संघ के जिस प्रोग्राम में प्रणब मुखर्जी जा रहे हैं, जानें उसके बारे में सबकुछ

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इन दिनों इसलिए चर्चाओं में हैं, क्योंकि उन्होंने आरएसएस के नागपुर में होने वाले एक प्रोग्राम में जाने के लिए रजामंदी दे दी है.


Updated: May 31, 2018, 4:32 PM IST
संघ के जिस प्रोग्राम में प्रणब मुखर्जी जा रहे हैं, जानें उसके बारे में सबकुछ
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो)

Updated: May 31, 2018, 4:32 PM IST
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनकर नागपुर जाने वाले हैं. प्रणब की पृष्ठभूमि ठेठ कांग्रेस नेता की रही है. उनकी कांग्रेस की गहरी जड़ें हैं. जब उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए अपनी मंजूरी दी तो लोगों को हैरानी हुई. खुद कांग्रेस के कई नेताओं ने इसे अच्छा नहीं माना. प्रणब नागपुर में सात जून को होने वाले संघ शिक्षा वर्ग के समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे. इस अवसर वो वहां स्वयंसेवकों को भाषण देंगे.

संघ शिक्षा वर्ग क्या है
- ये सालाना प्रशिक्षण शिविर है, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हर साल करता है. ये तीसरे साल के स्वयंसेवकों के लिए होता है. इससे पहले पहले साल और दूसरे साल के स्वयंसेवकों का कैंप भी होता है जो प्रांत और क्षेत्र आधार पर आयोजित किया जाता है. पहले साल के स्वयंसेवकों का शिविर 20 दिनों का होता है और संघ के 42 प्रांत ईकाइयों में होता है. दूसरे साल के स्वयंसेवकों के लिए ट्रेनिंग कैंप क्षेत्रीय आधार पर लगते हैं. ये भी 20 दिनों के होते हैं. लेकिन तीसरे साल के स्वयंसेवकों का कैंप नागपुर में ही होता है. हालांकि, पहले और दूसरे साल के कैंप में शामिल होने वाली लिस्ट जिला स्तर पर कई आधार पर छांटकर तैयार की जाती है.

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इस कैंप को कौन अटैंड कर सकता है
पहले तो इन कैंपों में संघ से जुड़े स्वयंसेवक आसानी से पहुंच सकते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से जब इसमें स्वयंसेवकों की तादाद बढ़ने लगी, तो उनकी संख्या को सीमित किया गया है. अब तीसरे साल के कैंप में नागपुर में वही स्वयंसेवक पहुंच पाता है जिसने प्रांतीय स्तर पर दो सालों तक जिम्मेवार स्थितियों में काम किया हो.

इस कैंप में कितने स्वयंसेवक संघ होते हैं
तीसरे वर्ष का कैंपनागपुर स्थित संघ मुख्यालय के स्मृति मंदिर परिसर में लगाया जाता है. ये 25 दिनों का होता है. हालांकि, पहले इसकी अवधि 40 दिनों की होती थी.

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कितने स्वयंसेवक इसमें आते हैं?
वर्ष 2017 में 5726 स्वयंसेवकों ने फर्स्ट ईयर का कैंप अटेंड किया. दूसरे साल के कैंप में 3796 लोगों ने शिरकत की जबकि 899 स्वंयसेवक तीसरे साल के कैंप में होंगे. यहां सभी स्वयंसेवकों को अपने खर्च पर आना होता है. शुल्क भी देना होता है. इस कैंप में 18 से 45 साल आयुवर्ग के लोग शामिल हो सकते हैं. जिनकी उम्र 45 साल से ज्यादा हो, उसके लिए अलग विशेष कैंप लगाए जाते हैं.

क्या है संघ शिक्षा वर्ग, ये कब शुरू हुआ?
तीसरे साल का कैंप आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार ने 1927 में शुरू किया था. ये आरएसएस के सालाना दो मुख्य कार्यक्रमों में एक होता है. दूसरा कार्यक्रम विजयादशमी उत्सव होता है या उसे संस्थापक दिवस भी कहते हैं. इसे पहले अफसर्स ट्रेनिंग कैंप (ओटीसी) कहा जाता था. बाद में सरसंघचालक एमएस गोलवरकर ने इसका नाम संघ शिक्षा वर्ग रखा.

संघ शिक्षा वर्ग के कैंप में क्या होता है?
25 दिन का ये प्रोग्राम अप्रैल मई में होता है जब नागपुर में काफी गर्मियां पड़ रही होती हैं. तापमान आमतौर पर 45 डिग्री सेंटीग्रेड को छूता है. ये ट्रेनिंग काफी कठिन होती है और इसका रूटीन बहुत कड़ा होता है. स्वयंसेवकों को सुबह चार बजे उठना होता है. रात 10.30 बजे सोने का समय होता है. इस दौरान उन्हें केवल एक ब्रेक मिलता है- वो एक घंटे का होता है.
सामान्य तौर पर सुबह के पहले दो घंटे का समय शारीरिक अभ्यास का होता है, जिसमें कई तरह की ड्रिलिंग. शस्त्ररहित कलाएं, जूडो, कराटे और दंडयुद्ध करना होता है. दिन के प्रोग्राम में अलग अलग ग्रुप के साथ दो मीटिंग्स होती हैं. रोज एक संयुक्त सत्र भी होता है, जिसे बौद्धिकी कहा जाता है.



कौन इन्हें संचालित करता है?
मुख्य शिक्षक शारीरिक गतिविधियों को संचालित करते हैं. शारीरिक प्रमुख इसका प्रोग्राम तय करते हैं, जो वो मुख्य शिक्षक के साथ मिलकर करते हैं. जबकि बौद्धिक प्रमुख इंटैलेक्चुअल प्रोग्राम की तैयारी करते हैं. कैंप की अगुवाई पालक करते हैं. हर गतिविधि के लिए ट्रेनर तय होते हैं. आमतौर पर संघ के वरिष्ठ नेता बौद्धिकी में मौजूद रहते हैं. इसमें सीनियर लीडर आते हैं. हिन्दी और अन्य विषयों पर भाषण देते हैं. कैंप में सांस्कृतिक गतिविधियां भी होती हैं.

मुख्य अतिथि कौन होता है?
जब इस प्रोग्राम का अंत होता है तो किसी भी क्षेत्र की कोई जानी मानी हस्ती मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाई जाती है. चीफ गेस्ट भाषण देता है. आमतौर पर संघ उन लोगों को बुलाता है जो जरूरी नहीं कि उसके सिद्धांतों से जुड़े या बंधे हों.

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प्रणब दा (Getty Images)


पिछले कुछ सालों के मुख्य अतिथि
2010 - जेपी राजखोवा (आसाम के पूर्व मुख्य सचिव)
2011 - डॉ गंगा राजू (विजयवाडा के उद्योगपति)
2012- अश्विनी कुमार (पंजाब केसरी ग्रुप)
2013- श्रीश्रीश्री निर्मलानंदानाथ महास्वामी (आदिचुंगचंगारी मठ, कर्नाटक के प्रमुख)
2014- श्रीश्री रविशंकर (आध्यात्मिक गुरु)
2015-डी वीरेंद्र हेगडे (धर्माधिकारी, धर्मस्थल मंदिर, कर्नाटक)
2016 - रंतिदेव सेनगुप्ता (बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार)
2017 - जनरल रुकमंगुड कटवाल (पूर्व नेपाल आर्मी प्रमुख)
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Updated: June 19, 2018 05:42 PM ISTभाजपा से आदिवासियों की नाराजगी दूर करने मंथन कर रही RSS!
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