हमारे देश में संसद को बड़ा करने की बात लेकिन कई देशों में इसे छोटा करने की पहल

इटली में एक जनमत संग्रह चल रहा है. इसके बाद यहां की संसद में सदस्यों की संख्या काफी कम हो जाएगी.
इटली में एक जनमत संग्रह चल रहा है. इसके बाद यहां की संसद में सदस्यों की संख्या काफी कम हो जाएगी.

भारत में जिस नए संसद भवन के निर्माण (construction news parliament building ) का काम शुरू होना है, उसे ज्यादा सदस्य क्षमता(Increase member strength) के अनुसार बनाया जाएगा जबकि दुनिया के कई देशों में अब संसद को छोटा करने और सांसदों की संख्या में कमी करने की बात हो रही है. इटली (Italy) में तो इसी बात पर रायशुमारी हो रही है

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 5:40 PM IST
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हमारे देश में नए और बड़े संसद भवन के लिए निर्माण का काम जल्दी ही शुरू हो जाएगा. जिसे ज्यादा सदस्य क्षमता के हिसाब से बनाया जाएगा. तब संसद के दोनों सदनों में एक साथ 1400 सदस्य बैठ सकेंगे. हमारे देश में ये भी माना जा रहा है कि आने वाले सालों में संसद की कार्यक्षमता बेहतर करने के लिए सांसदों की संख्या जनसंख्या के अनुुपात में बढ़ा देनी चाहिए लेकिन दुनिया के कई देशों में संसद को छोटा करने की आवाज उठ रही है बल्कि कुछ देशों ने तो इसे अमल में लाने का काम भी शुरू कर दिया है.

इटली में संसद के आकार में कटौती के लिए तक पहुंच गया है. वहां मतदाताओं से इस बारे में राय ली जा रही है. जर्मनी में भी ऐसा ही हो रहा है. ब्रिटेन और फ्रांस में भी संसद को छोटा करने और सदस्यों की संख्या कम करने की मांग होती रही है. 27 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूरोपीय यूनियन की संसद भी छोटी की जा रही है. उसके सदस्यों की संख्या घट रही है.

इटली के संसद के भी दो सदन है. प्रतिनिधि सभा में 630 सदस्य हैं और ऊपरी सदन सीनेट में 315 सदस्य. यहां पिछले कुछ सालों से संसद को छोटा करने की मांग होती रही है. अब उस पर रायशुमारी हो रही है. जर्मनी में भी संसद को छोटा करने पर बहस हो रही है. हालांकि वहां की समस्या दूसरी है.



हाल के बरसों में ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी ने लगातार हाउस ऑफ कामंस में 50 सीटें कम कर देने की मांग की है. फ्रांस के राष्ट्रपति एनामुएल मैक्रों तो कह चुके हैं कि वो चाहते हैं कि उनके देश की संसद को तिहाई तक छोटा कर दिया जाए.
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इटली में संसद का आकार कम करने पर वोटिंग 
इटली में इस समय समाजवादी पार्टी पीडी और पॉपुलिस्ट पांच सितारा पार्टी की गठबंधन सरकार है. संसद को छोटा और प्रभावकारी बनाना पांच सितारा पार्टी की मांग रही है.

italy
इटली में अगर लोगों ने जनमतसंग्रह में संसद का आकार कम करने के पक्ष में वोट दिया तो इसकी क्षमता घटकर एक तिहाई हो जाएगी.


2019 में पीडी और पांच सितारा पार्टी के गठबंधन ने सिर्फ संसद के आकार में एक तिहाई की कमी का प्रस्ताव दिया. यह प्रस्ताव कुछ दूसरी प्रमुख पार्टियों के समर्थन से पास हो गया. इस प्रस्ताव के जरिए प्रति 100,000 निवासियों पर सांसदों की संख्या 1.6 से घटाकर 1 कर दी गई. जर्मनी में ये अनुपात 0.9, फ्रांस में 1.4 और ब्रिटेन में 2.1 है. अब इटली के मतदाता जनमत संग्रह के माध्यम से अपनी राय जाहिर कर रहे हैं.

