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चीन के हर दुश्मन देश के पास होंगे भारत में बने अस्त्र-शस्त्र

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 28, 2019, 12:09 PM IST

पिछले तीन सालों में भारत के डिफेंस सेक्टर ने तेजी से छलांग लगाई है. उसकी बढ़ती ताकत को अब दुनियाभर में महसूस किया जाने लगा है.

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दक्षिण चीन सागर में चीन का कट्टर दुश्मन वियतनाम हथियारों की बड़ी खरीद कर रहा है. ये हथियार वो भारत से खरीद रहा है. भारत में बनी ब्रह्मोस मिसाइलें उसकी बड़ी खरीद में शामिल हैं. इसी तरह से कुछ देशों ने आकाश मिसाइलों, तेजस लड़ाकू विमानों के साथ ध्रुव हेलीकॉप्टर्स में दिलचस्पी दिखाई है. भारत अपने हथियारों को उन देशों में बेचने में दिलचस्पी दिखा रहा है, जो चीन के दुश्मन देश हैं और उन्हें ऐसे हथियार चाहिए, जो उनकी पॉकेट में खरीदे जा सकें.

हाल ही वियतनाम ने भारत के साथ 500 मिलियन डॉलर का रक्षा खरीद समझौता किया है. यानी वियतनाम भारत से ब्रह्मोस मिसाइल समेत डिफेंस से जुड़े कई साजो-सामान खरीदने जा रहा है. इसी तरह बांग्लादेश से भी भारत को रक्षा क्षेत्र में इतना ही बड़ा आर्डर हासिल हुआ है. भारत की नजर चीन के उन पड़ोसियों पर है, जिनसे पिछले कई सालों से चीन का विवाद चल रहा है.

भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में बहुत तेजी से अब कई साजो-सामान और हथियार जुड़ चुके हैं. कई इंटरनेशनल डिफेंस एक्सपो में इन्हें वाह-वाही भी हासिल हो चुकी है. भारत लगातार कई सालों से जिस तरह उन्नत मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है और उन्हें तैयार कर रहा है, उससे वो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिसाइलों के लिए भरोसमंद खिलाड़ी बनकर उभरा है.

क्या खरीदा जा रहा है 

इसी तरह भारत के बनाए हल्के लड़ाकू विमान तेजस की रिपोर्ट भी पिछले कुछ सालों में अच्छी रही है. इसे काफी उपयोगी माना गया है. भारत बड़े पैमाने पर अगर साजो-सामान बनाता है तो उसकी आर्डिनेंस फैक्ट्रियों में बने गोला-बारूद और अन्य साजो-सामान भी विदेशी बाजार में बड़े पैमाने पर खरीदे जाते रहे हैं.

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल्स में कई देश दिलचस्पी ले रहे हैं. वियतनाम ने इसे खरीदने का बड़ा आर्डर भी दिया है


कौन हैं चीन के दुश्मन देशहाल के बरसों में अगर एशिया में अपने हथियारों की बिक्री के लिए भारत को बड़ी संभावनाएं दिख रही है. चीन के साथ दक्षिण चीन सागर में वियतनाम, फिलिपींस, मलेशिया, ब्रूनेई और ताइवान ऐसे देश हैं, जिनसे भारत के संबंध हमेशा से अच्छे रहे हैं. वहीं इन देशों के साथ चीन के पिछले कई सालों से सीमा संबंधी विवाद जारी हैं.

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भारत बन चुका है इनका भरोसेमंद देश 
चीन से ये देश हमेशा असुरक्षा महसूस करते हैं. बेशक इन देशों का रक्षा बजट बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन उन्हें हल्के फुल्के साजो-सामान और अपने बजट में आने वाले हथियारों, गोला-बारूद की हमेशा जरूरत रहती है. भारत ने पिछले कुछ सालों में हथियारों के बाजार में एक भरोसेमंद देश की इमेज बनाई है. एशिया के इन देशों से भारत के अच्छे संबंध और अपेक्षाकृत सस्ते हथियार लगातार उसके निर्यात को बढ़ा रहे हैं.

भारत की आकाश मिसाइल्स की भी अच्छी रिपोर्ट है


बदल जाएगी डिफेंस एक्सपोर्ट की तस्वीर 
भारत ने जिन डिफेंस हथियारों और साजो-सामान को विदेशों में बेचा है, उसमें ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल, तेजस फाइटर, इंसास राइफल, गोला-बारूद, समुद्र में टोही नौकाएं आदि शामिल हैं. अब माना जा रहा है कि अगले पांच सालों में भारत डिफेंस एक्सपोर्ट की पूरी तस्वीर को ही तेजी के साथ बदलने जा रहा है. इसमें फाइटर्स से लेकर मिसाइल और अन्य डिफेंस सिस्टम शामिल हैं.

