लाइव टीवी

नेतन्याहू ने जिसे सैन्य प्रमुख बनाया था, वही छीन सकता है उनकी गद्दी

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: September 19, 2019, 7:53 AM IST
नेतन्याहू ने जिसे सैन्य प्रमुख बनाया था, वही छीन सकता है उनकी गद्दी
इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख बेंजामिन गैंट्ज

इजरायल में चुनाव के बाद एग्जिट पोल के जो रुझान आए हैं, वो ये जाहिर कर रहे हैं कि नेतन्याहू को अब बतौर प्रधानमंत्री अगला कार्यकाल मिलना मुश्किल है. जो शख्स अब अगला पीएम बनता नज़र आ रहा है वो देश का लोकप्रिय सैन्य जनरल है, जिसकी बहादुरी की तमाम कहानियां वहां कहीं जाती हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2019, 7:53 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. इजरायल (Israel) में चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल (Exit Poll) के नतीजे चौंकाने वाले हैं. इसके बाद जो शख्स प्रधानमंत्री के मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है, वो इस देश का रिटायर्ड सैन्य प्रमुख है, जिसकी बहादुरी के किस्से पूरे देश में मशहूर हैं. ऐसा लग रहा है बेंजामिन गैंट्ज (Benjamin getz) अब नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की जगह इजरायल के प्रधानमंत्री बन सकते हैं. इसकी वजह गैट्ज को दूसरी पार्टियों से मिलने वाला समर्थन है. दिलचस्प बात ये भी है कि एकजमाने में नेतन्याहू ने ही गैंट्ज के नाम पर सैन्य प्रमुख के रूप में ठप्पा लगाया था. साथ ही उनकी तारीफों के पुल बांधे थे.

हालांकि इजरायल (Israel Election) के हाल ही में हुए इस राष्ट्रीय चुनाव में सियासी पार्टियों ने एक दूसरे पर काफी कीचड़ उछाली. नेतन्याहू की पार्टी ने पूर्व सैन्य प्रमुख गैंट्ज को अस्थिर दिमाग वाला और प्रधानमंत्री पद के अयोग्य बताया था. वहीं नेतन्याहू के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ लंबे समय तक गद्दी पर टिके रहने को विरोधी पार्टियों ने मुद्दा बताया. कुल मिलाकर गैंट्ज का इस चुनाव में जितना मजाक उड़ाने और नीचा गिराने की कोशिश हुई, वो लगता है कि इजरायल के लोगों को बहुत पसंद नहीं आई.



लिहाजा इस समय अगर एग्जिट पोल को रुझान मानें तो ऐसा लग रहा है कि बेनी गैंट्ज के नाम से लोकप्रिय ये सैन्य जनरल प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ गया है. एक तो उनका ब्लू एंड व्हाइट मोर्चा नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को टक्कर दे रहा है. साथ ही दूसरे सभी विपक्षी दल गैंट्ज के समर्थन में आ गए हैं.

ये भी पढे़ं - जानिए क्यों पाकिस्तानी स्कूलों में हिंदू स्टूडेंट्स को जबरन पढ़ाई जाती है कुरान

दरअसल इजरायल में हमेशा से सैन्य जनरल अपने रिटायरमेंट के बाद सियासी पार्टियों द्वारा हाथोंहाथ लिये जाते रहे हैं. गैंट्ज देश के 19वें सैन्य प्रमुख थे. 19 सैन्य प्रमुखों में केवल तीन ही ऐसे रहे हैं, जिन्होंने राजनीति का रुख नहीं किया, अन्यथा 16 सैन्य जनरल राजनीति में कूदे और उनमें दो प्रधानमंत्री भी बन चुके हैं. ऐसा लग रहा है कि गैंट्ज भी अब उसी ओर बढ़ रहे हैं.

गैंट्ज ने मुश्किल से दस महीने पहले अपनी नई पार्टी बनाई थी. इसके बाद एक नया मोर्चा खड़ा किया

Loading...

