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in indian kitchen although no direct palm oil use but we use it indirectly in daily life

किचन में सीधे इस्तेमाल नहीं होने पर भी कैसे पाम आयल हर जगह है हमारी जिंदगी में

पाम आयल पाम यानि ताड़ के पेड़ों पर इस तरह के गुच्छेदार फल के तौर पर होता है. इसे यहां से भरकर फैक्ट्रियों में ले जाया जाता है, जहां इसे प्रोसेस करके तेल बनाते हैं.  (shutterstock)

पाम आयल पाम यानि ताड़ के पेड़ों पर इस तरह के गुच्छेदार फल के तौर पर होता है. इसे यहां से भरकर फैक्ट्रियों में ले जाया जाता है, जहां इसे प्रोसेस करके तेल बनाते हैं. (shutterstock)

इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध खत्म कर दिया तो सबसे ज्यादा राहत की सांस भारत में ली गई. वैसे तो हमारे किचन में आमतौर पर पाम ऑयल का सीधे इस्तेमाल नहीं होता लेकिन इसका इस्तेमाल हमारी रोजाना यूज होने वाली इतनी चीजों में होता है कि जानकर आप हैरान रह जाएंगे. तब आपको लगेगा कि पाम आयल क्यों भारत के लिए है जरूरी.

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इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर लगी रोक हटाने की घोषणा की है. भारत दुनिया में इस तेल की कुल खपत का 20 फीसदी इस्तेमाल करता है. बेशक हमारी रसोईं में पाम ऑयल का इस्तेमाल सीधे नजर नहीं आता है लेकिन हकीकत ये है हमारी रोजाना की जिंदगी बगैर पाम आयल के चल ही नहीं सकती. हम रोजमर्रा बहुत सी ऐसी चीजें इस्तेमाल करते हैं, जिसमें इसका इस्तेमाल होता है.

वैसे भी भारत के बारे में कहा जाता है कि ये देश है, जहां दुनिया का सबसे ज्यादा तेल खाया जाता है. पाम तेल को ताड़ का तेल भी कहते हैं. ये उसके फलों से निकाला जाता है. हालांकि ताड़ के पेड़ों को लेकर एक बहस भी चलती रही है कि ताड़ के पेड़ बहुत अनियंत्रित तरीके से फैलते हैं. जंगलों और जंगली जानवरों के लिए खतरा बन जाते हैं.

वैसे जहां तक पाम आयल के इस्तेमाल की बात है तो ये फैक्ट्री में बनने वाले तमाम खाद्य उत्पादों में तरह तरह से इस्तेमाल होता है. डिटर्जेंट उत्पादों में इसका खूब इस्तेमाल होता है.

पाम आयल का सबसे बड़ा उत्पादक देश इंडोनेशिया है. भारत में दुनिया में इस्तेमाल होने वाले इस तेल के 20 फीसदी की खपत होती है. कहा जा सकता है कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा पाम तेल का इस्तेमाल भारत में ही होता है. देश इस पर बहुत मोटी विदेशी मुद्रा भी खर्च करता है. (ShutterStock)

भारत की रसोइयों में बेशक खानपान का हम लोगों को जो तरीका है, उसमें हम सरसों, नारियल और मूंगफली का तेल इस्तेमाल करते हैं लेकिन बाजार में जो वेजीटेबल आयल है, उसमें बड़ी मात्रा में पाम आयल मिला होता है. कहा जा सकता है कि हमारी रोजाना की जिंदगी पाम आयल हर ओर है.

कितना तेल इस्तेमाल करते हैं हम
भारत में हर साल 2.5 करोड़ टन खाने का तेल इस्तेमाल होता है, लेकिन घरेलू उत्पादन सिर्फ 1.11 करोड़ टन ही है. मांग और आपूर्ति का फ़ासला क़रीब 56 फ़ीसदी का है. इस कमी को आयात के ज़रिए पाटा जाता है.

2012 में भारत में प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत 14.2 लीटर थी लेकिन अब ये बढ़ कर 19-19.5 लीटर तक पहुंच चुकी है. 2019-20 में भारत में 1.34 करोड़ टन खाद्य तेल बाहर से मंगाया गया और इसकी कीमत थी 61,559 करोड़ रुपए.

क्यों पाम आयल को अदृश्य तेल भी कहते हैं
भारत बाहर से जो तेल मंगाता है, उसमें सबसे ज्यादा हिस्सा पाम ऑयल का है. लगभग 60 फ़ीसदी. सोयाबीन तेल की हिस्सेदारी 25 और सूरजमूखी तेल की हिस्सेदारी 12 फ़ीसदी है. इसे ‘अदृश्य’ तेल भी कहते हैं, जो किचन में तो नज़र नहीं आता लेकिन इसका इस्तेमाल व्यापक है. ब्रेड, नूडल्स, मिठाइयों और नमकीन से लेकर कॉस्मेटिक्स, साबुन, डिटर्जेंट जैसे एफएमसीजी उत्पाद बनाने में पाम तेल का ख़ूब इस्तेमाल होता है.

