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चीन के रुख के कारण ही दुनियाभर में महामारी बन रहा है कोरोना वायरस

News18Hindi
Updated: January 28, 2020, 11:15 AM IST
चीन के रुख के कारण ही दुनियाभर में महामारी बन रहा है कोरोना वायरस
चीन ने अगर समय रहते दुनिया को इस वायरस के बारे में बताया होता तो शायद ये इतना गंभीर नहीं बन पाता

दिसंबर के आखिरी हफ्ते में चीन में एक रहस्यमय बीमारी फैलने शुरू हुई. जर्मनी की एक लैब ने इस बीमारी का पता तो लगा लिया है लेकिन चीन से जापान और थाईलैंड गए दो लोगों में भी इस बीमारी के लक्षण पाए गए हैं. इसके बाद भारत ही नहीं दुनियाभर के देश अलर्ट हो गए हैं. जानते हैं क्या है ये बीमारी

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  • Last Updated: January 28, 2020, 11:15 AM IST
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चीन (China) से निकली रहस्यमय बीमारी (Unknown Disease) कोरोना वायरस दुनियाभर में तबाही मचाने लगा है. इससे 106 से ज्यादा लोग मर चुके हैं. हजारों लोग बीमार हैं. ये तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है. आशंका जताई जा रही है कि ये बीमारी बेकाबू होकर हाल के बरसों की सबसे बड़ी महामारी बन सकती है. इसकी वजह काफी हद तक चीन का रुख है.

अगर चीन ने एक महीने से कहीं ज्यादा समय तक इसे दुनिया से छिपाया नहीं होता तो ये हालत इतनी खराब नहीं होती. ये रिपोर्ट्स आ रही हैं कि चीन ने लगातार अपने यहां इस बीमारी और बीमार पड़े लोगों की तादाद को छिपाया. दुनिया के सामने इसे तब तक जाहिर नहीं किया जब तक कि इसने बड़ा रूप नहीं ले लिया. इस बीमारी का वायरस निमोनिया से मिलता जुलता है लेकिन उससे कहीं ज्यादा खतरनाक.

चीन करीब डेढ़ महीने तक दुनिया को बताता रहा कि वूहान प्रांत में एक बीमारी फैल रही है लेकिन ये मामूली और इससे मुश्किल से 40-50 लोग ही बीमार पड़े हैं. सभी का इलाज किया जा रहा है. कोई इससे नहीं मरा है. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि चीन ने शुरुआती दौर में दुनिया को इसकी गलत जानकारी दी. जब बीमारी चीन में बेकाबू हो गई, तब उसने इसके बारे में दुनिया और वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन (WHO) को बताया.

ये बीमारी चीन में दिसंबर में फैलनी शुरू हुई. तब चीन एकदम चुप था. एशिया में उसके पड़ोसियों को कतई अंदाज नहीं था कि चीन एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुका है. जानकारी नहीं होने की वजह से चीन से दूसरे देशों के लोगों का आना - जाना जारी रहा. इसमें कई लोग वायरस की चपेट में आकर लौटे. अब ये बीमारी पूरी दुनिया में फैल रही है. इसे भयावह बताया जा रहा है. अब बहुत तेजी से उसमें लोगों की जान जा रही है.

जनवरी के मध्य तक जब चीन के डॉक्टर और साइंटिस्ट इस बीमारी को पकड़ने में नाकाम हो गए, तब उन्होंने वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन और जर्मनी की जानी-मानी लैब के साइंटिस्ट की मदद ली. इसी समय उसने पहली बार दुनिया को बताया कि उसके यहां लोग एक वायरस से बीमार हो रहे हैं.

अगर उसने ये काम पहले किया होता तो एशियाई देश पहले अलर्ट हो जाते. बीमारी से रोकथाम के तरीके अपनाते. दुनियाभर की बड़ी लैब इसके बारे में ज्यादा सतर्क होकर इसके बारे में जानकारी जुटा लेतीं. अब तमाम देशों की सरकारें अलर्ट हुई हैं. उन्होंने एयरपोर्ट पर चीन से आने - जाने वालों की जांच के लिए कदम उठाए हैं. लेकिन सभी मान रहे हैं कि ये वायरस दुनियाभर में फैल चुका है.

अब भी चीन छिपा रहा है बीमारों की संख्या माना जा रहा है कि चीन अब भी अपने यहां कोरोना वायरस से ग्रस्त लोगों की संख्या के साथ मरने वालों की संख्या छिपा रहा है. जिस वायरस फैमिली को इस रहस्यमय बीमारी के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है, वो कोरोना वायरस है. जर्मनी की एक इंटरनेशनल लैब ने इस वायरस को नोवेल कोरोना वायरस का नाम दिया है. ये वायरस पहली बार चीन में ही विकसित हुआ है.

