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1957 के आम चुनावों में यहां हुई थी देश की पहली बूथ कैप्चरिंग

इन चुनावों में 45 महिलाओं ने हिस्सा लिया था और उनमें से 22 महिलाओं ने जीत दर्ज की थी.

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    1957 के आम चुनाव यानी दूसरे आम चुनाव वे चुनाव थे जब कांग्रेस ने न केवल सीटों बल्कि वोट प्रतिशत के मामले में भी लोकसभा में अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी. 1957 के आम चुनाव 24 फरवरी से 9 जून तक, साढ़े तीन महीने तक चले थे. इनमें से 91 दो सदस्यीय चुनाव क्षेत्र थे, जहां पर एक साथ दो लोगों को चुना गया था. चुने हुए दो सदस्यों में से एक सामान्य जाति से आने वाला और दूसरा SC/ST समुदाय से आने वाला सदस्य था. पहले चुनावों में तो तीन सदस्यीय चुनाव क्षेत्र भी थे. हालांकि इसे 1955 में आए पहले डिलिमिटेशन कमीशन के जरिए हटाकर दो सदस्यीय क्षेत्रों में बदल दिया गया था.

    ये थे चुनाव के प्रमुख मुद्दे
    ये चुनाव एक ऐसे दौर में हुए जो जवाहर लाल नेहरू के लिए कठिन था. इस वक्त कांग्रेस के अंदर के ही दक्षिणपंथी कई मुद्दों पर जवाहर लाल नेहरू का विरोध कर रहे थे. इसके अलावा कम्युनिस्ट और समाजवादी भी इसकी नीतियों का विरोध कर रहे थे. क्योंकि ये चुनाव हिंदू पर्सनल लॉ के सुधारों और 1955 की बांडुंग कॉन्फ्रेंस के बाद हो रहे थे. इस कॉन्फ्रेंस को नेहरू काल की गुटनिरपेक्षता की शुरुआत माना जाता है, इन गुटनिरपेक्ष देशों में नए आजाद हुए देश और बड़े देश शामिल थे.

    इसके अलावा जो मुद्दे थे उनमें भाषा के आधार पर राज्यों का गठन, शिक्षा सुधार, जिनमें IIT जैसे संस्थानों का गठन शामिल था. इसके अलावा इसी दौर में बड़े उद्योगों की स्थापना और बांधों का निर्माण कार्य भी हुआ था, जिन्हें सफलतापूर्वक कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान अपने कामों के तौर पर गिनाया.

    इन्हीं चुनावों में पहली बार हुई थी बूथ कैप्चरिंग
    1957 के आम चुनावों में बिहार के रचियारी, बेगूसराय में हुई थी पहली बूथ कैप्चरिंग. टाइम्स ऑफ इंडिया ने 2005 में अपनी एक ख़बर में एक स्थानीय का बयान छापा था, जिसका कहना था कि यह परंपरा आज भी यहां है, लेकिन इसका नाम बदलकर यहां इसे बूथ कैप्चरिंग की बजाए बूथ मैनेजमेंट कहने लगे हैं.

    यहां के पुराने लोग 1957 के आम चुनावों के बारे में बताते हैं कि कैसे स्थानीय लोगों ने रचियारी गांव के कछारी टोला से सरयुग प्रसाद सिंह के पक्ष में बूथ कैप्चरिंग की गई थी. यहां से बड़े कम्युनिस्ट नेता चंद्रशेखर सिंह को पहली बार चुना गया था.

    बाद में बूथ कैप्चरिंग ने बड़ा रूप ले लिया. राजनीतिक दल बेगूसराय के डॉन कामदेव सिंह को बूथ कैप्चर करने के लिए इस्तेमाल करने लगे. स्थानीय लोग बताते हैं कि 1972 में मिथिला प्रदेश से आने वाले एक बड़े केंद्रीय नेता ने भी कामदेव सिंह को बूथ कैप्चरिंग के लिए इस्तेमाल किया था.

    इन चुनावों में यह भी हुआ
    पहले आम चुनावों (1951-52) में कांग्रेस ने उत्तर भारत की 85.5 परसेंट सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन दूसरे आम चुनावों में इन सीटों में कमी आई. इन चुनावों में 45 महिलाओं ने हिस्सा लिया था. और उनमें से 22 महिलाओं ने जीत दर्ज की थी.

    अटल बिहारी वाजपेयी ने इन चुनावों में पहली बार जीत दर्ज की. फिरोज गांधी रायबरेली से फिर जीते. वीके कृष्ण मेनन इन चुनावों में जीतने के साथ ही और भी ज्यादा शक्तिशाली हो गए. जिसके बाद उन्हें विदेश मंत्रालय मिला.

    यह भी पढ़ें: आम चुनाव 1952: पहले निर्वाचन आयुक्त ने इतने अच्छे से कराए चुनाव कि विदेशों में होने लगी मांग

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