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प्रदूषण से ऐसे निपट रहे हैं दुनियाभर के देश, अपनाना होगा ये फॉर्मूला

News18Hindi
Updated: November 16, 2019, 4:52 PM IST
प्रदूषण से ऐसे निपट रहे हैं दुनियाभर के देश, अपनाना होगा ये फॉर्मूला
दुनिया के कई देश प्रदूषण से निपटने के लिए सख्त नियम कानून बना रहे हैं

प्रदूषण (pollution) पूरी दुनिया के लिए समस्या है. दुनिया के कई देश इससे निपटने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं. क्या हम उन तरीकों पर चलकर इस समस्या से छुटकारा नहीं पा सकते...

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  • Last Updated: November 16, 2019, 4:52 PM IST
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भारत में प्रदूषण (pollution) का संकट बढ़ता ही जा रहा है. दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) समेत पूरे उत्तर और उत्तर पूर्व भारत (North East India) का हाल बुरा है. गंगा के मैदानी इलाकों में बढ़ते प्रदूषण ने हवा को जहरीला बना दिया है. दिल्ली एनसीआर में ऑड ईवन (odd even) जैसे कुछ उपाय अपनाने के बाद भी प्रदूषण से राहत मिलती नहीं दिख रही है, हवा की क्वालिटी में सुधार होता नहीं दिख रहा है.

ऐसे में सवाल है कि फिर प्रदूषण से कैसे निपटा जाए? दुनिया के बाकी देश भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं, आखिर वो देश कौन से उपाय अपना रहे हैं? क्या दुनिया के उन देशों के फॉर्मूले पर चलकर हम प्रदूषण की समस्या से निपट सकते हैं? कभी बीजिंग को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर माना जाता था. आज उसने अपने प्रदूषण को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है. आखिर उसने कौन से उपाय अपनाकर पॉल्यूशन को कंट्रोल में किया?

प्रदूषण से निपटने में बीजिंग के फॉर्मूले पर हुई है स्टडी
बीजिंग ने प्रदूषण से निपटने में पूरी दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया है. बीजिंग कभी प्रदूषण की भीषण समस्या से जूझ रहा था, लेकिन उसने इससे निपटने में काफी हद तक कामयाबी पाई. बीजिंग के हालात रातोंरात नहीं बदले. 1998 से लेकर 2017 तक बीजिंग ने प्रदूषण से निपटने के लिए कई कदम उठाए.

यूनाइटेड नेशंस ने बाकायदा इसकी स्टडी की है और इसकी रिपोर्ट दुनिया के सामने रखी है, ताकि प्रदूषण से जूझ रहे बाकी देश भी इस तरह के कदम उठाएं. रिपोर्ट में लिखा गया है कि बीजिंग की हवा में बदलाव कोई अचानक नहीं आया. ये लंबे वक्त के मेहनत, संसाधनों के इस्तेमाल और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की बदौलत हुआ. बीजिंग के एयर पॉल्यूशन से निपटने के तरीके को अपनाकर दुनिया के कई देश इसका लाभ उठा सकते हैं.

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बीजिंग ने प्रदूषण से निपटने का उदाहरण पेश किया है


बीजिंग में कैसे कम हुआ प्रदूषणबीजिंग ने 1998 से लेकर 2013 तक प्रदूषण से निपटने के सख्त नियम अपनाए, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा 2013 से लेकर 2017 तक चले बीजिंग के क्लीन एयर एक्शन प्लान की वजह से हुआ. बीजिंग में इंधन के तौर पर कोयले के इस्तेमाल और ज्यादा गाड़ियां होने की वजह से प्रदूषण फैल रहा था. बीजिंग के प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा था. 2013 तक बीजिंग ने कुछ प्रमुख प्रदूषणकारी तत्वों जैसे कार्बन मोनोक्साइड और सल्फर डाइक्साइड के हवा में स्तर को नियंत्रित किया.

2013 में बीजिंग ने ज्यादा व्यवस्थित और गहराई से प्रदूषण रोकने के उपाय किए. इसकी वजह से 2017 के आखिर में बीजिंग में पीएम 2.5 का लेवल 35 फीसदी तक कम हुआ. पीएम 2.5 के लेवल को कम करने के लिए बीजिंग ने कोयले से जलने वाले बॉयलर को नियंत्रित किया. घर-घर तक साफ घरेलू इंधन पहुंचाने की व्यवस्था की. उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित किया.

बीजिंग ने प्रदूषण कम करने के लिए सख्त कानून बनाए. इस दिशा में अपने इकोनॉमिक पॉलिसी बनाई. प्रदूषण को कम करने के लिए पब्लिक की भागीदारी बढ़ाई. सभी दिशा में नियंत्रित कदम उठाकर बीजिंग ने अपने प्रदूषण के स्तर को सुधारा.

