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लोन लेने की बात सोच रहे हैं तो यह खुशखबरी आपके लिए ही है

IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकों के भविष्य को लेकर कई बातें कही हैं. जानिए बैंकिंग के क्षेत्र में क्या-क्या बदलाव आने वाले हैं?
IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकों के भविष्य को लेकर कई बातें कही हैं. जानिए बैंकिंग के क्षेत्र में क्या-क्या बदलाव आने वाले हैं?

IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकों के भविष्य को लेकर कई बातें कही हैं. जानिए बैंकिंग के क्षेत्र में क्या-क्या बदलाव आने वाले हैं?

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2018, 5:23 PM IST
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पिछले कुछ सालों में भारत में बैकों से बड़े फ्रॉड करने वाले कुछ कारोबारियों के घोटालों का खुलासा हुआ है. जिससे बैंकों को लाखों करोड़ रुपयों की चपत लगी है. ऐसे में सभी का मानना था कि भारतीय अर्थव्यवस्था जिसमें पब्लिक सेक्टर बैंक की बड़ी भूमिका होती है, उसे काफी झटका लगेगा. लगा भी. लेकिन आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि IMF की नई रिपोर्ट जो कह रही है, उसे जानकर आपकी बांछें खिल जायेंगी. और आपको लगेगा कि आपके लोन के लिए इतनी मुश्किलें भी नहीं खड़ी होने वाली हैं. इस रिपोर्ट का कहना है कि भारत का बैंकिंग भविष्य आशाओं से भरा हुआ है और इसमें तेजी से बढ़त की बहुत उम्मीद है.

IMF की बात सुनकर दिल हो जायेगा गार्डन-गार्डन
इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड यानि IMF ने अनुमान लगाया है कि भारत के प्राइवेट सेक्टर की बैंक क्रेडिट ग्रोथ इस वित्तीय वर्ष के आखिरी तक 13.6 फीसदी के आंकड़े को छू लेगी. हालांकि IMF का यह भी अनुमान है कि इसके बाद यह थोड़ी गिरावट के साथ 30 अंक गिरकर 2020 के वित्तीय वर्ष में 13.3 फीसदी रहेगी. लेकिन यह बहुत ज्यादा नहीं है. मतलब सीधा सा है कि आपको लोन चाहिये तो लोन मिलेगा. उसमें कोई समस्या नहीं होगी. आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट के आर्टिकल 4 में लिखा है कि भारत में कॉरपोरेट सेक्टर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. हालांकि अभी तक हमें कर्जों के भुगतान की क्षमता और लाभ निम्नतम बिंदु तक पहुंचता दिख रहे थे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. कारण बना प्राइवेट सेक्टर. आंकड़ों के मुताबिक प्राइवेट बैंकों की बैंक क्रेडिट ग्रोथ जून, 2018 के आखिरी तक 12.94 फीसदी रही है. जो कि वित्तीय वर्ष, 2018 में प्राइवेट सेक्टर के लिए 9.8 फीसदी थी. और उससे एक साल पहले 8 फीसदी थी.

मतलब ये कि बैंक आपको कितना लोन दे सकता है?
बैंक क्रेडिट वह कुल पैसा होता है जो एक आदमी या एक बिजनेस को लोन के तौर पर देने के लिए बैंक के पास मौजूद होता है. यह वह कुल पैसा होता है जो एक फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन एक इंसान या एक बिजनेस को देता है. एक बिजनेस या इंसान का बैंक क्रेडिट लोन लेने वाले के लोन चुकाने की क्षमता और बैंकिग के इंस्टीट्यूशन के पास क्रेडिट अमाउंट के तौर पर मौजूद कुल रुपये पर निर्भर करता है.



प्राइवेट सैक्टर के बैंक दिखा रहे हैं पराक्रम
20 जुलाई तक भारत में कॉमर्शियल सेक्टर का बैंक क्रेडिट 92 लाख करोड़ रुपये हो गया. जो कि एक साल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के हिसाब से 11.9 करोड़ रुपये की बढ़त को दिखा रहा है. और इस बढ़त का नेतृत्व भारत के प्राइवेट बैंक कर रहे हैं. इन प्राइवेट सैक्टर बैंकों के कर्ज देने का हिसाब-किताब चेक करने पर उसमें 15-20 फीसदी की बढ़त देखी गई है.

हल्की-फुल्की मुश्किल भी आये तो अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा
IMF ने अपनी रिपोर्ट बनाने के दौरान जिन भारतीय अधिकारियों से बात की उन्होंने भी इसमें विश्वास जताया. भारतीय अधिकारियों ने बताया, "आगे आने वाले महीनों में अगर अर्थव्यवस्था की हालात कुछ ठीक न भी रहे तो क्रेडिट बढ़ने और कैपेसिटी के यूज के साथ इसका कोई असर निवेश पर पड़ने का डर नहीं है और निवेश का क्षेत्र तब भी मजबूत बना रहेगा."

सेवा क्षेत्र ने भी कर रहा है बेहतरीन
रिजर्व बैंक के डाटा ने भी मई में कॉरपोरेट इंडस्ट्रियल सेक्टर में 1.4 फीसदी की बढ़त दिखाई है. हालांकि यह पिछले साल की मई के 2.1 फीसदी के मुकाबले कम ही है. जबकि सेवा क्षेत्र का क्रेडिट मई, 2017 की 4 फीसदी की बढ़त के मुकाबले पांच गुना से भी ज्यादा 21.9 फीसदी बढ़ा है.

IMF की प्रवक्ता गैरी राइस ने हर दो हफ्ते पर होने वाली अपनी न्यूज कांफ्रेंस में कहा, "बैंकिग सेक्टर की बैलेंस शीट को देखना और निश्चित पब्लिक सेक्टर बैंक की परफॉर्मेंस को अच्छा करना भारत मे निवेश को बल देने के लिए और समावेशी विकास के एजेंडे को सफल बनाने के लिये बहुत जरूरी मसला है."

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