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जानिए क्यों पाकिस्तानी स्कूलों में हिंदू स्टूडेंट्स को जबरन पढ़ाई जाती है कुरान

News18Hindi
Updated: September 17, 2019, 9:58 PM IST
जानिए क्यों पाकिस्तानी स्कूलों में हिंदू स्टूडेंट्स को जबरन पढ़ाई जाती है कुरान
पाकिस्तान से लगातार जबरन धर्मांतरण की ख़बरें आती रहती हैं.

पाकिस्तान के स्कूलों में शुरुआती क्लासेज से लेकर इंटर तक जो पढ़ाया जाता है, वो दूसरे धर्मों के लिहाज से आपत्तिजनक होता है. खासकर इन किताबों में हिंदू विरोधी टिप्पणियां भी होती हैं. कई रिपोर्ट्स में इसके खिलाफ आवाज भी उठाई जा चुकी है.

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  • Last Updated: September 17, 2019, 9:58 PM IST
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नई दिल्ली.  पाकिस्तान से लगातार हिंदुओं के लिए खराब होते हालात की खबरें आ रही हैं. हर महीने हिंदू ईश निंदा कानून का शिकार बनाए जाते हैं. उनके खिलाफ अपराध बढ़े हैं. हिंदुओं को सुरक्षा देने के नाम पर अवैध धन उगाही की जाती है. आपत्तिजनक बात ये भी है कि पाकिस्तान की स्कूली किताबें हिंदू धर्म के खिलाफ टिप्पणियों से भरी पड़ी हैं.

करीब दो साल पहले पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली ने पूरे पाकिस्तान में स्कूलों में कुरान की पढ़ाई अनिवार्य कर दी. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार  "होली कुरान बिल 2017" दो साल पहले पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में पास किया गया. जिसके बाद पाकिस्तान के तमाम स्कूलों में उसकी पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई. इसकी पढ़ाई अब ग्रेड वन क्लास से लेकर ग्रेड 12 क्लास तक अनिवार्य है.


हालांकि जब ये बिल लागू हुआ तो ये कहा गया था कि ये अनिवार्यता केवल उन्हीं बच्चों पर लागू होगी, जो मुस्लिम होंगे लेकिन पाकिस्तान से मिलने वाली कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कई स्कूलों में अल्पसंख्यक बच्चों को भी उन्हें इसकी पढ़ाई करना ज़रूरी है, अन्यथा उन्हें स्कूल में दाखिला नहीं मिलता.

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क्या कहती है खुद पाकिस्तानी संस्था की रिपोर्ट 
हाल ही में सस्टनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एसडीपीआई) इस्लामाबाद ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसके अनुसार पाकिस्तान के स्कूलों के पाठ्यक्रमों से ऐसा लगता है कि पाकिस्तान केवल मुस्लिमों का देश है, जहां अन्य किसी धर्म के लोग नहीं रहते. सभी के लिए कुरान पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है. हमारा संविधान कहता है कि कुरान को केवल मुस्लिम बच्चों के लिए अनिवार्य किया जाए. लेकिन स्कूलों ने सभी के लिए इसकी पढ़ाई जरूरी कर दी है.
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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने दो साल पहले एक कानून पास करके सभी स्कूलों में कुरान की पढ़ाई अनिवार्य कर दी. हालांकि ये केवल मुस्लिम बच्चों के लिए थी लेकिन अब ये सभी बच्चों को करनी पड़ रही है


कानून के अनुसार क्लास एक से लेकर पांच तक के स्टूडेंट्स कुरान के अरबी टेक्स्ट को पढ़ना सीखेंगे. जबकि क्लास छह से 12 तक के बच्चे अरबी टैक्स्ट के साथ इसके आसान उर्दू ट्रांसलेशन को पढ़ेंगे.

पढ़ाई से पैदा होगी धार्मिक नफरत 
रिपोर्ट ये भी कहती है कि इस पढ़ाई से अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत पैदा होगी. यही नहीं छात्रों को जो किताबें पढ़ाई जाती हैं, उसमें जिहाद और शहादत का खासा महिमा मंडन किया गया है. वैसे पाकिस्तान की स्कूली किताबों के पाठ्यक्रम में धार्मिक तौर पर विवादित सामग्री को लेकर पहले भी कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिसमें इस पर आपत्ति भी जाहिर की गई.

पाकिस्तानी स्कूल किताबों में आपत्तिजनक बातें 
कुछ समय पहले पाकिस्तान के सबसे प्रतिष्ठित अखबार "डॉन" में रिपोर्ट छपी कि पाकिस्तानी स्कूलों में हिन्दुओं और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति विद्वेषपूर्ण और भडक़ाऊ शिक्षा दी जा रही है. ये रिपोर्ट कहती है कि टैक्स्ट बुक्स में कई आपत्तिजनक बातें दर्ज हैं. ज्यादातर टीचर गैर मुस्लिमों को इस्लाम का दुश्मन मानते हैं.

