भारत बांट रहा है जमकर पेटेंट लेकिन बड़ा हिस्‍सा ले जा रहे हैं विदेशी

भारत ने दिए पिछले से सालों ज्यादा पेटेंट्स लेकिन ज्यादातर ले गए विदेशी.

News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 7:54 PM IST
भारत बांट रहा है जमकर पेटेंट लेकिन बड़ा हिस्‍सा ले जा रहे हैं विदेशी
वर्ल्ड इन्टलेक्चूअल प्रोपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत के पेटेंट्स ऑफिस साल दर साल पहले से ज्यादा बिजी हो रहे हैं.
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Updated: December 5, 2018, 7:54 PM IST
वर्ल्ड इन्टलेक्चूअल प्रोपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत के पेटेंट्स ऑफिस साल दर साल पहले से ज्यादा बिजी हो रहे हैं. 2016 के आंकड़ों की तुलना में देश में 2017 में 50 फीसदी के करीब ज्यादा पेटेंट्स बढ़े. ऐसा क्यों हुआ, ये सब जानने से पहले जानिए क्या है पेटेंट.

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पेटेंट उस कानूनी अधिकार को कहते हैं, जिसे मिलने के बाद किसी उत्पाद को खोजने या बनाने वाला व्यक्ति या संस्था उसे बनाने का एकाधिकार प्राप्त करती है. विश्व व्यापार संगठन के मुताबिक, वर्तमान में पेटेंट लागू रहने की अवधि  20 साल है. ये अवधि पहले हर देश में अलग-अलग थी.

WIPO की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पेटेंट दफ्टर ने 2017 में 12,387 पेटेंट्स प्रदान किए. जबकि 2016 में सिर्फ 8,248 दिए थे. वहीं 2015 में जो पेटेंट्स दिए गए, वे महज 6,022 ही थे. आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में 2017 में 1.4 मिलियन (14 लाख) पेटेंट्स दिए गए. पेटेंट्स प्रदान करने की भारत की दर साल-दर-साल तेजी से बढ़ रही है.

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भारत की तरफ से पेटेंट्स प्रदान करने में पिछले कई सालों में भारत की आलोचना भी हुई. आलोचना इसीलिए हुई थी कि देश में पेंडिंग पेटेंट्स एप्लीकेशन बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं.

क्यों हुई वृद्धि
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पेटेंट्स में वृद्धि कई कारणों से हुई, जिसमें से एक ये भी है कि साल 2016 में, WIPO ने पेटेंट राइट्स पॉलिसी में कुछ बदलाव किए थे. जिसमें पेटेंट लेने का प्रोसेस पहले की तुलना में आसान हो गया था.



पेटेंट्स में बेशक वृद्धि हुई है, लेकिन भारतीयों के काम करने के बावजूद इसमें से ज्यादातर पेटेंट्स पर विदेशियों ने हक जमाया. 2016 में 1,115 और 2015 में 822 पेटेंट्स विदेशियों को गए.

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पेटेंट की मांग और ग्लोबल इक्नोमिक ग्रोथ
इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी (IP) की मांग ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ से भी तेज है. ये बात WIPO के डायरेक्टर जनरल ने जेनेवा में रिलीज हुई रिपोर्ट के आधार पर कही. 2017 में प्रदान किए गए 12,387 में 1,712 भारतीयों को जबकि 10, 675 विदेशियों को गए हैं. ऐसा ही अनुपात पिछले सालों में रहा.



पेटेंट्स देने में सबसे आगे चीन
दुनियाभर में प्रदान किए गए पेटेंट्स में चीन ने 4 लाख 20 हजार 144 (420,144) पेटेंट दिए. वहीं यूएस ने 318, 829 पेटेंट दिए. पिछले कुछ दशकों में चीन के पास इतनी पेटेंट्स एप्लीकेशन आईं कि चीन को IP लीडर कहा गया.

पिछले साल चीन को 1.38 मिलियन पेटेंट एप्लीकेशन मिले. जबकि यूएस को चीन से लगभग दोगुनी एप्लीकेशन मिलीं. जिनकी संख्या 606, 956 थी.

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भारत ने यूएस से, और यूएस ने भारत से मांगे पेटेंट्स
भारत को पिछले साल 46, 582 एप्लीकेशन मिलीं. जिसमें से 14,961 भारतीयों की तरफ से थीं और 31, 621 विदेशियों की तरफ से थी. विदेशियों की ओर से प्राप्त एप्लीकेशंस में 9,222 यूएस की ओर से थी. वहीं यूएस में पिछले साल आई 606, 956 पेटेंट एप्लीकेशन में से 10, 309 भारतीयों की ओर से थीं.

WIPO के डायरेक्टर जनरल फ्रांसिस गरी ने कहा कि हर साल रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क में होती बढ़त भी उद्यमियों में होती बढ़त को दर्शाती है. भारत में पिछले साल 10, 188 डिजाइन्स के रजिस्ट्रेशन हुआ, जिसमें से 6,622 घरेलू (भारतीय) थे और 3,566 विदेशियों की ओर से थे.

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