चीन और पाक की बैठक में कैसे केंद्र में रहेगा भारत?

चीन और पाक की बैठक में कैसे केंद्र में रहेगा भारत?
चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्री ऐसे समय बैठक कर रहे हैं जब दोनों का भारत केसाथ तनाव चरम पर है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीन (China) के हैनान प्रांत में चीन-पाकिस्तान (China-Pakistan) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत (India) की चर्चा छाए रहने की उम्मीद है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 21, 2020, 6:42 PM IST
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इस समय चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) के विदेश मंत्रियों (Foreign Minsters) की दक्षिण चीन के हैनान (Hainan) प्रांत में बैठक हो रही है. दोनों देशों के बातचीत के मुद्दों में भारत (India) के केंद्र में रहने की संभावना है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी के बीच बातचीत चल रही है. इस समय भारत के पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ ही संबंधो में बहुत अधिक तनाव है. इस कारण यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

पहली बार ऐसे हालातों में मुलाकात
कुरैशी की यह चीन यात्रा कूटनितिक लिहाज से बहुत अहम मानी जा रही है. इसें कोविड-19 महामारी के अलावा भारत के मुद्दे भी चर्चा में रहने की उम्मीद की जा रही है. ऐसा इसलिए समझा जा रहा है क्योंकि इस समय चीन और पाकिस्तान दोनों के ही भारत से तनावपूर्ण संबंध हैं, चीन जहां लद्दाख में भारतीय सीमा पर भारत से उलझा हुआ है तो वहीं पाकिस्तान भारत के कश्मीर में धारा 370 को हटाने को लेकर भारत से नाराज है.

क्या कहना है चीनी विदेश मंत्रालय का
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान अपने मंत्रालय की नियमित वार्ता में कहा, “इस समय दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्तर पर बातचीत बहुत अहम है. इस मौके पर दोनों देश कोविड-19 महामारी के खिलाफ सहयोग, द्विपक्षीय संबंध और अन्य क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में दोनों देशों में आपसी हितों  की चर्चा करेंगे.”



डेढ़ साल बाद हो रही है ऐसी बैठक
झाओ ने जोर देकर कहा कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास , व्यवहारिक सहयोग और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मसलों पर नजदीकी समन्वय को बढ़ावा देगी. इससे पहले दोनों देशों के बीच विदेश मंत्री स्तर पर बातचीत पिछले साल मार्च में हुई थी. झाओ का कहना है कि कि उस समय दोनों देशों में कई मुद्दों पर सहमति हुई थी. इस बातचीत का दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के विकास में अहम भूमिका रही.

Pakistan
पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी चीन की यात्रा पर हैं.


बातचीत के प्रमुख मुद्दा भी भारत से जुड़ा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बात की संभावना बहुत ही कम है कि दोनों देश अपनी चर्चा में भारत को लेकर कोई बातचीत नहीं करें. दोनों देशों के चीन के महत्वाकांक्षी  बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत चीन पाकिस्तान के CPEC को लेकर हुई प्रगति के बारे में भी औपचारिक तौर पर बातचीत करनी है. इसके जरिए चीन एशिया और यूरोप से सड़क मार्ग और बंदरगाहों से जुड़ने का इरादा रखता है.

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चीन की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है CPEC
CPEC के मामले में भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर से सड़क बनाने पर आपत्ति जताई है. यह सड़क चीन को पाकिस्तान के समुद्री तट से जोड़ेगी. बताया जा रहा है कि CPEC के काम में वैसी प्रगति नहीं हुई है जैसी कि योजना बनाई गई थी.  कोविड-19 के असर से इसके और मंद होने की संभावाना है. पिछले महीने ही बीजींग ने अफगानिस्तान, नेपाल और पाकिस्तान से कोरोना वायरस से लड़ने के साथ ही BRI के अंतर्गत CPEC और अन्य संबंध प्रोजेक्ट को जारी रखने की अपील की थी.

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इस समय चीन पाकिस्तान दोनों के ही भारत से तनाावपूर्ण संबंध चल रहे हैं.


हाल ही में साऊदी अरब से निराशा मिली है पाक को
इसके अलावा हाल ही में पाकिस्तान और साऊदी अरब के बीच संबंधों में तनाव आया है. दस दिन पहले ही साउदी अरब गए पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल वाजवा को वहां में वैसा समर्थन नहीं मिला जैसा की वे उम्मीद कर रहे थे. राजनैतिक हलकों में इसे पाकिस्तान के लिए एक झटका माना गाया था.

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भारत की सक्रिय भी खटक रही है दोनों को
गौरतलब है कि चीन पाकिस्तान का भारत के खिलाफ हमेशा ही समर्थन करता आया है. ऐसे में जब भारत के चीन और पाकिस्तान के साथ अभूतपूर्व तनाव है और भारत की दोनों देशों के खिलाफ सक्रियता ने दोनों को बेचैन किया है. इस बार भारत ने जहां कश्मीर में धारा 370 हटाई है, तो वहीं चीन के विरोध में भी उसके कई ऐप्स पर भी बैन लगाकर चीन को कड़ा संदेश दिया है. ऐसे में इस बैठक में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार जरूर होगा. यह झाओ के बयान से भी साफ झलकता है जिसमें क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने पर जोर दिया गया है.
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