जानिए चीन की खेती से क्या तीन अहम सबक सीख सकता है भारत

एक समय भारत (India) और चीन (China) की कृषि (Agriculture) की स्थिति बिलकुल एक ही जैसी थी, लेकिन चीन अब भारत से बहुत बेहतर स्थिति में आ गया है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एक समय भारत (India) और चीन (China) की कृषि (Agriculture) की स्थिति बिलकुल एक ही जैसी थी, लेकिन चीन अब भारत से बहुत बेहतर स्थिति में आ गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 6:07 PM IST
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इस समय भारत (India) और चीन (China) के बीच संघर्ष की स्थिति चल रही है. जहां सीमा विवादों ने दोनों के बीच एक अभूतपूर्व तनाव पैदा कर दिया है. दोनों देशों के बीच विकास को लेकर काफी तुलनात्मक स्थिति भी रही है. लेकिन आज अर्थव्यवस्था (Economy) के मामले में चीन भारत से कई मायनों में आगे हैं. दोनों ही देश कृषि (Agriculture) प्रधान देश हैं. दोनों ही दुनिया के सबसे ज्यादा जनसंख्या (Population) वाले देश हैं. फिर भी चीन कृषि मामले में भारत से बहुत आगे हो गया है. ऐसे में हम चीन से तीन सबक सीख सकते हैं.

एक से हालात और चुनौतियां
दोनों ने 1960 के दशक में उच्च उत्पादक बीजों को अपनाया था. दोनों ही देशों ने उसी दौरान सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि की और अपनी सीमित कृषि भूमि से ज्यादा खाद्य उत्पादन के लिए  रासायनिक खादों का उपयोग भी शुरू किया. जहां भारत की जनसंख्या 2018 के आंकडों के मुताबिक करीब 1.35 अरब है तो वहीं चीन की जनसंख्या 1.39 अरब है.  जीन की सिंचाई योग्य भूमी 12 करोड़ हेक्टेयर है तो भारत की 15.6 करोड़ हेक्टेयर है. इस लिहाज से देखा जाए तो दोनों ही देशों के सामने खाद्य आदिकी पैदावार को लेकर एक सी चुनौतियां दिखाई देती है.

कृषि में यह अंतर आ गया
चीन का सिंचित क्षेत्र अपने कृषि क्षेत्र का केवल 41 प्रतिशत है तो भारत का 48 प्रतिशत. चीन का बुआई का इलाका 16.6 करोड़ हेक्टेयर है तो वहीं भारत के 19.8 करोड़ हेक्टेयर.  इसके बाद भी चीन ने अपना कृषि उत्पाद 1.367 अरब डालर तक पहुंचा दिया है जो कि भारत के उत्पादन 407 अरब डॉलर से तीन गुना है.



क्या सीखा जा सकता है चीन से
ऐसे में सवाल यह उठता है कि चीन ने यह कैसे संभव किया और क्या इसमें भारत के लिए कोई सबक हैं या नहीं. फाइनेशियल एक्सप्रेस के अनुसार इससे भारत चीन की बराबरी करने या फिर उससे आगे निकलने के लिये तीन अहम सबक सीख सकता है.

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कृषि सुधारों (Agriculture Reforms) के मामले में चीन (China) भारत (India) से बेहतर साबित हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पहला सबक निवेश में
पहला चीन कृषि ज्ञान और उससे संबंधित इनोवेशन सिस्टम में  जिसे AKIS कहते हैं, पर बहुत अधिक निवेश करता है जिसमें कृषि शोध में किया गया निवेश शामिल है. साल 2018-19 में चीन ने इस क्षेत्र में भारत से 5.6 गुना ज्यादा निवेश किया है. एक शोध के मुताबिक कृषि शोध पर हुए निवेश का कृषिजीडीपी वृद्धि पर सीधा और सबसे ज्यादा असर होता है.

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शोध में निवेश जरूरी
बेहतर बीज हमेशा ही ज्यादा उर्वरक में निवेश मांगते हैं. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार चीन का साल2016 में खाद में निवेश 503 किलो प्रति हेक्टेयर रहा तो वहीं भारत का 166 किलो प्रति हेक्टेयर था. इसीलिए कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए कि चीन का फसलोत्पादन 50 से सौ प्रतिशत अधिक रहा होगा. ऐसे में कृषि शोध पर निवेश बढ़ाना एक बहुत जरूरी कदम है.

किसानों को मिलने वाली सुविधाएं
दूसरी अहम बात है किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन सुविधाएं. इसे प्रोड्यूसर सपोर्ट एस्टीमेट्स यानि PSE से नापा जाता है. चीनी किसानों को मिलने वाला प्रोत्साहन भारतीय किसानों से बहुत बेहतर है. साल 2018-19 में चीनी किसानों को यह भारतीय किसानों की तुलना में तीन गुना से कुछ ही कम मिला था. इसका मतलब यह हुआ कि तमाम समर्थनों के बावजूद किसानों को अंतिम लाभ जो मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा है. सही कीमतें नहीं मिलना इसमें सबसे बड़ी समस्या है. इसके लिए व्यापक कृषि बाजार सुधारों की जरूरत है.

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चीन (China) ने कृषि (Agriculture) में बेहतर निवेश (Investment), किसानों का प्रोत्साहन और सीधा लाभ पहुंचाने के मामले में बेहतर स्थिति दिखाई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


सीधा लाभ कैसे
तीसरा सबक सीधी आय योजनाओं से संबंधित है. चीन ने अपनी सभी योजनाओं को एकीकृत कर एक योजना में बदल दिया है जिससे किसानों को प्रति हेक्टेयर के आधार पर भुगतान होता है. इससे वहां किसानों को अपने पसंद की फसल उगाने की आजादी मिलती है. जहां भारत ने 3 अरब डॉलर इस तरह की सीधी योजनाओं में लगाए हैं तो वहीं 27 अरब डालर का सब्सिडी निवेश किया है जिसका किसानों को सीधा फायदा नहीं मिल सका.

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भारत चीन से ये खास तीन सबक सीख सकता है. जिससे दोनों देशों में जो अंतर आ गया है वह कम हो सके, जबकि हालात और चुनौतियां दोनों ही देशों की लंबे समय तक एक सी ही रही हैं.
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