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PAK की बढ़ी मुश्किल, सऊदी और यूएई के बाद बहरीन भी बना भारत का दोस्त

पाकिस्तान अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ छोड़ने से कूटनीतिक तौर पर काफी अकेला पड़ जाएगा- सांकेतिक फोटो ( news18)
पाकिस्तान अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ छोड़ने से कूटनीतिक तौर पर काफी अकेला पड़ जाएगा- सांकेतिक फोटो ( news18)

सऊदी अरब और यूएई के बाद अब बहरीन के साथ भी भारत के कई अहम करार (India important deal with Bahrain after Saudi and UAE) हो रहे हैं. ये दोस्ती पाकिस्तान के लिए मुसीबत बन सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 11:57 AM IST
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मिडिल ईस्ट के बदलते राजनैतिक समीकरण के बीच भारत को भी नए दोस्त मिले हैं. यूएई और सऊदी अरब के बाद अब बहरीन भी देश की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा चुका है. अरब का अकेला यहूदी इजरायल पहले से ही भारत का दोस्त रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि पाकिस्तान अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ छोड़ने से कूटनीतिक तौर पर काफी अकेला पड़ जाएगा.

हाल ही में भारत और बहरीन के बीच कई समझौतों पर बात हुई है. इसमें रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे बेहद अहम और संवेदनशील मुद्दे भी शामिल हैं. इसकी शुरुआत के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बहरीन की यात्रा की. कोरोना के दौर में इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है.

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इस दौरान दोनों देशों ने कई मुद्दों पर बात की. इसमें रक्षा में द्विपक्षीय सहयोग की बात हुई. साथ ही साथ तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, हेल्थ और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भी साथ काम करने पर दोनों देश सहमत हुए. कोरोना के दौर में जहां देश एक-दूसरे के लिए सीमाएं बंद कर चुके हैं, वहीं बहरीन और भारत के बीच एयर बबल करार हुआ है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ी घनिष्ठता बताया है.
हाल ही में भारत और बहरीन के बीच कई समझौतों पर बात हुई -सांकेतिक फोटो (needpix)


वैसे भारत और बहरीन के बीच मित्रता के पक्का होने की शुरुआत साल 2019 से ही हो गई थी. तब भारत ने बहरीन की राजधानी मनामा में श्री कृष्ण मंदिर के पुनर्विकास के लिये 4.2 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट शुरू किया. ये मंदिर दो सौ साल पुराना है और दोनों देशों के बीच पुल का काम करता आया है.

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भारत और बहरीन के बीच सबसे बड़ा करार स्पेस को लेकर हुआ है. भारत का इसरो और बहरीन का नेशनल स्पेस साइंस एजेंसी ने कई प्रोजेक्ट में साथ में काम का फैसला लिया. इस तरह से दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होता दिख रहा है. बहरीन के अलावा मध्य पूर्व के सऊदी और यूएई भी भारत के साथ आ मिले हैं.

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इसके साथ ही सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्ते भी बदलते दिख रहे हैं. दोनों देश लंबे वक्त से दोस्ती निभा रहे थे. सऊदी कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आता था. अब वो एकदम से साथ छोड़ता दिख रहा है. उसने इस्लामाबाद को कच्चे तेल की सप्लाई और लोन पर रोक लगा दी. कश्मीर मुद्दे पर भी वो कुछ कहने से बच रहा है.

कैसे थे पाक और सऊदी के रिश्ते
वैसे सऊदी और पाक का रिश्ता कई दशक पुराना है. साल 1971 में भारत-पाक लड़ाई के दौरान सऊदी ने पाकिस्तान के समर्थन में काफी सारे बयान दिए थे और भारत को नीचा दिखाने की कोशिश की थी. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक तब रियाद ने पाकिस्तान को हथियारों और 75 एय्रक्राफ्ट की आपूर्ति भी की थी.

पाक की तुलना में भारत के साथ यूएई के रिश्ते काफी बेहतर हुए- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


दिख रहा बदलाव
कश्मीर मुद्दे पर सऊदी की अगुवाई में कई इस्लामिक देश भारत को घेरने की कोशिश करते रहे. वे पाक के पक्ष में बातें करते रहे और मुद्दे को इंटरनेशनल मंच पर भी उठाने की कोशिश की. हालांकि पिछले एक दशक में इस ट्रेंड में काफी बदलाव आया है. तुर्की और मलेशिया जैसे इस्लामिक देश जरूर अब भी कश्मीर पर पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं लेकिन सऊदी अब इसे भारत का आंतरिक मुद्दा कहने लगा है. ये भारत की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

पिछले कुछ समय में पाक की तुलना में भारत के साथ सऊदी और यूएई के रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं. भारत के साथ दोस्ती के बीच एक अलग बात ये भी हो रही है कि मिडिल ईस्ट के देश एक के बाद एक लगातार इजरायल के भी साथ आ रहे हैं. ये वही इजरायल है, जिसे दशकभर पहले मुस्लिम देश खत्म करने की धमकियां देते रहे थे. माना जा रहा है कि इससे दुनिया में बड़ा फेरबदल हो सकता है.

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ये भारत के लिए व्यापारिक तौर पर भी फायदेमंद होगा, क्योंकि इससे कच्चा तेल कम कीमत पर देश को मिलने की संभावना बढ़ जाएगी. बता दें कि सऊदी कच्चे तेल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है. फिलहाल सऊदी से पाक की जो दूरियां सामने आ रही हैं, उसमें पाकिस्तान में अरब देशों से आतंकी गतिविधियों के लिए मिलने वाली सहायता बंद हो जाएगी. इससे भारत में पाकिस्तान का फैलाया आतंकवाद कमजोर पड़ सकता है. दूसरी ओर ईरान में चीन का दखल होने के कारण वहां भले ही भारत का व्यावसाय कमजोर हो जाए लेकिन यूएई और सऊदी में पैर जमाने के बेहतर मौके आ सकते हैं.

हालात यहां तक जा चुके कि पाकिस्तान ईरान और तुर्की के साथ मिलकर एक गैर-अरब अलायंस बनाने की बात करने लगा है ताकि कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ बोल सके. हालांकि इसमें भी चीन के अलावा शायद ही कोई साथ आए.
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