पाक में कभी थी 'पाकिस्तान हिंदू पार्टी', भगवा था झंडा

पाकिस्तान में अन्य अल्पसंख्यकों ने अपनी छोटी मोटी सियासी पार्टियां तो बनाई हुई हैं लेकिन 17.7 रजिस्टर्ड वोटर और करीब 38 लाख की आबादी के बाद उनका कोई सियासी दल नहीं

News18Hindi
Updated: July 18, 2018, 12:33 PM IST
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पाकिस्तान में एक जमाने में हिंदुओं की सियासत के लिए एक ऐसी पार्टी बनाई गई थी. ये पार्टी काफी जोरशोर से बनाई गई. इस पार्टी को बनाने वाले शख्स कद्दावर हिंदू नेता थे. लेकिन ये पार्टी जितनी धूमधाम से बनी, उतने ही चुपचाप तरीके से कुछ सालों बाद वह हाशिए पर भी सरक गई.

इस पार्टी को पाकिस्तान के उमरकोट रियासत के हिंदू राजा राणा चंद्र सिंह ने 1990 में बनाया था. माना गया था कि ये पार्टी हिंदुओं की आवाज बनेगी. लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पाया. ये पार्टी पाकिस्तान चुनाव आयोग में तो रजिस्टर्ड नहीं है लेकिन कागजों पर अब भी इसका वजूद है. अब राणा चंद्र सिंह के बेटे राणा हमीर सिंह इस पार्टी के प्रमुख हैं.

किन हालात में बनी थी ये पार्टी
राणा चंद्र सिंह की रियासत अमरकोट पाकिस्तान के गठन के समय वहां की सबसे ताकतवर और बड़ी रियासत थी. ये रियासत 22,000 किलोमीटर में फैली हुई थी. पाकिस्तान के गठन के समय इस रियासत के शासक ने सत्ताधारी पार्टी से हाथ मिलाये. बाद में राणा चंद्र सिंह उन लोगों में शामिल हुए, जिन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का गठन किया. लेकिन एक समय उन्हें ये लगा कि पाकिस्तान में हिंदुओं की बड़ी संख्या है और उनकी सही तरीके से आवाज उठाने वाली कोई पार्टी नहीं है. राणा संपन्न भी और संपर्कों वाले भी - उन्होंने 1990 में पाकिस्तान हिंदू पार्टी का गठन किया.

1990 में पाकिस्तान के कद्दावर हिंदू नेता राणा चंद्र सिंह ने पाकिस्तान हिंदू पार्टी का गठन किया था


इन पार्टी का झंडा या संविधान भी था
- इसका एकमात्र नारा हिंदूओं की मजबूती था. ये प्राचीन हिंदू मूल्यों की पैरवी करती थी. इसका झंडा भगवा रंग का वैसा ही झंडा था, जो शिवाजी इस्तेमाल करते थे. उनके झंडे पर ऊं और त्रिशूल प्रतीक के तौर पर उभरे हुए थे.
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कौन थे राणा चंद्र सिंह
राणा चंद्र सिंह पाकिस्तान की अमरकोट (अब उमरकोट) के शासक थे. वो हिंदू सोढा राजपूत थे. वो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के संस्थापक संदस्य थे. वो उमरकोट ने सात बार नेशनल असेंबली के लिए चुने गए. उन्होंने पाकिस्तान हिंदू पार्टी का गठन किया था. वो दो बार पाकिस्तान सरकार में मंत्री भी रहे. वो पाकिस्तान अल्पसंख्यक कमेटी के चेयरमैन भी थे. उन्हें पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो का करीबी मित्र भी माना जाता था. उनका वर्ष 2003 में निधन हो गया. उनके बेटे राणा हमीर सिंह उनके उत्तराधिकारी हैं.

पाकिस्तान हिंदू पार्टी उस तरह का असर पैदा नहीं कर सकी. हिंदुओं के बीच ही वो अपना आधार नहीं बना पाई थी


ये पार्टी कभी मजबूत क्यों नहीं हो पाई
राणा चंद्र सिंह ने पाकिस्तान हिंदू पार्टी का गठन तो किया लेकिन इस पार्टी के ज्यादातर पदाधिकारी या तो उनके ही रिश्तेदार थे या बड़े ओहदेदार हिंदू. इसमें पाकिस्तान की निचली हिंदू जातियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था. ऐसे में ये पार्टी अपना जनाधार बनाने में विफल रही. दूसरे इस पार्टी के लोगों को जमीन पर उतर हिंदुओं को जिस तरह साथ लेना था, वो भी नहीं हो सका. वहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने जिन हिंदु अल्पसंख्यकों को प्रांतीय असेंबली और नेशनल असेंबली की रिजर्व सीटों पर भेजा, वो निचली जाति के हिंदुओं से भी ताल्लुक रखते थे. बेशक पीपीपी ने हिंदुओं के लिए ज्यादा कुछ किया नहीं हो लेकिन उन्हें अपनी पार्टी से भी जोड़ा.