कुछ समय पहले पाकिस्तान के अखबार डॉन में एक रिपोर्ट छपी, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान के स्कूलों में धार्मिक तौर पर विद्वेषपूर्ण शिक्षा दी जा रही है


ये रिपोर्ट अमेरिकी सरकार के एक मिशन ने तैयार की थी. रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की पढ़ाई में कट्टर इस्लाम के नाम पर जहर का बीज बोया जा रहा है. ये पढ़ाई अक्सर आतंकियों के प्रति सहानुभूति की वजह बनती है. ये शिक्षा धार्मिक अतिवाद को बढावा भी देती है, जो पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहा है.

अमेरिकी संस्था ने किया सौ से ज्यादा स्कूली किताबों का अध्ययन 
अमेरिकी कमीशन "यूएस कमीशन आन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम" के चेयरमैन लेनार्ड लियो ने इस रिपोर्ट में कहा कि पाकिस्तान में हालात लगातार खराब हो रहे हैं. रिपोर्ट में पाकिस्तान के चारों प्रातों में कक्षा एक से लेकर दस तक की सौ से ज्यादा पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन किया गया.

किताबों में लिखा है, "हिंदुओं की संस्कृति और समाज अन्याय और क्रूरता पर आधारित है जबकि इस्लाम शांति और भाईचारे का संदेश देता है." देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले पंजाब प्रांत में कक्षा चार की सामाजिक अध्ययन की किताबों में लिखा है," मुस्लिम विरोधी ताकतें दुनिया से इस्लाम के वर्चस्व को खत्म करने में लगी हैं."

एक अमेरिकी मिशन की रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की पढ़ाई में कट्टर इस्लाम के नाम पर जहर का बीज बोया जा रहा है


पाकिस्तान की इतिहास की किताबों में मोहम्मद गजनवी को नायक के तौर पर महिमामंडित किया गया है, जिसने 1029 ईसवी के आसपास सोमनाथ मंदिर को तोड़ा था. इन्हीं सब शिक्षाओं का नतीजा है कि पाकिस्तान दुनिया का तीसरा सबसे असहिष्णु देश बन चुका है.

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जो पाकिस्तान में आमतौर पर होता है
- हिन्दू बच्चों को दाखिला नहीं मिल पाता
- प्रवासी भारतीयों को पाकिस्तान में तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है
- पाकिस्तान में हिंदुओं के बलपूर्वक धर्म बदलवाने की घटनाएं बहुतायत में हैं
- हिंदू लड़कियों के लिए पाकिस्तान में रहना मुश्किल होता जा रहा है
- उनका अपहरण करके जबरदस्ती मुसलमानों से शादी करा दी जाती है
- हिंदुओं और सिखों से जबरदस्ती जजिया टैक्स वसूला जाता है
- हिंदू कर्मचारियों की हालत भी बहुत बेहतर नहीं
- स्कूलों की किताबों में पाठ्यक्रम ऐसा है जो हिंदुओं के प्रति विद्वेष ज्यादा फैलाता है
- हिंदुओं से उनकी बड़े पैमाने पर जमीन छीनी जा चुकी है
- हिंदुओं को ना तो अच्छी नौकरी मिल पाती है और ना ही बैंक से लोन

यूनेस्को की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के स्कूलों में जो पढाया जा रहा है, उससे आतंकवादी पैदा हो रहे हैं या फिर उनके समर्थक


पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति 

  • अक्सर हिंदुओं को नाहक ईशनिंदा का शिकार बनाकर फंसा दिया जाता है, जिसमें मृत्यु दंड जैसी कड़ी सजा का प्रावधान है.

  • पाकिस्तान में हिंदुओं को अपने, परिवार और व्यावसाय की सुरक्षा के लिए फिरौती देनी होती है, जो स्थायीय असमाजिक तत्वों द्वारा वसूली जाती है, जिसमें स्थानीय नेताओं का भी दखल होता है.

  • पाकिस्तान में हर साल 2000 से ज्यादा हिंदू लड़कियों का अपहरण होता है, जिनकी धर्मांतरण करके शादी कर दी जाती है.

  • पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों से भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है. उनकी स्थिति दोयम दर्जे के नागरिकों से भी गई बीती है.

  • कानून इस तरह बने हैं कि वो हमेशा मुसलमानों के लिए मददगार होते हैं.


बड़े पैमाने पर मुस्लिमों का पलायन 
पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर मुस्लिमों का पलायन होता रहा है. हर साल 5000 से ज्यादा हिंदू पाकिस्तान से भागकर भारत पहुंचते हैं. वो यहां राजस्थान से लेकर दिल्ली तक विभिन्न शरणार्थी कैंपों में शरण लेते हैं. भारत सरकार उन्हें लंबी अवधि का वीजा देती है. लेकिन ये वीजा हर पांच साल के बाद नवीनीकृत कराना होता है. वर्ष 2011 से 2018 के बीच भारत सरकार 36000 पाकिस्तानी हिंदुओं को लंबी अवधि का वीजा दिया.

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First published: September 17, 2019, 8:57 PM IST
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