रोबीले व्यक्तित्व वाले गैंट्ज सैन्य हीरो माने जाते हैं
गैंट्ज की शख्सियत असरदार है. वो लंबे-चौड़े और नीली आंखों वाले हैं. उनकी सतर्क बॉडी लेंग्वेज और चाल-ढाल उनके व्यक्तित्व को रोबीला भी बनाती है. वो आमतौर पर इजरायल के सबसे बड़े सैन्य हीरो के तौर पर भी गिने जाते हैं,क्योंकि उन्होंने लेबनान के उस मोर्चे पर इजराइली सेना की अगुवाई की, जो एक जमाने में सबसे मुश्किल माना जाता था. जब वो इस मोर्चे से निकले तो लेबनान से आखिरी तौर पर लड़ाई का पटाक्षेप करके ही निकले. लिहाजा पूरे देश में इस शख्स की इमेज ही अलग है.

बहादुरी की तमाम किस्से कहानियां 
गैंट्ज को लेकर इजरायल में उसी तरह तमाम किस्से कहानियां कही-सुनी जाती हैं, जिस तरह हमारे जनरल मानेकशा को लेकर तमाम कहानियां ना जाने कितने सालों से कही जाती रही हैं. सैन्य अफसर उनके स्टाइल के मुरीद रहे हैं. उनका मानना है कि गैंट्ज को उन्होंने मोर्चे पर कठिन से कठिन स्थितियों में भी विचलित नहीं देखा, वो हर समय कूल रहते थे. उनके फैसले अचूक होते थे. लिहाजा उन्होंने अपने जीवन में जितने आपरेशन किये या जितनी लड़ाइयां लड़ी, सभी में वो सफल होकर लौटे. खासकर हमास आतंकवादियों से निपटने की उनकी क्षमता की भी खासी तारीफ होती रही है.

ये भी पढ़ें - ट्रैफिक नियम: अगर आपके पास हैं सारे कागजात, तो भी इन मामूली बातों पर पुलिस काट सकती है चालान

गैंट्ज के साथ काम कर चुके एक सैन्य अफसर ने इजरायल के एक बड़े समाचार पत्र से कहा, वो अलग तरह के शख्स हैं. वो खुद जमकर काम करते हैं और लोगों को भी काम करने की आजादी देते हैं. वो अनुशासनप्रिय हैं और टीम प्लेयर भी.

देश के बहादुर सैन्य जनरल के रूप में गैंट्ज के कई किस्से देशभर में लोकप्रिय हैं


कुछ महीनों पहले अपनी पार्टी खड़ी की
गैंट्ज 60 साल के हैं, लिहाजा 69 साल के नेतन्याहू से कहीं कम उम्र के हैं. 2015 में रिटायर होने के बाद पहले तो गैंट्ज सियासी तौर पर अपनी संभावनाएं तलाशते रहे. इजरायल की कई पार्टियों ने उन्हें अपने साथ आने का मौका दिया लेकिन उन्होंने दिसंबर 2018 में इजरायल रिजाइलेंस नाम से नई पार्टी बनाई. कुछ समय बाद उन्होंने इजराइल की सियासत में दमदार माने जाने वाले दो नेताओं के साथ मिलकर एक मोर्चा खड़ा किया, जिसका नाम ब्लू एंड व्हाइट. ये रंग इजरायल के राष्ट्रीय ध्वज के भी रंग हैं.
हालांकि एग्जिट पोल के बाद लोग कह रहे हैं कि जितनी सीटें नेतन्याहू की पार्टी को मिलती दिख रही हैं, करीब उतनी ही सीटों पर गैंट्स की पार्टी भी जीत रही है लेकिन ये रुझान आने के बाद ये खबरें भी आने लगीं कि अन्य पार्टियां नेतन्याहू की बजाए गैंट्स को समर्थन दे सकती हैं. इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटों के बहुमत की जरूरत होगी.

मां हिटलर के होलोकास्ट से जिंदा बच निकली थीं
गैंट्ज के माता-पिता बाहर से इस नए बने देश में बसने के लिए पहुंचे थे. उनकी मां पोलैंड की हैं, जो हिटलर के होलोकास्ट में जिंदा बच निकली थीं. वहीं पिता रोमानिया के हैं. उनके माता-पिता ने बाद में दक्षिण मध्य इजरायल में को-आपरेटिव एग्रीकल्चर कम्युनिटी शुरू की. ये एक सफल प्रयोग कहा जाता है.

एक मामूली सैनिक के तौर पर करियर शुरू किया था
गैंट्ज ने 1977 में सेना में अपना करियर सबसे निचले पायदान से पैराट्रूपर ब्रिगेड में शुरू किया था. दो साल में ही उन्हे पहला प्रोमोशन अधिकारी के रूप में मिला. फिर तो वो तरक्की की सीढियां चढ़ते ही गए.
उन्हें कई मोर्चों पर भेजा गया. लेकिन सबसे कठिन था लेबनान में गुरिल्ला युद्ध का सामना करना, जिसमें वो कामयाब रहे.