काफी कम हो जाएंगे इटली में संसद सदस्य
जिस विधेयक पर फैसला हो रहा है, उसमें प्रतिनिधि सभा के सदस्यों की संख्या 630 के बदले 400 और सीनेट की सदस्य संख्या 315 से 200 करने का प्रस्ताव है. प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि इससे संसद के काम में बेहतरी होगी. धन की बचत भी होगी.

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पांच सितारा पार्टी का कहना है कि अगले दस साल में संसद को छोटा करने से 1 अरब यूरो की बचत होगी यानि हर साल करीब 10 करोड़ यूरो. प्रस्ताव के विरोधियों का मानना है कि बचत तो होगी लेकिन 10 करोड़ यूरो नहीं बल्कि अधिकतम 5 करोड़ यूरो.

germany parliament
जर्मनी में संसद के लिए सीधे चुनकर आने वाले सदस्यों की संख्या तो तय है लेकिन यहां जीती गई पार्टी और अन्य पार्टी के सदस्य आनुपातिक तौर पर भी रखे जाते हैं, जिसकी संख्या लगातार बढ़ रही है.


जर्मनी में भी चल रही है बहस
जर्मनी में भी संसद को छोटा करने पर बहस हो रही है. लेकिन जर्मनी की समस्या दूसरी है. संसद की सीटें तो तय हैं. 299 सदस्यों का चुनाव भारत की तरह चुनाव क्षेत्रों में सीधे मतदान से होता है. इतनी ही सीटें पार्टियों को मिलने वाले दूसरे वोट से तय होती है, संसद की संरचना दूसरे वोट में पार्टियों को मिले प्रतिशत पर निर्भर करती है.

चुनाव को प्रतिनिधित्व वाला बनाने के लिए यहां सीधे जीती गई सीटों के अलावा अतिरिक्त सीटें देने का प्रावधान है. लेकिन पिछले सालों में नई पार्टियों के आने से अतिरिक्त सीटों की संख्या बढ़ती गई है. इस समय जर्मन संसद में 598 के बदले 709 सीटें हैं.

house of commons
ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी लंबे समय से मांग करती आ रही है कि हाउस ऑफ कामंस में सदस्यों की संख्या में 50 की कटौती कर दी जाए.


ये है जर्मनी की असल समस्या 
चुनाव की इस प्रक्रिया की दिक्कत ये है कि मतदान से पहले किसी को पता नहीं होता कि संसद के कुल कितने सदस्य होंगे. ये सब देश के हर प्रांत में भाग लेने वाली पार्टियों, उन्हें मिलने वाले वोटों और उस राज्य में सीधे जीतने वाले सीटों पर निर्भर करता है.

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यहां हर संसद के चुने जाने के साथ न सिर्फ खर्च बढ़ जाता है बल्कि नए सांसदों के लिए दफ्तर, सहायक कर्मी और सुरक्षा जैसी पूरी व्यवस्था करने का बोझ भी होता है.
यही अतिरिक्त सीटें कई बार ये तय करती हैं कि सरकार किस पार्टी की बनेगी, इसलिए राजनीतिक दलों का इसे बदलने पर सहमत होना आसान नहीं है.

भारत में माना जा रहा है बढ़ने चाहिए संसद सदस्य
भारत में माना जा रहा है कि जिस तरह हमारी जनसंख्या बढ़ रही है, उस हिसाब से जनसंख्या और जनप्रतिनिधियों का अनुपात बदलना चाहिए. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तो अपने भाषण में भी संसद में लोकसभा सदस्यों की संख्या दोगुनी करने की बात कही थी. कुछ और रिपोर्ट्स में भी ऐसे सुझाव दिए गए हैं. दिल्ली में जिस नए संसद भवन के लिए निर्माण का काम शुरू हो रहा है, उसमें पहले से ही इसी के मद्देनजर बढ़ी सदस्य क्षमता के अनुसार इसका निर्माण किया जा रहा है.
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