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जिन्ना-नेहरू नहीं एक व्यापारी की वजह से हुआ था भारत-पाकिस्तान विभाजन!

Janardan Pandey | News18Hindi
Updated: May 7, 2019, 1:29 AM IST
जिन्ना-नेहरू नहीं एक व्यापारी की वजह से हुआ था भारत-पाकिस्तान विभाजन!
भारत-पाक विभाजन का मुख्य कारण जिन्ना नहीं बल्कि हरिचन्द्र नाम का एक कंजूस हिन्दू व्यापारी था. जानिए, उसकी पूरी कहानी.

भारत-पाक विभाजन का मुख्य कारण जिन्ना नहीं बल्कि हरिचन्द्र नाम का एक कंजूस हिन्दू व्यापारी था. जानिए, उसकी पूरी कहानी.

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लोकसभा चुनाव 2019 ढलान पर है. कुल सात चरणों में से पांचवें चरण की वोटिंग सोमवार छह मई को हुई. पांचवें चरण में अमेठी-रायबरेली सरीखी नेहरू-गांधी खानदान की पारंपरिक सीट पर भी वोट डाले गए. इस चुनावी दौर में एक बार फिर से उन अफसानों को हवा दी जा रही है, जो इतिहास के पन्नों में दबे हैं. हाल ही में एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के शासन में महाकुंभ में हुई भगदड़ का उल्लेख किया. राजीव गांधी के इतिहास पर दिए गए उनके बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व महासचिव प्रियंका गांधी ने उनके ऊपर निशाना भी साधा.

इसी बहाने सोशल मीडिया में एक बार फिर से पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. इनमें बार-बार इस अफसाने को दोहराया जाता है कि पंडित नेहरू सत्ता लोभी थे. नेहरू ने वल्लभ भाई पटेल को देश का पहला पीएम नहीं बनने दिया. इसकी असली कहानी हाल ही में हमने बताई थी. एक अन्य मामला उठता है कि अगर नेहरू ने जिन्ना को देश का पहला पीएम बनने दिया होता तो भारत-पाकिस्तान का विभाजन न हुआ होता.

जिन्ना को पता था मौत नजदीक है, हर हाल में पाकिस्तान का विभाजन कराना होगा
इस अफसाने की सच्चाई ढूंढ़ें तो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम उस वक्त भारत में मौजूद ब्रिट‌िश पत्रकार डोमिनिक लैपिएर और लैरी कलिन्स अपनी किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में लिखते हैं-



जिन्ना को एक मर्ज था, टीबी. जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो टीबी अपने अंतिम चरण में थी. जब उन्हें इस बात का पता चला तो उनका शरीर अंत की तरफ बढ़ रहा था. लेखक बताते हैं ‌कि ऐसी स्थिति आ गई थी अगर जिन्ना का सबसे बेहतर इलाज कराया जाता, उनके सारे-काम कम कराके उन्हें आराम करने को कहा जाता, उनकी सिगरेट-शराब छुड़ा दी जाती तब भी उनके पास बचा समय एक या दो साल से ज्यादा नहीं था.

यह भी पढ़ेंः क्या सचमुच वल्लभ भाई पटेल को जवाहरलाल नेहरू ने भारत का पहला प्रधानमंत्री बनने से रोका था?लेखक के अनुसार जिन्ना इस बात को भलीभांति जानते थे कि अगर उनकी बीमारी के बारे में लोगों को तनिक भी पता चला तो उन्होंने अपने कम दुश्मन नहीं बनाए हैं. हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों में ठीक-ठाक दुश्मन पाल लिए थे. उनकी बीमारी की जानकारी होते ही उनके सारे दुश्मन सक्रिय हो जाते.



उन्हें सबसे ज्यादा डर मुस्लिम लीग में नीचे के पदों पर मौजूद उनके कमजोर समर्थकों को लेकर था. वे चाहते थे कि कुछ भी हो जाए उनके समर्थकों का सपना न टूटे. इसलिए उन्होंने अपने जीवन के अंतिम लम्हों का एकमात्र उद्देश्य भारत पाकिस्तान के बंटवारे को बना लिया था किसी भी हाल में.

भारत-पाकिस्तान का बंटवारा करना ही पड़ेगा. इसके अलावा कोई और उपाय नहीं है. मैं जानता हूं इससे दोनों ही तरफ के कुछ लोगों को परेशानी है. लेकिन इतिहास में जब कभी भी इस विभाजन का जिक्र होगा. लोग इस बंटवारे को सही समझेंगे. - ‌भारत-पाक बंटवारे को लेकर हुई एक शीर्ष बैठक में मोहम्मद अली जिन्ना


इस चुनाव ने ठोंकी थी ताबूत में कील, इसके बाद जिन्ना को लगा था अब करा लें विभाजन
असल में स्वतंत्रता से पहले हिन्दुस्तान में दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियां नेतृत्व कर रही थीं. पहली कांग्रेस जिसमें महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, लाल बहादुर शास्‍त्री नेतृत्व कर रहे थे. दूसरी मुस्लिम लीग जिसे मोहम्मद अली जिन्ना चला रहे थे.

