बेशुमार दौलत है इन मुल्कों में, हैं पूरी तरह से टैक्स-फ्री

बेशुमार दौलत है इन मुल्कों में, हैं पूरी तरह से टैक्स-फ्री
दुनिया के कई देश हैं जो नागरिकों से इनकम टैक्स नहीं लेते (Photo-goodfreephotos)

अक्सर अपने टैक्स-फ्री होने की वजह से चर्चा में रहने वाला ये देश पहली बार कोरोना संकट (coronavirus crisis) में नागरिकों पर इनकम टैक्स (income tax) लगा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 25, 2020, 11:29 AM IST
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कोरोना वायरस (coronavirus) के कारण दुनिया के अमीर देशों की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है. अरब देशों (Arab world) पर भी इसका असर दिख रहा है. वायरस के चलते कच्चे तेल (crude oil) की कीमत में काफी गिरावट आई है और सऊदी अरब (Saudi Arabia) की हालत भी खराब होने लगी है. यही वजह है कि अक्सर अपने टैक्स-फ्री होने की वजह से चर्चा में रहने वाला ये देश नागरिकों पर टैक्स बढ़ाने की सोच रहा है.

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था बिगड़ी
यूनाइटेड नेशन्स के मुताबिक कोरोना के कारण सऊदी की अर्थव्यवस्था 5.7 तक सिकुड़ गई है. ये बीते 30 सालों में सबसे बड़ी गिरावट है. माना जा रहा है कि इससे वहां की एक चौथाई आबादी प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि सऊदी वो सारे विकल्प देख रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके. विऑन की रिपोर्ट के मुताबिक इसी में से एक विकल्प नागरिकों पर इनकम टैक्स लागू करना हो सकता है. बता दें कि फिलहाल वहां के नागरिकों को कोई टैक्स नहीं देना होता है. जबकि अप्रवासियों और कॉरपोरेट से 20 फीसदी इनकम टैक्स लिया जाता है.अब चूंकि कच्चे तेल की कीमत घट गई है, लिहाजा यहां का निर्यात भी लगभग 60 फीसदी तक घटा है. इसी वजह से सऊदी में पहली बार नागरिकों से टैक्स वसूली की बात हो रही है.

कोरोना के कारण सऊदी की अर्थव्यवस्था 5.7 तक सिकुड़ गई है (Photo-pixabay)

पहले लगे ये टैक्स


वैसे साल 2018 में यहां वैल्यू एडेड टैक्स यानी वैट की शुरुआत हो चुकी थी. इसके तहत कई बड़ी सेवाओं पर वैट लगाया जाने लगा, लेकिन तब भी रियल एस्टेट, मेडिकल, शिक्षा और हवाई यात्रा जैसी सर्विस इससे बाहर ही रहीं. इसके बाद भी नागरिकों के लिए अलग से कोई टैक्स व्यवस्था नहीं रही. यहां टैक्स से मतलब है नौकरी से मिलने वाली वो तवख्वाह, जिसका कोई भी हिस्सा नागरिक सरकार को न दें. आमतौर पर टैक्स देश की व्यवस्था में सुधार के नाम पर दिया जाता है. सऊदी के सबसे ज्यादा तेल उत्पादक देशों में से एक होने के कारण उससे जो पैसे आते हैं, वो राजस्व नागरिकों पर खर्च होता रहा है. अब ये नियम बदल सकता है.

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कई अरब देश टैक्स-फ्री हैं
वैसे सऊदी अकेला देश नहीं, जो नागरिकों से टैक्स नहीं लेता. कई अरब देश इस कतार में बड़े चर्चित रहे हैं. जैसे कि कतर एक ऐसा ही देश है, जो टैक्स नहीं लेता. तेल उत्पादक ये देश भी काफी अमीर है लेकिन अपने नागरिकों से टैक्स नहीं लेता. तेल से आने वाले राजस्व से ही यहां की व्यवस्था चलती रही है. इसी तरह से तेल उत्पादक देश ओमान और कुवैत में भी टैक्स नहीं लिया जाता है. हां, कुवैत में हर नागरिक को सोशल इंश्योरेंस में अपना योगदान देना जरूरी है.

यूरोपीय देश मोनैको के लोगों को भी इनकम टैक्स नहीं देना होता है (Photo-goodfreephotos)


ब्रुनई में भी रियायत
इसी तरह से ब्रुनई में भी नागरिक टैक्स-फ्री जीवन बिता रहे हैं. यहां पर इसकी जगह एंप्लॉई ट्रस्ट फंड और सप्लीमेंटल कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम है, जिसका पैसा अंततः नागरिकों को ही मिल जाता है. इसी तरह से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी टैक्स-फ्री देश है. यहां केवल फॉरेन बैंक और फॉरेन तेल कंपनियों की कैपिटल गेन इनकम पर सामान्य बिजनेस टैक्स लगता है. बहरीन में भी नागरिकों को टैक्स से राहत मिली हुई है. यहां पर इसकी बजाए एंप्लॉयर को अपने स्टाफ के लिए 12 प्रतिशत सोशल इंश्योरेंस टैक्स देना होता है.

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इस सैलानी देश में नहीं लगता टैक्स
उत्तर अटलांटिक महासागर में ब्रिटेन का प्रवासी क्षेत्र बरमुडा टैक्स-हेवन कहा जाता है यानी यहां भी नागरिकों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है. सैलानियों के बीच काफी लोकप्रिय इस जगह में नागरिकों पर टैक्स तो नहीं लेकिन रहने के लिहाज से ये काफी महंगी जगह है. यहां पे रोल टैक्स, सोशल सिक्योरिटी, प्रॉपर्टी और कस्टम ड्यूटी पर 25 प्रतिशत टैक्स लगता है.

मोनैको है करोड़पतियों का मुल्क
इसी तरह से यूरोपीय देश मोनैको के लोगों को भी इनकम टैक्स नहीं देना होता है. फ्रेंच भाषा बोलने वाले इस देश में दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा प्रतिव्यक्ति करोड़पति हैं. यहां इतने ज्यादा अमीर लोग हैं कि एक से दूसरी जगह जाने के लिए कार या पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जगह हेलीकॉप्टर से आते-जाते हैं. सबसे दिलचस्प ये है कि इतनी अमीरी के बाद भी यहां लोगों को इनकम टैक्स से निजात मिली हुई है.
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