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कैसे नेहरू के टर्म में 07 शिक्षा संस्थाओं को मिलाकर बनी NCERT, क्यों ट्विटर पर ट्रेंड

एनसीईआरटी की क्लास 12 की इतिहास की किताब के एक चैप्टर को लेकर ट्विटर पर लगातार बहस चल रही है
एनसीईआरटी की क्लास 12 की इतिहास की किताब के एक चैप्टर को लेकर ट्विटर पर लगातार बहस चल रही है

1961 में 07 राष्ट्रीय शिक्षा संस्थाओं को एक करके राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) का गठन हुआ था. क्लास 12 में इतिहास की किताब के एक चैप्टर को लेकर आरटीआई पर दिए गए जवाब के बाद ट्विटर पर इसे लेकर विरोध के स्वर उठने लगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 3:48 PM IST
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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training ) यानि एनसीईआरटी फिर विवादों में घिर गई है. ताजा विवाद इतिहास के एक चैप्टर को लेकर है, जिसको लेकर ट्विटर पर सुबह से ही एनसीईआरटी के खिलाफ ट्विटर पर ट्रेंड चल रहा है. उसे लगातार सवालिया घेरे में खड़ा किया जा रहा है. ये आरोप लग रहे हैं कि वो देश के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रही है.

इसी मामले में शिवांक वर्मा ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत इतिहास के इस चैप्टर के प्रंसग के सोर्स के बारे में पूछा. सूचनाओं के जवाब में एनसीईआरटी द्वारा कहा गया कि परिषद के पास इस बारे में सूचना उपलब्ध नहीं है. बस इसके बाद तो सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस छिड़ गई.

आरटीआई के माध्यम से शिवांक ने यह भी जानना चाहा था कि इन शासकों द्वारा किन-किन मंदिरों की मरम्मत के लिए अनुदान दिया गया था. इन दोनों ही प्रश्नों के जवाब में एनसीईआरटी ने सूचना उपलब्ध न होने की जानकारी दी. इस पर ट्विटर पर सुबह से जबरदस्त तरीके से लोगों के रिएक्शन आ रहे हैं. पहले ये पूरा मुगल के नाम से ट्रेंड हो रहा था लेकिन फिर ये एनसीईआरटी के नाम से ट्रेंड होने लगा.



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हालांकि एनसीईआरटी की किताबों को लेकर अक्सर ये सवाल उठता रहा है कि वो वामपंथी इतिहासकारों के पूर्वाग्रह के असर में रही हैं. वहीं एनसीईआरटी के पक्ष में ये दलील भी जाती रही है कि कुछ लोग जानबूझकर एक खास विचारधारा को हावी करने के लिए संस्कृति और इतिहास की धरोहर में छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं.

एक RTI के जवाब में एनसीईआरटी द्वारा दिया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया.


1977 में एनसीईआरटी को खड़ा किया गया था कठघरे में
1977 में जब जनता पार्टी सरकार सत्ता में आई थी, तब भी एनसीईआरटी को इसी तरह कठघरे में खड़ा किया गया था. पिछले कुछ सालों से अब देश की इस अहम शैक्षिक संस्था पर ये आरोप लग रहे हैं. कई बार कुछ आपत्तियां सही पाई गईं.

अंबेडकर के कार्टून पर बवाल
वर्ष 2012 में डॉ भीमराव अंबेडकर के एक कार्टून पर बहुत बवाल हुआ था, उसे उनका अपमान बताया गया, जिस पर एनसीईआरटी के तत्कालीन मुख्य सलाहकार योगेंद्र यादव और सुहस पालशिखर को इस्तीफा देना पड़ा था. सरकार को भी माफी मांगनी पड़ी थी.

दिल्ली में अरविंदो मार्ग पर एनसीईआरटी का मुख्यालय


इतिहासकार मोरे का आरोप
इतिहासकार सदानंद मोरे आरोप लगा चुके हैं कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के आने से पहले भारतीय उपमहाद्वीप के आधे हिस्से पर मराठा साम्राज्य का अधिपत्य था लेकिन एनसीईआरटी ने कभी अपने पाठ्यक्रमों में इसे लेकर कोई सुधार नहीं किया. कई अन्य इतिहासकार भी एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम को बदलने की मांग करते रहे हैं.

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नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल में स्थापना
एनसीईआरटी की स्थापना जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री होने के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्रालय के तहत 27 जुलाई 1961 में की गई थी. इसके 01सितंबर 1961 से काम करना शुरू किया. तब इसमें सरकार ने 07 राष्ट्रीय शासकीय संस्थानों को मिला दिया था. इसका मुख्यालय दिल्ली में अरविंदो मार्ग पर है. फिलहाल डॉक्टर हृषिकेश सेनापति वर्ष 2015 से इसके निदेशक हैं.

देशभर की शिक्षा में एकरूपता लाई गई
हालांकि उस समय NCERT की स्थापना राष्ट्र की समेकित शिक्षा का प्रारूप तैयार करने और भारत की सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए हुए थे. फिर इसी आधार पर 1968 में पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा हुई. जिसके तहत पूरे देश में दसवीं और 12वीं की पढ़ाई में एकरूपता लाने की कोशिश की गई.

NCERT का लोगो, जिसे कर्नाटक के रायचूर जिले में मिले सम्राट अशोक के शिलालेख से लिया गया है.


नेशनल टैलेंट सर्च स्कीम
NCERT 1963 में शुरू की गई राष्ट्रीय विज्ञान प्रतिभा खोज योजना (NTSS) के पीछे भी रही है, जिसका उद्देश्य भारत में प्रतिभाओं को तलाशना और उन्हें छात्रवृत्ति के जरिए तराशना रहा है. बाद में इस स्कीम का नाम 1976 में बदलकर नेशनल टैलेंट सर्च स्कीम हो गया. इसे फिलहाल क्लास 10 के छात्रों के लिए पूरे देश में लिया जाता है.

पहली बार कब तैयार कीं एनसीईआरटी ने किताबें
एनसीईआर का फ्रेमवर्क 1975 में सामने आया. उसने रिसर्च और अन्य गतिविधियों के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार किया, जिससे भारतीय शिक्षा में एकरुपता लाई जा सके.

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इसके बाद इसे 1988 में फिर 1986 में लागू की गई शिक्षा नीति के आधार पर फिर से तैयार किया गया. वर्ष 2000 में एनसीईआरटी ने फिर जो नया फ्रेमवर्क तैयार किया, उसमें ध्यान रखा गया कि बच्चों की पढ़ाई तनाव मुक्त और पढ़ाई के कम बोझ के साथ हो. इसके बाद वर्ष 2005 में फिर नया राष्ट्रीय कैरिकलुम फ्रेमवर्क लागू किया गया.

कैसे तय होता है पाठ्यक्रम 
एनसीईआरटी का दावा है कि वो अपने तमाम पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें देश के जाने माने शिक्षाविदों के पैनल गठित करके खासे रिसर्च और गंभीर चर्चाओं के बाद तैयार करती है. हर पाठ्यक्रम और किताब पर काफी मेहनत होती है. उसे इस तरह तैयार किया जाता है कि देशभर के स्कूलों में पढने वाले बच्चों का मानसिक, राष्ट्रीय और चारित्रिक विकास हो, उनमें शिक्षा के साथ तार्किक विशेषता भी हासिल हो.

कहां से आया एनसीईआरटी का लोगो
एनसीईआरटी का लोग सम्राट अशोक के दौर में तीसरी सदी में एक शिलालेख से लिया गया है, जो कर्नाटक के रायचूर जिले में मिला.
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