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पाकिस्तान पर Air Strike के तुरंत बाद इंडियन आर्मी ने इस कविता को ट्वीट किया

पाकिस्तान पर Air Strike के तुरंत बाद इंडियन आर्मी ने इस कविता को ट्वीट किया

पीओके के आतंकी शिविरों पर इंडियन एयरफोर्स के एयर स्ट्राइक के बाद इंडियन आर्मी के आफिशियल ट्वीटर हैंडल के एक कविता के अंक ट्वीट किए गए हैं, यहां पढिए पूरी कविता

पीओके के आतंकी शिविरों पर इंडियन एयरफोर्स के एयर स्ट्राइक के बाद इंडियन आर्मी के आफिशियल ट्वीटर हैंडल के एक कविता के अंक ट्वीट किए गए हैं, यहां पढिए पूरी कविता

पीओके के आतंकी शिविरों पर इंडियन एयरफोर्स के एयर स्ट्राइक के बाद इंडियन आर्मी के आफिशियल ट्वीटर हैंडल के एक कविता के अंक ट्वीट किए गए हैं, यहां पढिए पूरी कविता

    भारतीय वायु सेना द्वारा 26 फरवरी को पीओके में आतंकी शिविरों पर की गई एयर स्ट्राइक के तुरंत इंडियन आर्मी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दिनकर की एक कविता ट्वीट की गई.

    कविता की जो पंक्तियां ट्वीट की गईं वो इस तरह हैं

    'क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
    तुम हुए विनीत जितना ही,
    दुष्ट कौरवों ने तुमको
    कायर समझा उतना ही।
    सच पूछो, तो शर में ही
    बसती है दीप्ति विनय की,
    सन्धि-वचन संपूज्य उसी का जिसमें शक्ति विजय की।'

    ये कविता राष्ट्रीय कवि माने जाने वाले रामधारी सिंह दिनकर की है. सेना ने इस कविता का एक अंक ट्वीट किया है. हम आपको वो पूरी कविता यहां दे रहे हैं ताकि आप उसे पढ़ सकें. इस कविता का शीर्षक है शक्ति और क्षमा,

    मिराज 2000 फाइटर प्लेन, जिनसे पीओके के आतंकी शिविर पर एयरस्ट्राइक की गई


    क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
    सबका लिया सहारा
    पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
    कहो, कहाँ, कब हारा?

    क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
    तुम हुये विनत जितना ही
    दुष्ट कौरवों ने तुमको
    कायर समझा उतना ही।

    अत्याचार सहन करने का
    कुफल यही होता है
    पौरुष का आतंक मनुज
    कोमल होकर खोता है।



    क्षमा शोभती उस भुजंग को
    जिसके पास गरल हो
    उसको क्या जो दंतहीन
    विषरहित, विनीत, सरल हो।

    तीन दिवस तक पंथ मांगते
    रघुपति सिन्धु किनारे,
    बैठे पढ़ते रहे छन्द
    अनुनय के प्यारे-प्यारे।

    उत्तर में जब एक नाद भी
    उठा नहीं सागर से
    उठी अधीर धधक पौरुष की
    आग राम के शर से।

    सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
    करता आ गिरा शरण में
    चरण पूज दासता ग्रहण की
    बँधा मूढ़ बन्धन में।



    सच पूछो, तो शर में ही
    बसती है दीप्ति विनय की
    सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
    जिसमें शक्ति विजय की।

    सहनशीलता, क्षमा, दया को
    तभी पूजता जग है
    बल का दर्प चमकता उसके
    पीछे जब जगमग है।

    ये कविता भारत की सहन शक्ति और उसकी ताकत को प्रतिबिंबित करती है लेकिन ये भी बताती है कि कभी कभी ताकत दिखानी भी जरूरी होती है और इसे दिखाना भी चाहिए, तभी आपकी सहनशीलता और क्षमा का भी मान होता है. दिनकर ने ये कविता भारत की ताकत, सहनशक्ति और क्षमता को रिफलेक्ट करते हुए 50 साल पहले लिखी थी, जो आज भी प्रासंगिक है.

    रामधारी सिंह दिनकर (1908-1974) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक थे. राष्ट्र कवि दिनकर को आधुनिक युग में वीर रस का सबसे बड़ा कवि माना जाता है. उनका जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया घाट में हुआ था. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की. दिनकर को ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता भी मिला था.

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर


    दिनकर को राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत, क्रांतिपूर्ण संघर्ष की प्रेरणा देने वाली ओजस्वी कविताओं के कारण खासी लोकप्रियता मिली. उन्हें 'राष्ट्रकवि' के नाम से विभूषित किया गया.

     

    Tags: Action against terror attack, Air Strike, Balakot, Indian Airforce, Pakistan, Pulwama, Pulwama attack, Terrorist Encounter

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