ये भी पढ़ें - जानिए हर मिनट साइबर हमलों से कैसे खातों से निकल रहे हैं रुपए

इथोपिया में जब करीब 14 हजार यहूदी फंसे हुए थे, तो उन्होंने कमांडरों की मदद से उन सभी को एयरलिफ्ट कराया. ये पूरा आपरेशन करीब 36 घंटे का था. इस आपरेशन सोलोमन को लोग आज भी इजरायल में याद करते हैं. हमास आतंकवादियों के खिलाफ उनकी नीतियां और कड़ाई ने भी उन्हें पॉपुलर बनाया.

एक जमाने में वो इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के करीब माने जाते थे लेकिन अब सियासी तौर पर उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी


नेतन्याहू ने ही बनाया था देश का सैन्य प्रमुख 
वर्ष 2011 में जब वो देश के सैन्य प्रमुख बनाए जा रहे थे, तब इस पद के लिए कई दावेदार थे लेकिन तब प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने उनके नाम पर मुहर लगा दी. तब नेतन्याहू ने उन्हें शानदार और अनुभवी कमांडर बताया था. वो इस पद पर तीन साल काम करते रहे और फिर बेहतर काम करने के चलते एक साल का एक्सटेंशन भी मिला.

क्यों नेतन्याहू के खिलाफ हो गए
आखिर क्या वजह रही कि वो उसी नेतन्याहू के खिलाफ हो गए, जिनकी मदद से वो देश के सेना में सर्वोच्च पद तक पहुंचे. अगर इजरायली मीडिया की मानें तो गैंट्ज का कहना है कि नेतन्याहू का कार्यकाल कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है. आखिर वो प्रधानमंत्री के रूप में चार कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और अब पांचवें कार्यकाल के करीब खड़े हैं. ये कुछ ज्यादा ही है.
फिर उन्होंने अपने सार्वजनिक भाषणों में नेतन्याहू की इसलिए भी आलोचना की कि इतने लंबे कार्यकाल के बाद उन्होंने इजरायली जनता को लड़ाई में झोंके रखा है. क्या आप ये चाहते हैं कि अगले 50 सालों तक भी हमारे बच्चे युद्ध में झोंके जाएं. दरअसल वो कट्टर दुश्मन माने जाने वाले फिलिस्तीनियों के साथ ऐसा लचीलापन चाहते हैं, जिससे इजराइयल के हित और सीमाएं भी बदस्तूर रहें लेकिन आए दिन हिंसा और आतंक से छुटकारा मिले. साथ ही वो इजरायल में शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन और सिविल मैरिज के क्षेत्र में पर्याप्त सुधार और विकास की बात कहते हैं.

इजरायल में एग्जिट पोल के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री के मजूबत दावेदार के रूप में देखे जा रहे गैंट्स विवादों से परे नहीं हैं


विवादों से परे भी नहीं हैं 
ऐसा नहीं कि गैंट्ज विवादों से परे हैं. उनके नाम भी विवाद हैं. एक जमाने में उन पर अपने मकान के लिए ज्यादा जमीन हड़पने का आरोप लगा था, हालांकि बाद में उन्होंने अपने मकान के लिए आगे तक किए गए अतिक्रमण को खत्म कर मकान की चारदीवारी पीछे कर ली. हाल ही में चुनावों के दौरान एक महिला ने उनके खिलाफ बदसलूकी और उत्पीड़न का आरोप लगाया. जिसके जवाब में उन्होंने सफाई दी कि वो तो कभी इस महिला से मिले ही नहीं. गैंट्स से इसे विपक्षी पार्टी का चुनावी हथकंडा बताया. साथ ही उक्त महिला के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी ठोक दिया.
हालांकि उनकी सबसे बड़ी कमजोरी राजनीति में अनुभवहीनता मानी जाती है लेकिन यही उनकी मजबूती भी है. क्योंकि इजरायल में एक नये बदलाव के लिहाज से वो शायद इस समय सबसे योग्य शख्स भी हैं.

ये भी पढ़ें - जानिए कितनी खतरनाक है ई-सिगरेट और क्यों लगा बैन

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 19, 2019, 7:01 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...