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दुनिया का सबसे रहस्यमयी संगठन, जो खुदकुशी को देता था बढ़ावा

दुनिया का सबसे रहस्यमयी संगठन, जो खुदकुशी को देता था बढ़ावा

18वीं सदी में शुरू हुई इलुमिनाती नाम की इस एजेंसी के बारे में माना जाता है कि अब भी ये दुनियाभर में फैली हुई है  (Photo-pixabay)

18वीं सदी में शुरू हुई इलुमिनाती नाम की इस एजेंसी के बारे में माना जाता है कि अब भी ये दुनियाभर में फैली हुई है (Photo-pixabay)

खुफिया एजेंसी (secret agency) इलुमिनाती (Illuminati) अठारहवीं सदी का सीक्रेट ग्रुप था. उसकी कुख्याति इतनी ज्यादा थी कि जब भी कोई बड़ी गतिविधि होती और कोई नाम सामने नहीं आता था तो उसपर इलजाम मढ़ दिया जाता.

    कोरोना संक्रमण के दौर में दुनियाभर के वैज्ञानिकों से लेकर खुफिया एजेंसियां इसकी पड़ताल में लगी हुई हैं कि क्या वाकई संक्रमण की जड़ में चीन और WHO की मिलीभगत है. इस बीच कई सारी कॉन्सपिरेसी थ्योरीज भी आई हैं. खुफिया एजेंसियां सबकी जांच में लगी हुई हैं. वैसे फिलहाल जिन खुफिया एजेंसियों के नाम हम जानते हैं, उनसे पहले भी एक इंटेलिजेंस एजेंसी रह चुकी है. 18वीं सदी में शुरू हुई इलुमिनाती नाम की इस एजेंसी के बारे में माना जाता है कि अब भी ये दुनियाभर में फैली हुई है और इसके सदस्य चुपके-चुपके अपने कामों को अंजाम दे रहे हैं.

    माना जाता है कि इस संगठन की शुरुआत जर्मनी के बेवेरिया शहर से हुई थी. वहां के एक जाने-माने प्रोफेसर और दार्शनिक एडम वीशॉप्ट (Adam Weishaupt) ने इसकी नींव रखी. जर्मनी में ही जन्मे और पले-बढ़े एडम बचपन में ही अनाथ हो गए. रिश्ते के एक चाचा की देखरेख में पलते हुए उन्होंने काफी सारी मुश्किलें देखीं. भेदभावों के बीच बढ़ते हुए एडम के मन में आ चुका था कि आगे चलकर वो एक समान समाज की शुरुआत करेंगे. पढ़ाई के बाद एडम प्रोफेसर बन गए और University of Ingolstadt में पढ़ाने लगे. सीधी-सादी जिंदगी बिताते शादीशुदा प्रोफेसर के बारे में किसी को शक नहीं था कि वे भीतर-भीतर क्या कर रहे हैं.

    जाने-माने प्रोफेसर और दार्शनिक एडम वीशॉप्ट (Adam Weishaupt) ने इसकी नींव रखी


    एडम को यकीन था कि चर्च और कैथोलिक विचारों के कारण सोसाइटी खुलकर नहीं जी पा रही है. यही देखते हुए उन्होंने एक ऐसी सोसाइटी तैयार करने की सोची, जो हर तरह की धार्मिक बंदिशों से मुक्त हो. इसी के साथ इलुमिनाती सीक्रेट एजेंसी की नींव रखी गई. माना जाता है कि मई 1776 में इसके सदस्यों की पहली मीटिंग हुई, जिसमें प्रोफेसर के नेतृत्व में यूनिवर्सिटी के 5 लोग थे. जल्द ही सदस्य बढ़ते चले गए और साल 1784 में ग्रुप में लगभग 3000 सदस्य हो चुके थे.

    इलुमिनाती को पहले बिना किसी नुकसान का संगठन माना गया लेकिन फिर इसकी अजीबोगरीब बातें निकलकर आने लगीं. इस संगठन का यकीन था कि तकलीफ में खुदकुशी सही चुनाव है. इलुमिनाती के सदस्य गलती करने वालों को मौत की सजा देने पर यकीन रखते थे. साथ ही ये कि धर्म पर यकीन करने वाले मूर्ख हैं और उन्हें सजा मिलनी चाहिए. ऐसी बातें सामने आने के साथ ही इस संगठन पर लगाम कसी जाने लगी.

    इस संगठन के पास गर्भपात को बढ़ावा देने वाले उदाहरण और उपकरण भी मिले (Photo-pixabay)


    धरपकड़ में सदस्यों के घरों से न दिखाने देने वाली इंक जब्त हुई, जिससे आपत्तिजनक बातें फैलाई जाती थीं. खुदकुशी को प्रोत्साहन देने वाला साहित्य मिला. साथ ही कई अजीबोगरीब एजेंडा पर साहित्य का ढेर मिला. तब दुनिया के किसी भी देश में गर्भपात बैन था. लेकिन इस संगठन के पास गर्भपात को बढ़ावा देने वाले उदाहरण और उपकरण भी मिले. इसके बाद सरकार ने इस संगठन की सदस्यता लेने पर मौत की सजा का फर्मान सुना दिया.

    संगठन के फाउंडर प्रोफेसर एडम को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया. वे लंबे बाद एक दूसरी जगह पढ़ाने लगे और अपेक्षाकृत शांत जीवन बिताने लगे. हालांकि उसके बाद भी दुनिया में जो भी हत्याएं या घटनाएं होती थीं, माना जाता था कि उसके पीछे इसी सीक्रेट ग्रुप का हाथ है.

    अमेरिका के प्रेसिडेंट जॉन एफ कैनेडी की हत्या के पीछे भी इसी संगठन का हाथ माना जाता है (Photo-pixabay)


    यहां तक कि साल 1963 में अमेरिका के प्रेसिडेंट जॉन एफ कैनेडी की हत्या के पीछे भी इसी संगठन का हाथ कहा जाता है. 22 नवंबर 1963 को हुई ये हत्या अब भी अमेरिकी राजनीति के इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य बनी हुई है. सालों से खुफिया एजेंसियां ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हत्या में किसका हाथ था लेकिन अब तक कुछ पता नहीं चल सका है. असल में कैनेडी की हत्या से ठीक पहले एक संदिग्ध महिला दिखी थी, जिसके हाथ में खुफिया कैमरानुमा पिस्टल था. हत्या के साथ ही वो औरत जैसे आई थी, वैसे ही गायब हो गई. आज तक ये पता नहीं लग सका कि वो महिला कौन थी और कहां से आई थी. कई संगठनों को यकीन है कि सीक्रेसी में जी रहा इलुमिनाती ग्रुप ही इसकी वजह है और वो रहस्यमयी महिला इसी से जुड़ी हुई थी.

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    Tags: Cyber Crime, Europe, European union, Germany

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