भारत में मृत्युदंड फांसी के जरिए लेकिन अमेरिका में इंजेक्शन से, जानिए कैसे

अमेरिका में मृत्युदंड अब इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है.

अमेरिका में मृत्युदंड अब इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है.

अमेरिका में भी पिछले महीने पहली बार एक महिला को फांसी की सजा दी गई. अमेरिका में फांसी की सजा बंद कर दी गई थी लेकिन ट्रंप प्रशासन ने उसे फिर शुरू किया. उसे ये सजा इंजेक्शन के जरिए जहर को शरीर के अंदर पहुंचाकर दी गई. जिससे मिनटों में उसके प्राण पखेरू उड़ गए. कैसे दिया जाता है ऐसे मृत्युदंड

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 18, 2021, 3:50 PM IST
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मथुरा की जेल में इस महीने के आखिर या अगले महीने के शुरू में अमरोहा की शबनम नाम की महिला को फांसी दी जाने वाली है. भारत में लंबे समय से फांसी रस्से के फंदे से लटका कर दी जाती है. हालांकि देश में फांसी के दूसरे तौरतरीकों पर चर्चा हो चुकी है लेकिन फांसी का यही तरीका फिलहाल ज्यादा वैज्ञानिक पाया गया. हालांकि ज्यादातर देशों में अब इंजेक्शन के जरिए मृत्युदंड दिया जा रहा है. अमेरिका में एक महिला को इसी साल 13 जनवरी को इंजेक्शन लगाकर मृत्युदंड दिया गया.

जहर के इंजेक्शन से कुछ ही मिनटों में अपराधी अचेत हो जाता है. फिर उसकी मौत हो जाती है. जानते हैं कि कैसा होता है ये इंजेक्शन और किस तरह काम करता है.

इस इंजेक्शन को लीथल इंजेक्शन कहते हैं. इसको देने के बाद किसी भी शख्स की शांत मृत्यु तय हो जाती है. इसका उद्देश्य ही किसी व्यक्ति को तत्काल मृत्यु होता है. अमेरिका में अब मृत्यु की सजा अब लीथल इंजेक्शन के जरिए ही दी जाएगी.

इसे कहते हैं लीथल इंजेक्शन 
ये इंजेक्शन दो या दो से अधिक दवाओं को मिलाकर बनाया जाता है. इसका इस्तेमाल उन लोगों पर होता है, जिन्हें किसी देश का कानून मौत की सजा देता है. अब कई देशों में मौत की सजा इसी इंजेक्शन के जरिए ही दी जा रही है. इस इंजेक्शन को देने के बाद दवाएं व्यक्ति को पहले बेहोश करती हैं, सांस लेने से रोकती हैं फिर मौत की ओर ले जाती हैं.

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कैसे शुरू हुआ इंजेक्शन का इस्तेमाल



1890 तक अमेरिका में मौत की सजा का सबसे आम रूप फांसी था. फिर, बिजली की कुर्सी सबसे व्यापक तरीका बन गया.

1982 में, लीथल इंजेक्शन द्वारा पहली मौत की सजा टेक्सास राज्य ने दी, जिसके बाद धीरे-धीरे पूरे अमेरिका में बिजली की कुर्सी की जगह लीथल इंजेक्शन ने ले ली. कई देशों में अब मौत की सजा काट रहे कैदियों के पास मौत का तरीका चुनने का अधिकार दिया जाता है. लीथल इंजेक्शन के प्रयोग में आने के बाद ज्यादा सजायाफ्ता इसी को चुनते हैं

हालांकि लीथल इंजेक्शन में उपयोग के लिए दवाओं और खुराक के सटीक मिक्सर पर अभी कोई एक सहमति नहीं है.

लीथल इंजेक्शन में कौन कौन सी दवाएं मिली होती हैं और ये क्या काम करती हैं

कौन सा देश कैसे करता है इस्तेमाल

लीथल इंजेक्शन का नाम लीथल इसलिए है कि उससे कोई बच नहीं सकता. सजा ए मौत देने के लिए इसे सबसे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका में विकसित किया गया. अब चीन, थाईलैंड, ग्वाटेमाला, ताइवान, मालदीव और वियतनाम में  दोषियों को सजा देने का ये कानूनी तरीका बन गया है. हालांकि इसमें से कई देशों में मृत्युदंड की सजा कई सालों से रुकी हुई है.

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इसे कम अमानवीय माना गया

इसे कम अमानवीय माना जाता है. लीथल इंजेक्शन का पहला प्रस्ताव 17 जनवरी, 1888 में एक अमेरिकी डॉक्टर जूलियस माउंट ब्लेयर ने दिया था, क्योंकि ये फांसी पर लटकाने पर आने वाले खर्चों की तुलना में  काफी सस्ता था.

नाजी जर्मनी ने सबसे पहले बनाया था इसे 

कह सकते हैं कि नाजी जर्मनी ने भी इसे सबसे पहले विकसित किया था. इसे एक्शन टी 4 यूथनेशिया कार्यक्रम के तौर पर विकसित किया गया. ब्रिटिश रॉयल कमीशन ऑन कैपिटल पनिशमेंट (1949-53) ने भी लीथल इंजेक्शन इस्तेमाल किया. बाद में ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (बीएमए) के दबाव के बाद इसे खारिज कर दिया.

लीथल इंजेक्शन मौत की सजा देने के अन्य तरीकों की तुलना में कम यातनादायक है. इससे पहले बेहोशी औऱ अचेतावस्था जैसी स्थिति आती है और फिर सांस बद हो जाती है जिससे दिल की धड़कन बंद हो जाती है

लीथल इंजेक्शन में कौन सी ड्रग्स होती हैं

लीथल इंजेक्शन में तीन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. सोडियम थियोपेंटल का उपयोग बेहोश करने के लिए, पैनकोरोनियम ब्रोमाइड (पावलून) को मांसपेशियों ते पैरालिसिस सांसों को पकड़ने के लिए और अंत में पोटेशियम क्लोराइड दिल की धड़कन पूरी तरह रोकने के लिए.

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इनमें से प्रत्येक खुराक को ऐसे दिया जाता है कि कैदी जल्दी से जल्दी मर जाए लेकिन हर एक दवा की अपनी खामी है. तीनों का मिक्स अन्य दवाओं के नुकसान को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है.

आसान भी नहीं है इसे देना 

सजा के समय, कैदी को चादर में लपेटा जाता है और चार ट्यूबों को दोनों हाथों की नसों में डाला जाता है.

जब पोटेशियम कैदी के दिल तक पहुंच जाता है, तो यह सोडियम और पोटेशियम आयनों के नाजुक संतुलन को बाधित करता है जो दिल को धड़काते रहते हैं.  कैदी का दिल इस दवा के पहुंचने के बाद थड़कना बंद होने लगता है.

यदि प्रक्रिया योजना के अनुसार जाती है, तो पहली दवा पहली प्रणाली में प्रवेश करने के बाद कैदी को 10 मिनट से भी कम समय तक खत्म हो जाना चाहिए.

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