डायनासोर का महाविनाश- आखिर क्या टकराया था पृथ्वी से, क्षुद्रग्रह या धूमकेतु

महाविनाश के टकराव (Impact Extinction) पर यह बहस होती रही है कि वह क्षुद्रग्रह (Asteroid) से हुआ था या फिर धूमकेतु (Comet) से. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

महाविनाश के टकराव (Impact Extinction) पर यह बहस होती रही है कि वह क्षुद्रग्रह (Asteroid) से हुआ था या फिर धूमकेतु (Comet) से. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

6.6 करोड़ साल पहले पृथ्वी (Earth) पर महाविनाश से डायनासोर (Dinosaurs) धरती पर खत्म हो गए. यह क्षुद्रग्रह (Asteroid) या धूमकेतु (Comet) के टकरने से हुआ था, अब इस बहस पर विराम लग जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 5:29 PM IST
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पृथ्वी (Earth) पर डायनासोर (Dinosaurs) के सफाए के महाविनाश (Mass extinction) की शुरुआत एक विशाल टकराव (Great Impact) को माना जाता है. टकराव की घटना 6.6 करोड़ साल पहले आज के मैक्सिको की खाड़ी (Bay of Maxico) के इलाके में हुई थी. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टकराव क्षुद्रग्रह (Asteroid) का था. जबकि एक खगोलीय शोध और कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह क्षुद्रग्रह नहीं बल्कि धूमकेतु (Comet) था. ताजा शोध के नतीजे इस बहस पर विराम लगाने की पूरी उम्मीद है.

टकराव वाली जगह का अध्ययन
यह बहस काफी पुरानी है कि क्या यह टकराव वाकई क्षुद्रग्रह से हुआ था. शोधकर्ताओं की अंतरराष्ट्रीय टीम ने मैक्सिको के पास चिक्सुलुब क्रेटर की सामग्री पर अध्ययन किया. उन्होंने क्रेटर  धूल की रासायनिक संकेतों का एक उल्कापिंडीय धूल से तुलना की और पाया कि टकराव के समय की धूल क्षुद्रग्रह की धूल है ना कि किसी धूमकेतु की.

क्रेटर के नमूने जमा करना
शोधकर्ताओं ने पाया कि पृथ्वी की पर्पटी पर 6.6 करोड़ साल पहले धूल की जो परत जम गई थी वह मैक्सिको के पास के इलाके में हुए टकराव की वजह से हुई थी. अमेरिका के टेक्सास यूनिवर्सिटी जियोलॉजीस्ट सीन गुलिक ने इम्पीरियाल कॉलेज लंदन क जुआना मोर्गन के साथ 2016 में क्रेटर की शीर्ष रिंग में आधे किलोमीटर ज्यादा की दूरी तक बिखरे पत्थरों के नमूने जमा किए .



इन बातों पर मिली नई जानकारी
इन नमूनों का अध्ययन चार अलग-अलग लैबोरेटरी में किया गया. इन नतीजों से साइट के जीवाश्म रिकॉर्ड बेहतर होने के साथ दो से तीन दशकों के भीतर ही डायनासोर की संख्या तेजी से कम होने के समय के बारे में भी अहम जानकारी मिली. गुलिक ने बताया कि अगर किसी घड़ी के मुताबिक बात की जाए तो 6.6 करोड़ साल पहले यह सब एक दो दशकों में हो गया था.

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काफी समय से वैज्ञानिक इस बात से हैरान थे कि 6.6 करोड़ साल पहले आखिर डायनासोर (Dinosaurs) अचानक से गायब कहां हो गए. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


क्या माना जा रहा था अब तक
करीब आधी सदी पहले से इस सवाल का जवाब खोजा जा रहा था कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मेसोजोइक काल में अचानक से पृथ्वी का 75 प्रतिशत जीवन गायब हो गया. यह सब न केवल बहुत ही जल्दी हुआ बल्कि वैश्विक स्तर पर भी हुआ. इस बारे मे दो मत आए. एक में बहुत सारी ज्वालामुखी घटनाओं का अचानक होना था तो दूसरी में किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के टकराव की बात थी जिससे इतना बड़ा जलवायु परिवर्तन हुआ.

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कैसे शुरू हुई बहस
1980 में अमेरिकी भैतिकविद लुइस एल्वारे और उनके जियोलॉजिस्ट पुत्र वाल्टर के प्रकाशित अध्ययन में बताया कि अवसाद की पतली परत डायनासोर और उनके बाद के काल में स्पष्ट अंतर कर रही है. एक मिलीमीटर से एक सेंटीमीटर मोटी इस परत में असामान्य रूप से इरिडियम तत्व मिलता है जो पृथ्वी की सतह पर बहुतायत में  नहीं मिलता, लेकिन उल्कापिंडों में बहुत ज्यादा मिलता है.

क्रेटर पर भी थी निगाहें
इस खोज से यह तथ्य पुख्ता हुआ कि पृथ्वी पर उस समय एक ठोस टकराव हुआ था जिसके अवशेष दुनिया में फैल गए थे. वहीं मैक्सिको की खाड़ी के दक्षिणी किनारे में एक 180 से 200 किलोमीटर लंबा दाग भी शोधकर्ताओं की निगाहों में था.

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1980 में हुए शोध से यह पता चला की एक विशाल पिंड के टकराव (Impact) से पूरी दुनिया में धूल की एक परत फैल गई थी. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


और भी हुई बहुत अध्ययन
इस क्रेटर के बारे में पता चलते ही इस शोध गहनता से होने लगे. कई शोधों ने टकारव के कोण, टाकराव का सटीक स्थान, टकराव की मात्रा और विशालता जैसे पहलुओं का अपने अध्ययनमें शामिल किया. इसके अलावा इसी समयके आसपास भारत के दक्षिण के पठार में बहुत सी मात्रा में ज्वालामुखी घटनाओं के होने के प्रमाण भी मिले जिससे उनकी महाविनाश में भूमिका में योगदान शामिल करने की बात भी उठी.

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लेकिन अभी तक यह तय हो चुका था कि पृथ्वी पर बाहरी पिंड का टकराव हुआ था. अब यह तय होता साफ दिख रहा है कि यह टकराव किसी और की वजह से नहीं बल्कि 12 किलोमीटर चौड़े क्षुद्रग्रह का था. साइंस एडवांस में प्रकाशित इस शोध की अगुआई करने वाले बेलिजियम के जियोमकैमिस्ट स्टीवन गोडेरिस  कहना है कि अब मामला साफ हो गया और केस खत्म है.
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