Arctic महासागर में तेजी से बढ़ रहा है साफ पानी, जानिए कितना नुकसानदेह है ये

Arctic महासागर में तेजी से बढ़ रहा है साफ पानी, जानिए कितना नुकसानदेह है ये
आर्कटिक महासागर में साफ पानी का बढ़ना सीधे उत्तरी अटलांटिक और यूरोप को नुकसान पहुंचा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नए शोध में पता चला है कि आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean) में तेजी से साफ पानी (Freshwater) की मात्रा बढ़ रही है जिससे पर्यावरण (Envrionment) को बहुत नुकसान हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 7:09 PM IST
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर दुनिया में कई तरह के शोध (Research) हुए हैं और कई चल रहे हैं. अपने तरह के पहले शोध में वैज्ञानिकों यह जानने की कोशिश की है कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) के कारण बर्फ पिघलने (Ice melting) से आर्कटिक सागर (Arictic Ocean) के पानी (Water) पर क्या असर हो रहा है.

बढ़ रहा है आर्कटिक में साफ पानी
सीयू बोल्डर के शोधकर्ताओं ने दर्शाया है कि जलवायु परिवर्तन आर्कटिक महासागर में तेजी से साफ पानी की मात्रा बढ़ा रहा है. कुछ ही दशकों में यह बढ़ा हुआ साफ पानी अटलांटिक महासागर में मिलने लगेगा जिससे महासगारीय जलधाराओं पर बुरा असर दिखने लगेगा और उसका सीधा प्रभाव उत्तरी यूरोप का तापमान पर पड़ेगा.

साफ पानी के बढ़ने के असर पर अध्ययन
हाल ही में जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित इस शोध ने पिछले दो दशकों में आर्कटिक महासागर में बढ़ते साफ पानी के कारणों और भविष्य में पड़ने वाले उसके प्रभावों को समझने का प्रयास किया.



पहली बार हुआ है इस तरह का अध्ययन
एट्मॉस्फियरिक और ओशिनिक साइंस के पीएचडी छात्र और इस शोध के सह लेखिका रोरी लाइहो ने बताया, ”हमने आर्कटिक तापमान की वजह से इकोसिस्टम और जानवरों पर होने वाले असर और बदलाव के बारे में बहुत कुछ सुना है, लेकिन यह अध्ययन खास तौर पर यह बताता है कि वास्तव में महासागर को हो क्या रहा है और उससे महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

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इससे पहले जलवायु परिवर्तन पर बहुत अलग ही तरह के शोध हुए थे.


अमेरिका को तीन फुट नीचे डुबो सकता है ये पानी
साल 1990 के दशक से ही आर्कटिक महासागर में साफ पानी का दस प्रतिशत इजाफा हो रहा है.  यह दस हजार क्यूबिक किलोमीटर है. इतना पानी पूरे अमेरिका को तीन फुट पानी में डुबो देगा. महासागर में क्षारीयता हर जगह एक सी नहीं है. आर्कटिक महासागर की सतह का पानी पहले से ही दुनिया के महासागरों में सबसे साफ पानी है क्योंकि इसमें बहुत सारा पानी नदियों से आता है.

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कैसे प्रभावित होगा उत्तरी अटलांटिक महासागर
यही साफ पानी समुद्री बर्फ को बनाए रखता है. यह ठंडे पानी को सतह पर रखता है और घने तरस क  कम घरने गर्म पानी के नीचे डूबने नहीं देता. इस लिहाज से आर्कटिक महासागर दूसरे महासागरों से अलग है. लेकिन जैसे जैसे ज्यादा साफ पानी आर्कटिक में आ रहा है, इससे महासागरीय जलधाराओं की स्थायी प्रक्रिया खतरे में पड़ती जा रही है. यह सीधे उत्तरी अटलांटिक की जलधाराओं पर ऐसा असर करेगा जिससे यूरोप के सर्दियों के तापमान सीधो तौर पर प्रभावित होंगे.

पहले भी देखे गए हैं ऐसे बदलाव
इस तरह के व्यवधान पहले भी देखे गए हं जब 1970 और 1980 के दशक में ग्रेट सैलिनिटी एनामोली (great salinity anomalies) देखी गई थीं. लेकिन वे अस्थायी घटनाएं थीं. यदि बहुत सारा ठंडा साफ पानी आर्कटिक से उत्तरी अंटलांटिक में लगातार बहता रहा तो इससे स्थायी किस्म के बदालाव देखे जा सकते हैं.

Ocean
हर महासागर की क्षारीयता अलग है फिर भी आर्कटिक दूसरे महासागरों की तुलना में सबसे कम क्षारीय है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कुछ समय के लिए फायदा लेकिन फिर...
विडम्बना यह है कि इससे उत्तरी यूरोप में ग्लोबल वार्मिंग के हो रहे असर में कुछ समय के लिए कमी देखने को मिल सकती है. लेकिन इससे लंबे समय में जलवायु और उत्तरी अटलांटिक के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर बुरा असर पड़ना तय है.

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शोधकर्ताओं का लक्ष्य आर्कटिक में साफ पानी की मात्रा में विविधता और उसके जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में अंतर करना था.  उन्होंने उन इलाकों की भी पहचान की जहां से आर्कटिक का साफ पानी उत्तरी अटलांटिक महासागर में मिलता है जिसे इस बदलाव के प्रभाव की जगहों के बारे में पता चल सके.
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