हमारी रोजाना की जिंदगी में खूब है पाम ऑयल
वैसे ये दुनिया का सबसे सस्ता तेल है, लिहाजा तमाम उत्पादों में इसका भरपूर इस्तेमाल होता है. अब आइए देखते हैं कि हमारी रोजाना की जिंदगी में इसका कैसे इस्तेमाल होता है.

बेशक पाम ऑयल का इस्तेमाल हमारी रसोई में सीधे तौर पर नहीं होता लेकिन हम जितने तेलों का इस्तेमाल करते हैं, उसमे तो ये ब्लेंड रहता ही है बल्कि तमाम रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों में इसे मिलाया जाता है. (न्यूज18 ग्राफिक्स)

कुकिंग ऑयल – भारत में जितने भी कुकिंग आयल मिलते हैं, उन सभी में पाम आयल ब्लेंड किया जाता है यानि मिलाया जाता है. इसकी मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है लेकिन ऐसा होता है.
पिज्जा – चाहे पिज्जा फ्रेश हो या फिर फ्रोजेन उसमें पाम आयल इस्तेमाल होता है. वो इसे सिकुड़ने से बचाता है और इसके टैक्सचर को बेहतर रखता है
नूडल्स – हम जितने नूडल्स का इस्तेमाल किचन में करते हैं, वो चाहे इंस्टैंट हों या फिर पैकेज्ड सभी में पाम आयल का इस्तेमाल होता है. इसकी मात्रा 20 फीसदी तक हो सकती है. अगर आप चाहते हैं कि आप इसके आयली असर से बचें तो नूडल्स को गरम पानी में डालने के बाद इस्तेमाल कर सकते हैं.
शैंपू – शैंपू में ये कंडीशनर एजेंट का काम करता है. बालों को नेचुरल तेल देने में मदद करता है तो शैंप में एक एजेंट के तौर पर गंदगी भी निकालता है
आइसक्रीम – ये आइसक्रीम को स्मूथ और क्रीमी बनाता है
डिटर्जेंट – जब पाम आयल को रिफाइन कर दिया जाता है तो ये साबुन, वाशिंग पाउडर और दूसरे क्लीनिंग उत्पादों में इस्तेमाल होता है.
लिपिस्टिक – ये लिपिस्टिक का रंग बरकरार रखता ह. रूम के तापमान पर लिपिस्टिक को पिघलने नहीं देता. स्मूथ अप्लीकेशन देता है.
चॉकलेट – चॉकलेट को ये चमकीला और रुम तापमान पर पिघलने से बचाने वाला बनाता है.
कुकीज – ये कुकीज को सेमी सॉलिड स्थिति में रखता है और रूम तापमान पर पिघलने से बचाता है साथ ही उसके टेस्ट को क्रीमी बनाता है.
साबुन – आपने अगर विज्ञापनों में साबुन के बारे में ये देखा होगा कि वो बताते हैं कि इस साबुन में तेल मिला है. दरअसल पाम आयल साबुनों में एक खास क्वालिटी के लिए इस्तेमाल होता है. ये क्लीनजिंग एजेंट के तौर पर इस्तेमाल होता है. इसके आयल में बालों और त्वचा से गंदगी हटाने की क्षमता है. नमी भी देता है.
ब्रेड- आप जो पैकेज्ड ब्रेड रोज खाते हैं, उसमें भी पाम आयल का इस्तेमाल होता है. ये उसको आकार में बने रहने की पकड़ देता है. बेक्ड करने में आसानी बढ़ाता है.

ये तो पाम फ्रुट नजर आ रहा है. इसके बीच का सफेद रंग का जो हिस्सा है, तेल इसी के जरिए बनाया जाता है . (shutterstock)

बहुत सी और चीजें जिसमें इसका इस्तेमाल होता है
वेजिटेबल आयल, वेजिटेबल फैट, पाम केरनल आयल, पाम फ्रूट आयल, पामलाइट, पामोलीन, ग्लिसरिल, स्टीयरेट, स्टीरिक एसिड, पालमीटिक एसिड औऱ तमाम चीजें

कैसे निकाला जाता है
ताड़ का तेल आयल पाम एलएईस गुइनीन्सिस के फल की लुगदी से निकाला जाता है; ताड़ की गरी का तेल आयल पाम के फल की गरी से निकाला जाता है. पाम के तेल का रंग स्वाभाविक रूप से लाल होता है, क्योंकि इसमें बीटा कैरोटीन का एक उच्च मात्रा में शामिल रहता है.

मशीनों में भी खूब इस्तेमाल हुआ
ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के दौरान पाम आयल का खूब इस्तेमाल हुआ. मशीनों में लुब्रिकेंट के तौर पर तब इसकी बहुत मांग थी. पाम आयल के जरिए ही लीवर ब्रदर्स’ (अब यूनिलीवर) ने सनलाइट साबुन बनाया. अमेरिकन पामोलिव ब्रांड जैसे साबुन उत्पादों का निर्माण भी इससे किया गया. तब अफ्रीकी देशों में इसका इस्तेमाल खाने के लिए होता था लेकिन यूरोपीय देश उसे खाने लायक नहीं समझते थे.

Tags: Community kitchen, Import-Export, Indonesia, Palm oil

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