज पर निर्भर हो गया. इसमें ये कोई भी ऐसा फूड नहीं है, जो शरीर को पोषक तत्व दे. उसका कहना है कि डॉक्टरों ने भी उसे काफी देर से खुराक संबंधी सलाह दी. तब तक वो उस स्टेज में पहुंच चुका था.

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आंखों की रोशनी तेजी से गई
लड़के की हालत जब बिगड़ने लगी, तो मां ने जॉब छोड़ दी. उन्होंने ब्रिटेन के अखबार टेलीग्राफ से कहा, उसकी आंखों की रोशनी बहुत तेजी से कम होने लगी, स्थिति यहां तक आ गई कि वो डॉक्टर्स ने उसे ब्लाइंड घोषित कर दिया.

आंख के पीछे लाखों फाइबर नर्व होते हैं, जो रेटिना द्वारा ग्रहण की जा रही जानकारियों को ब्रेन तक पहुंचाते हैं लेकिन विटामिन के अभाव में वो बुरी तरह डैमेज होने लगते हैं. इस बीमारी को न्यूट्रिशियनल ऑप्टिक न्यूरोपैथी कहा जाता है


मां ने कहा, उसके बेटे की कोई सामाजिक जिंदगी नहीं है. उसकी किसी से बातचीत नहीं होती. स्कूल के बाद जब वो कॉलेज पहुंचा तो उसने आईटी में दाखिला लिया लेकिन अब उसे इसे छोड़ना पड़ा है. वो अब ना तो देख सकता है और ना ही सुन सकता है.

जंक फूड के कारण सबसे गंभीर स्थिति
डॉक्टरों का कहना है कि जितने भी मामले अब तक उनके सामने आए हैं, ये उनमें सबसे गंभीर है, जिसमें जंक फूड के चलते किसी की आंख की रोशनी चाली गई. डॉक्टरों का कहना है, उसका परिवार इसलिए उसके लिए चिप्स खरीदता रहा, क्योंकि कुछ और खा ही नहीं रहा था. उन्होंने बहुत कोशिश की कि वो सब्जियां और फल अपनी खुराक में शामिल करे लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

मां का कहना है कि उसका बेटे ने अपनी खुराक तो नहीं बदली लेकिन उसने इटिंग डिसऑर्डर का इलाज शुरू कर दिया है. वो विटामिन सप्लीमेंट ले रहा है. डॉक्टर ने कहा-ये जानने की जरूरत है कि खराब खुराक और चिप्स का असर केवल हृदय पर ही नहीं पड़ता बल्कि मोटापे की ओर भी बढाता है. विजन को तो नुकसान पहुंचाता ही है.

जंक फूड से शरीर में विटामिन इस कदर कम होने लगता है कि ब्लाइंडनेस के साथ कम सुनाई देना, हड्डियों की कमजोरी और खून की कमी जैसी ना जाने कितनी बीमारियां हो जाती हैं


टेस्ट बताते हैं कि इस लड़के को एनिमिया था और इसके शरीर में जरूरत लायक रेड ब्लड कोशिकाएं भी नहीं बन पा रही थीं. उसे विटामिन के इंजेक्शन दिये गए और हिदायत दी गई कि वो सभी तरह की चीजें खाने में खाए, जिसमें मीट, फ्रूट और सब्जियां सभी कुछ पर्याप्त संख्या में हो लेकिन इससे बात नहीं बनी.

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क्या इसका इलाज हो पाएगा
वो अब रजिस्टर्ड ब्लाइंड है केवल बड़े अक्षरों को ही पढ़ सकेगा. उसकी आंखों के बीच अब ब्लाइंड स्पाट भी आ गया है. हालांकि पैरीफेरल विजन बचा हुआ है, इसलिए वो कहीं आ जा सकने की स्थिति में होगा लेकिन चूंकि उसकी ऑप्टिक नर्व डैमेज हो चुकी हैं जो अपने आप दुरुस्त नहीं हो पाएंगी.

आप्टिक नर्व के काम नहीं करने की स्थिति तब आती है जबकि आप जरूरी पोषक तत्व जरूरत से कम ले रहे हों.ब्रिट


क्या होते हैं ऑप्टिक नर्व फाइबर
ऑप्टिक नर्व्स लाखों फाइबर से मिलकर बनी होती हैं और जब हम कुछ देखते हैं तो ये फाइबर ही उसकी सूचना रेटिना से ब्रेन में भेजते हैं. जब ये फाइबर कम विटामिन के कारण डैमेज हो जाते हैं, तो ऑप्टिक नर्व ब्रेन तक जानकारी नहीं भेज पातीं. न्यूट्रीशिनल ऑप्टिक न्यूरोपैथी एक धीमी स्थिति है, जिसमें दृष्टि धीरे धीरे खत्म हो जाती है.
विटामिन बी खासकर पत्तीवाली सब्जियों में काफी मात्रा में मिलता है, ये हमारी आंखों की दृष्टि बेहतर रखने के लिए काफी अहम होती हैं.

न्यूट्रीशिनल ऑप्टिक न्यूरोपैथी क्या होती है
ये आप्टिक नर्व के काम नहीं करने की स्थिति होती है. ये स्थिति शरीर में तब आती है जब आप जरूरी पोषक तत्व जरूरत से कम ले रहे हों. सामान्य तौर पर ये तब होता है जबकि शरीर में फोलिक एसिड और विटामिन बी की कमी हो जाए. ये कमी आमतौर पर कुपोषण, गलत तरीके से ली जा रही वेजटेरियन खुराक और ज्यादा शराब से होती है. लेकिन ब्रिस्टल के लड़के जैसे मामलों में ये खाने की खराब आदतों की वजह से पैदा होती हैं. हालांकि ऐसे मामले कम होते हैं और खासकर विकसित देशों में.
न्यूट्रीशिनल ऑप्टिक न्यूरोपैथी में दृष्टि धीरे लेकिन बगैर दर्द के कम होती जाती है. इससे आपका कलर विजन भी खत्म हो जाता है और इसका ढंग से इलाज नहीं कराया जाए तो स्थायी तौर पर अंधेपन की स्थिति आ जाती है. इसके इलाज में डायटीरी सप्लीमेंट लेना भी शामिल होता है ताकि कम हो चुके पोषक तत्वों की भरपाई की जा सके.

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First published: September 3, 2019, 9:12 PM IST
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