क्या 28 साल पहले का वाकया दोहराएगा अमेरिका, जब सीनियर बुश दूसरे टर्म का चुनाव हारे थे

1992 के चुनाव में जार्ज बुश सीनियर जब दूसरे टर्म के लिए चुनाव मैदान में उतरे तो वो खाड़ी युद्ध के नायक थे लेकिन तब भी चुनाव हार गए
1992 के चुनाव में जार्ज बुश सीनियर जब दूसरे टर्म के लिए चुनाव मैदान में उतरे तो वो खाड़ी युद्ध के नायक थे लेकिन तब भी चुनाव हार गए

मौजूदा अमेरिकी चुनावों (US Elections) के रिजल्ट आने के साथ ये नजर आने लगा है कि मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) चुनाव हार सकते हैं. बाइडन (Joe Biden) अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहे हैं. ऐसा अमेरिका में 28 साल पहले हुआ था जब जार्ज बुश सीनियर (George H. W. Bush) प्रेसीडेंट थे और दूसरे टर्म के लिए चुनाव हार गए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 2:21 PM IST
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप पहले टर्म में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरे टर्म के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. जो चुनाव नतीजे आ रहे हैं, वो संकेत दे रहे हैं कि उनके विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन राष्ट्रपति का चुनाव जीत सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका 28 साल पहले के उस वाकये को दोहराएगा, जब सीनियर जार्ज बुश चुनाव हार गए थे.

आमतौर पर अमेरिका में ये बहुत कम हुआ है कि कोई प्रेसीडेंट दूसरे टर्म के लिए चुनाव मैदान में उतरे और उसको हार का सामना करना पड़ा. ये वाकया 1992 में आखिरी बार हुआ था, तब जार्ज बुश सीनियर बिल क्लिंटन से पराजित हुए थे. तब भी जीतने वाला प्रत्याशी डेमोक्रेटिक पार्टी का था और हार रिपब्लिकन उम्मीदवार की हुई थी.

बिल क्लिंटन डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी थे. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव मैदान में कूदने से पहले वो अरकांसस के गर्वनर थे. जार्ज डब्ल्यू बुश पहला टर्म पूरा कर चुके थे. साथ ही एक स्वतंत्र प्रत्याशी बिजनेसमैन रास पेरोट भी प्रेसीडेंट पोस्ट के लिए चुनाव मैैदान में ताल ठोक रहे थे. साथ ही कुछ प्रत्याशी और भी थे.



1992 के चुनावों में बिल क्लिंटन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार थे. उनकी जीत ने रिपब्लिकन के वर्चस्व को खत्म कर दिया

रिपब्लिकन का वर्चस्व था इससे पहले
दरअसल इस चुनाव से पहले अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी का झंडा लहरा रहा था. 1968 के बाद देश में रिपब्लकन का जलवा था. लेकिन बुश की लोकप्रियता खाड़ी युद्ध के बाद गिरने लगी थी. डेमोक्रेटिक पार्टी में तब मारियो कुयोमो उन्हें चुनौती देते हुए उभर रहे थे लेकिन फिर जब डेमोक्रेटिक पार्टी के नोमिनेशन हुए तो उसमें बिल क्लिंटन ने बाजी मार ली.

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क्लिंटन कई दिग्गजों को पछाड़ डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बने थे
उन्होंने अपनी पार्टी में प्रेसीडेंट पोस्ट का उम्मीदवार बनने के लिए कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया. उस समय अमेरिका की इकोनामी बुरे हाल थे लेकिन बुश की विदेश नीति सोवियत संघ के विघटन के बाद कम महत्वपूर्ण नजर आने लगी. आर्थिक मोर्चे पर देश उनसे निराश था. अब तक वो उनका सबसे मजबूत पहलू उनकी विदेश नीति ही थी लेकिन वो भी अब अप्रासंगिक हो रही थी.

जार्ज बुश दमदार अमेरिकी राष्ट्रपति थे. विदेशी मोर्चे पर वो खासे सफल थे लेकिन देश की आर्थिक स्थिति से जनता उनसे नाराज थी.


बुश ने क्लिंटन के चरित्र पर हमले किए
हालांकि जब 1992 में चुनाव अभियान शुरू हुआ, तब सीनियर बुश ने क्लिंटन के चरित्र को निशाने पर लेना शुरू किया. उन्होंने लोगों के बीच जाकर अपनी विदेश नीति का बखान किया लेकिन क्लिंटन ने केवल इकोनामी पर ही खुद को फोकस किया.

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क्लिंटन ने जमकर वोट खींचे
क्लिंटन पापुलर वोट हासिल करने के साथ ही इलेक्टोरल वोट भी हासिल किए. इस तरह उन्होंने पिछली तीन बार से लगातार जीत हासिल करती आ रही रिपब्लिकन पार्टी का रिकॉर्ड तोड़ दिया. वो हर राज्य में जीते. क्लिंटन ने नार्थईस्ट और वेस्ट कोस्ट में जबरदस्त जीत हासिल की. इसके अलावा उन्होंने ईस्टर्न मिडवेस्ट और दक्षिण में बढ़िया प्रदर्शन किया. सीनियर बुश की बुरी हार हुई.

80 के दशक के बाद मौजूदा प्रेसीडेंट को पहली बार लगा था झटका
हालांकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद दूसरे टर्म के चुनाव में इससे पहले जिमी कार्टर और गेराल्ड फोर्ड ने भी हार का सामना किया. लेकिन 80 के दशक के बाद ये पहला मौका था जबकि तत्कालीन राष्ट्रपति चुनाव हार गया हो और उसे दूसरे टर्म का कार्यकाल नहीं मिल सका हो.

गजब की लहर नजर आई बिल क्लिंटन के लिए
उस चुनाव में बिल क्लिंटन की जबरदस्त लहर थी. उन्होंने 370 इलेक्टोरल वोट हासिल किये तो सीनियर बुश ने महज 168. क्लिंटन वाशिंगटन डीसी के साथ 32 राज्यों में जीते तो बुश 18 राज्यों में. अगर बात पापुलर वोटों की करे तो उसमें भी क्लिंटन कहीं आगे रहे. क्लिंटन को 44,909,889 पापुलर वोट मिले तो बुश को 39104550. कुल मिलाकर क्लिंटन को 43. 0 वोट हासिल हुए तो बुश को 37.4 प्रतिशत.
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