पहली बार उभरा है ये वायरस
जर्मनी की जिस लैब ने इस वायरस का पता लगाया, उसका नाम जर्मन सेंटर फॉर इंफेक्शन रिसर्च है. इस लैब की रिपोर्ट के अनुसार नोवोल कोरोना वायरस पहली बार चीन के वूहान में ही उभरा है. इससे गंभीर निमोनिया हो सकता है.

कोरोना वायरस की एक बड़ी फैमिली है. उसी फैमिली से विकसित हुआ ये वायरस पहली बार चीन के वूहान प्रांत में उभरा है


वूहान प्रांत से फैली ये बीमारी 
वैसे जनवरी के पहले हफ्ते में मध्य चीन के वूहान प्रांत से अपुष्ट खबरें आने लगीं थीं कि लोग अजीबोगरीब बीमारी के शिकार हो रहे हैं. तेज बुखार के साथ उन्हें लगातार खांसी आ रही है. बुखार उतर नहीं रहा. मरीजों को सांस में दिक्कत हो रही है. मरीजों की रेडियोग्राफी से पता चला कि ज्यादातर मरीजों के फेफड़े क्षतिग्रस्त हो चुके हैं.

चीन में सी-फूड मार्केट से फैली ये बीमारी 
चीन में ये बीमारी वूहान के एक सी-फूड मार्केट से फैली. अब बाजार को सेनिटाइज करके बंद किया जा चुका है. इस बाजार में काम करने वाले और यहां आने वाले इस वायरस की चपेट में आने वाले शुरुआती लोग थे.

चीन के वूहान प्रांत के इस सी-फूड मार्केट से ही इस वायरस के फैलने की खबरें आईं हैं. अब ये बंद कर दिया गया है


पहले तो समझ ही नहीं पाए चीन के डॉक्टर
शुरू में चीन में डॉक्टरों को लगा कि ये बीमारी कुछ और नहीं बल्कि सार्स फ्लू हो सकता है, जो वर्ष 2002 के पास पूरी दुनिया के कई देशों में जानलेवा बनकर उभरा था. इससे दुनियाभर में एक हजार के आसपास लोगों की मौत हुई थी. उस समय इस बीमारी ने चीन में भी दस्तक दी थी.
चीन के वैज्ञानिकों को लगा था कि ये बीमारी जानवरों या बर्ड्स से मनुष्यों में संक्रमित हो रही है लेकिन मानव से मानव में नहीं फैलेगी. वो इसे काबू में कर लेंगे  लेकिन जल्दी ही उनका भ्रम टूट गया. उन्हें ये महसूस हो गया कि अब ये बीमारी मानव से मानव में भी फैल रही है, लिहाजा ये स्थिति खतरनाक है. इसके बाद ही वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन को कहना पड़ा कि चीन की ये बीमारी उसके पड़ोसी देशों में पैर पसार सकती है. लिहाजा एशियाई देशों को सतर्क रहने की जरूरत है.

इस बीमारी के एक केस का थाईलैंड में होने का पता लगा है तो एक अन्य केस की पुष्टि जापान में भी हो चुकी है


क्या है ये रहस्यमय बीमारी
नोवोल कोरोना वायरस की लंबी चौड़ी फैमिली है. इस परिवार के कुछ वायरस लोगों को बीमार करते लेकिन कुछ जानवरों को अपना शिकार बनाते हैं और उनमें फैलते हैं . खासकर ऊंट, बिल्लियों और चमगादड़ों में. हालांकि जानवरों में फैलने वाला कोरोना वायरस और नया रूप धरकर मनुष्यों को शिकार बनाता रहा हो लेकिन अबकी बार माना जा रहा है जानवरों में रहने वाला ये वायरस नई तरीके से विकसित हुआ है और उसने मनुष्यों को चपेट में लेना शुरू कर दिया है.

क्या हैं इसके लक्षण 
लेकिन बाद में डॉक्टरों को महसूस होने लगा कि ये नई रहस्यमय बीमारी सार्स नहीं बल्कि कुछ और है. सार्स में तेज बुखार, खांसी, सिरदर्द, भारीपन और फ्लू बीमारी से होने वाली शिकायतें उभरती हैं. जो नई फैल रही बीमारी में पूरी तरह नहीं है.

भारत भी आ चुका है चपेट में
भारत भी इसकी चपेट में आ चुका है. दिल्ली की एक महिला के इस वायरस से ग्रस्त होने की खबर आई है. जापान, थाईलैंड में इस बीमारी के शिकार लोग पाए गए हैं.

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First published: January 21, 2020, 1:56 PM IST
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