अंग्रेजों ने भारत छोड़ने का मन बनाया तो कैबिनेट मिशन प्लान लेकर आए. ब्र‌िटेन के प्रधानमंत्री क्लीवन एटली ने भारतीय नेताओं से बातचीत के लिए संसदीय दल भेजा. 29 मार्च 1946 को सर स्टेफर्ड क्रिप्स, एबी एलेंजडर, पैथ‌िक लारेंस ने भारतीय नेताओं से मुलाकातें शुरू की.



इसका उद्देश्य हिन्दुस्तान के लिए संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत कराना और अंतरिम सरकार का प्रबंध करना. इस दल ने भारत को अपना एक संविधान बनाने के लिए संविधान सभा चुनने को कहा और अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा.

उस वक्त कांग्रेस और मुस्लिम लीग दो प्रमुख दल थे जो अंतरिम सरकार के प्रमुख हिस्सा होते. तभी शिमला में सर्वदलीय बैठक हुई. इसमें कांग्रेस, मुस्लिम लीग, कैबिनेट मिशन बैठा. लेकिन बैठक बेनतीजा रही. संविधान सभा व अंतरिम सरकार दोनों को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया.

16 मई 1946 को कैबिनेट मिशन ने संविधान निर्माण के लिए एक चुनाव कराने को कहा. जून 1946 में कैबिनेट मिशन लौट गया. जून में ही संविधान सभा के निर्माण के लिए चुनाव हुए. तब ब्रिटिश भारत के 296 प्रांत हुआ करते थे. चुनाव के दौरान कांग्रेस को 205 सीटों पर जीत मिली. इससे मुस्लिम लीग भांप गई कि अगर वे हिन्दुस्तान का हिस्सा होंगे तो उनकी भागीदारी सीमित होगी. क्योंकि चुनाव से साफ था कांग्रेस का दबदबा देश में बहुत ज्यादा था.

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एसे में जिन्ना की टीबी और संविधान निर्माण के लिए हुए चुनाव ने भारत पाकिस्तान विभाजन को बल दे दिया. नतीजतन भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत 14 अगस्त को हिन्दुस्तान को दो देशों बांट गया. पाकिस्तान के मोहम्मल अली जिन्ना गर्वनर जनरल और लियाकत अली प्रधानमंत्री बने.



जिन्‍ना-नेहरू नहीं एक कंजूस व्यापारी ने कराया था विभाजन
यह रहस्योद्घाटन विभाजन पूर्व पाकिस्तान में रहने वाले और वहीं से वकालत शुरू करने वाले भारत के मशहूर वकील राम जेठमलानी करते हैं. उन्होंने साल 2009 में मोहम्मद अली जिन्ना पर लिखी गई एक किताब के विमोचन में इसके बारे में बताया था. उनका कहना था, "भारत-पाक विभाजन का मुख्य कारण जिन्ना नहीं बल्कि हरिचन्द्र नाम का एक कंजूस हिन्दू व्यापारी था.’

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उनके इतना कहते ही पूरे हॉल में बैठे लोग उनकी ओर देखने लगे. उन्होंने बताया, "मोहम्मद अली जिन्ना ने वकालत पूरी की तो वे कराची पहुंचे. यहां उन्होंने ‘हरिचन्द्र एंड कंपनी’नौकरी के लिए आवेदन किया. तब इस कंपनी के मालिक हरिचन्द्र ने जिन्ना का इंटरव्यू लिया. जिन्ना की बेहद तेज थे. वे इंटरव्यू में सफल भी रहे. इसके बाद हरिश्चंद्र ने जिन्ना से उनकी सैलेरी को लेकर उम्मीदों के बारे में पूछा. इस पर जिन्ना ने उन्हें 100 रुपया महीने की मांग कर दी. लेकिन हरिचन्द्र 75 रुपये हर महीने देने की जिद पर अड़ा रहा. आखिर तक बात नहीं बनी."

राम जेठमलानी का तर्क ये है, "अगर तब वह बूढ़ा कंजूस व्यापारी जिन्‍ना को 75 के बजाए 100 रुपये देने पर राजी हो जाता तो जिन्ना नौकरी तरफ बढ़ जाते और उनके मन में भारत-पाकिस्तान विभाजन के खयाल नहीं आते." इसलिए राम जेठमलानी मानते हैं कि भारत-पाक के विभाजन के लिए यह कंजूस व्यापारी ही जिम्मेदार है.



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First published: May 6, 2019, 7:24 PM IST
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