पेरिस में प्रदूषण कम करने के लिए सख्त नियम कायदे
फ्रांस ने अपने यहां प्रदूषण कम करने के लिए सख्ती से नियम कायदे लागू करवाए. पेरिस के कई जिलों में वीकएंड पर सड़कों पर कारें निकालने की मनाही है. यहां कई इलाकों में ऑड ईवन फॉर्मूला लागू रहता है. कई बार जब प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है तो वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट फ्री कर दिया जाता है.

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पॉल्यूशन कंट्रोल के लिए सख्त नियम बनाने होंगे


पेरिस में प्रदूषण से निपटने के लिए कारों और बाइक की शेयरिंग पर भी जोर दिया जाता है. यहां के सीन नदी के किनारे सड़क को कार फ्री घोषित किया गया है. इन सारे उपायों से पेरिस ने अपने यहां के प्रदूषण पर काबू पाया है.

नीदरलैंड में पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री पर लगेगी रोक

नीदरलैंड में भी इसी तरह से प्रदूषण कम करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. नीदरलैंड में 2025 के बाद पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री पर रोक लगाने का विचार चल रहा है. पेट्रोल डीजल की जगह यहां हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली कारें उतारी जाएंगी. नए प्रस्तावित कानून में जिनके पास पहले से ही डीजल या पेट्रोल कारें हैं वो तो अपनी गाड़ी चला पाएंगे लेकिन नई गाड़ियों की बिक्री पर रोक लग जाएगी. नीदरलैंड में प्रदूषण कम करने के लिए साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.

जर्मनी में कार रखना महंगा सौदा

जर्मनी अपने यहां के प्रदूषण कम करने के लिए प्राइवेट कारों के लिए सख्त नियम बनाए हैं. जर्मनी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दुरुस्त किया गया है. जर्मनी के एक शहर फ्रीबर्ग में 500 किलोमीटर लंबा बाइक रूट है. इस रूट पर ट्राम चलती है. यहां कारों की पार्किंग काफी महंगी कर दी गई है. ताकि लोग पर्सनल कारें नहीं रखें.

कुछ इलाकों में कार पार्किंग के लिए लाखों रुपए वसूले जाते हैं. इसके बदले में लोगों को बिना कार के जिंदगी बिताने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. यहां रहने का खर्च कम है, फ्री पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है और साइकिल से चलने के लिए ढेर सारी जगह है.

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प्रदूषण को कम करना कई देशों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है


कोपेनहेगेन में लोग कम साइकिलें ज्यादा

इसी तरह के उपाय डेनमार्क में भी अपनाया गया. राजधानी कोपेनहेगेन में कारों की बजाय मोटरसाइकिल को प्रधानता दी जाती है. वहां कार के बदले बाइक रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. कोपेनहेगेन में लोगों की जनसंख्या से ज्यादा साइकिलों की संख्या है. यहां के बड़े इलाके में गाड़ियां रखने पर पाबंदी है. कोपेनहेगेन ने 2025 तक अपने शहर को कार्बन न्यूट्रल करने का लक्ष्य रखा है.

ओस्लो में बन रहे हैं कार फ्री जोन

इसी तरह नॉर्वे ने भी लक्ष्य रखा है. नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में कार्बन उत्सर्जन को 2020 तक आधी करने का लक्ष्य रखा है. एक बड़े इलाके को कार फ्री जोन बनाने का प्रस्ताव है. वहां बाइक के लिए नए नए लेन बनाए जा रहे हैं. ट्रैफिक चार्ज बढ़ा दिया गया है. ओस्लो ने अपने कई पार्किंग एरिया खत्म कर दिए हैं.

हेलसिंकी से गायब हो जाएंगी कारें

फिनलैंड के शहर हेलसिंकी में कारों की संख्या नियंत्रित की गई है. कारों की संख्या को कम करने के लिए यहां पार्किंग चार्ज काफी बढ़ा दिए गए. पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ठीक किया गया. कार की बजाए बाइक चलाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है. शहर के आवासीय इलाकों में पैदल चलने के रास्ते बनाए गए हैं. यहां 2050 के लिए ये लक्ष्य रखा गया है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को इतना दुरुस्त कर दिया जाए कि कोई भी आदमी कार रखना नहीं चाहे.

ज्यूरिख में गिन कर रखी जाती हैं कारें

ज्यूरिख में भी कारों की संख्या नियंत्रित करके प्रदूषण के स्तर को कम किया गया. ज्यूरिख में पार्किंस स्पेस को कम किया गया है. एक वक्त में एक निश्चित संख्या में ही शहर में कारों को रखने का निर्देश जारी किया गया है. यहां कार फ्री जोन बनाए गए हैं. पैदल चलने वालों की सुविधा के लिए स्पेशल लेन बनाए गए हैं. इसकी वजह से यहां ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या में काफी सुधार आया है.
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First published: November 16, 2019, 1:39 PM IST
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