टॉप 100 में भारत की चार कंपनियां 
वर्ष 2017 में स्टाकहोम के थिंकटैंक सिपरी ने दुनिया की 100 बड़ी रक्षा उत्पादक कंपनियों के कारोबार की लिस्ट बनाई थी. उसमें भारत की भी चार कंपनियां शामिल हैं. ये चार कंपनियां इंडियन आर्डिनेंस फैक्ट्री, हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारत डायनामिक्स शामिल हैं.

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डिफेंस एक्सपोर्ट दोगुना हुआ
इसी साल जनवरी में देश के डिफेंस प्रोडक्शन सेक्रेटरी अजय कुमार ने कहा, खत्म हो रहे वित्तीय वर्ष में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट दोगुना होकर 10 हजार करोड़ होने की उम्मीद है.

हल्के लड़ाकू विमान तेजस को लेकर भी कई देश दिलचस्पी ले रहे हैं


वाइब्रेंट गुजरात से जुड़े एक सेमिनार में उन्होंने बताया कि भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री ने पिछले तीन सालों में अपने कारोबार को दोगुना कर लिया है. उन्होंने कहा कि सरकार के सुधारों और प्राइवेट कंपनियों के डिफेंस सेक्टर में आने को हरी झंडी देने से भी तस्वीर बहुत तेजी से बदल रही है.

जिन देशों में भारत से डिफेंस एक्सपोर्ट हो रहा है, उसमें वियतनाम, भूटान, स्वाजीलैंड, ओमान, नेपाल, श्रीलंका, तंजानिया, इथियोपिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, म्यांमार और तमाम देश शामिल हैं.

बड़ा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग हब बनेगा 
इसमें कोई शक नहीं है कि चीन हाल के बरसों में हथियारों के बाजार में एक बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है. उसने ना केवल डिफेंस सेक्टर में अपनी संरचना को बेहतर किया है बल्कि आरएंडडी पर खास ध्यान दिया है. इसके चलते चीन अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी के बाद पांचवां बड़ा निर्यातक बन गया है.

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माना जा रहा है कि भारत आने वाले सालों में छठे नंबर पर जगह बना सकता है. जिस तरह प्राइवेट सेक्टर में दुनिया के बड़े आर्म प्रोड्यूसर्स भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग कर देश में अपनी संरचना बनाने जा रहे हैं, उससे कोई शक नहीं कि अपना देश खासे बड़े डिफेंस एक्सपोर्ट हब के रूप में जगह बना सकेगा.

जिन हथियारों और रक्षा सामानों का निर्यात हो रहा है
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश मिसाइल, तेजस फाइटर जेट, ध्रुव हेलीकॉप्टर, चेतक हेलीकॉप्टर, एसआरएस (सेल्फ लोडिंग राइफल्स), ग्रेनेड, बख्तरबंद वाहन और अन्य तरह के वाहन, सैन्य संचार उपकरण, समुद्र टोही जहाज और नौकाएं और अन्य सैन्य साजो-सामान.

टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों दशकों से भारतीय सेना के लिए साजो-सामान तैयार करती रही हैं लेकिन अब विदेश की बड़ी कंपनियों से हाथ मिलाकर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए नई योजनाए बनाई हुई हैं


प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां
देश की सात बड़ी प्राइवेट कंपनियां विदेश के बड़े रक्षा उत्पादकों के सहयोग से देश में ही संयुक्त रक्षा उपक्रम लगाने का काम कर रही हैं.

टाटा ग्रुप- वैसे टाटा कई दशकों ने भारतीय सेना के लिए वाहन और मिसाइल लांचर वाहन बनाता रहा है लेकिन अब टाटा एयरबस और लॉकहीड जैसी कंपनियों के साथ मिलकर इंडियन एयर फोर्स के लिए लड़ाकू से लेकर मालवाहक विमान बनाने जा रहा है.

महिंद्रा ग्रुप- महिंद्रा भी भारतीय सेना के लिए ट्रक, बख्तरबंद वाहन और दूसरे उपकरण बनाते रहे हैं. अब ग्रुप ने डिफेंस डिविजन में खासतौर पर दो नए वर्टिकल बनाए हैं. इसमें अंडरवाटर सिस्टम और रडार हैं.

हीरो ग्रुप-हीरो ग्रुप डिफेंस इंडस्ट्री में पैर रख रहा है. खासकर नौसेना के सैन्य सिस्टम और साजोसामनान को लेकर उसकी अपनी योजनाएं हैं.

रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप- कंपनी ने डिफेंस और एयरोस्पेस में कई विदेशी कंपनियों के साथ गठजोड़ किया है. कंपनी की डिफेंस स्मार्ट सिटी बनाने की भी योजना है.

इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत फोर्ज और हिंदूजा ग्रुप भी डिफेंस सेक्टर में उतरने की योजना पर काम कर रहे हैं.

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First published: May 27, 2019, 8:55 PM IST
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