पाकिस्तान में हिंदुओं का कोई मजबूत संगठन नहीं होने की वजह से पिछले कुछ सालों में वहां हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार या मानवाधिकार हनन की कई घटनाएं हुई हैं


पाकिस्तान हिंदू पार्टी ने चुनावों में क्या असर दिखाया
- पीएचपी को जिला स्तर और प्रांतीय स्तर पर चुनावों में सफलता की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नतीजतन कुछ ही सालों में इस पार्टी दौड़ से बाहर हो गई. इसका नतीजा ये हुआ कि इसे गठिन करने वाले राणा चंद्र सिंह ने ही वापस पीपीपी को ज्वाइन कर लिया. उसके बाद से पाकिस्तान में कभी हिंदुओं ने अपना कोई सियासी दल गठित करने की कोशिश भी नहीं की जबकि वहां ईसाइयों के कई सियासी दल हैं, जो रजिस्टर्ड भी हैं. वो इस तरह हैं

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पाकिस्तान क्रिश्चियन नेशनल पार्टी
मसीह मिल्लत पार्टी
क्रिश्चियन नेशनल एंड लिब्रेशन फ्रंट
आल पाकिस्तान मसीही इत्तिहाद
पाकिस्तान क्रिश्चियन मूवमेंट
क्रिश्चियन लेबर पार्टी
पाकिस्तान क्रिश्चियन लीग
पाकिस्तान क्रिश्चियन कांग्रेस

पाकिस्तान में क्यों नहीं बन पाती हिंदुओं की सियासी पार्टी
- पाकिस्तान में आए दिन हिंदुओं के खिलाफ आने वाली उत्पीड़न, मानवाधिकार हनन और अत्याचार के बावजूद पाकिस्तान की नेशनल असेंबली, सीनेट और राज्य असेंबली के हिंदू नेताओं की चुप्पी हैरान करने वाली है. उऩ्होंने कभी कोशिस नहीं की कि हिंदूओं के हितों के मद्देनजर कोई सियासी दल बनाया जाए. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पाकिस्तान में ऐसा कुछ होता है तो उसका सकारात्मक असर हिंदुओं के विकास पर पड़ेगा.

पाकिस्तान पीपुल्स लीग की हिंदू सीनेटर कृष्णा कुमारी. पाकिस्तान में हिंदू आबादी आमतौर पर पाकिस्तान पीपुल्स लीग के साथ ज्यादा जुड़ी रही है


निचली जाति के हिंदू पाकिस्तान में क्यों खराब हाल में हैं
पाकिस्तान में निचली जाति के हिंदुओं की दिक्कतें ज्यादा हैं, क्योंकि ऊंची जाति के हिंदू आमतौर पर संपन्न और बेहतर संपर्कों वाले हैं, वो सामाजिक, धार्मिक सियासी तौर पर निचली जाति के हिंदुओं से खुद को अलग रखते हैं. इसलिए निचली जाति के हिंदू ना केवल ज्यादा अत्याचार का शिकार होते हैं बल्कि किसी मजबूत संगठन के अभाव में उनकी कोई सुनवाई भी नहीं हो पाती.

राणा हमीर सिंह सिंध प्रांत में तीन बार विधायक रह चुके हैं. वो उमरकोट के हिंदू शासक घराने के उत्तराधिकारी हैं


राणा चंद्र सिंह के बेटे भी क्या राजनीति में सक्रिय हैं
कुछ हद तक, वो तीन बार सिंध प्रांत में विधायक रह चुके हैं. उनकी छवि दबंग राजपूत की है. इस इलाके में उनका खासा असर है. उमरकोट का प्रसिद्ध किला उन्हीं के परिवार की मिल्कियत है, इसी किले में अकबर का जन्म हुआ था. शेर शाह सूरी से हारने के बाद जब हुमांयू भाग रहा था तब उन्हें इस किले में शरण दी गई थी. बड़ी संख्या में थार पकार, उमरकोट और मिठी के हिंदू और मुसलमान आज भी इस परिवार को अपना शासक मानता है. वो तीन बार विधायक रह चुके हैं. जब उनका अभिषेक हुआ तो बहुत बड़ा समारोह हुआ था. राणा हमीर के बेटे कर्णी सिंह की शादी जयपुर में हुई.

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