चंद्रयान 2 मिशन के पीछे मोदी का प्रभाव? जानें क्या कह रही है दुनिया

इसरो दूसरा चंद्रयान मिशन 15 जुलाई की अलसुबह लॉंच करने के लिए तैयार है. दुनिया भर में भारत के इस मिशन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है. जानिए, भारत के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर दुनिया का क्या नज़रिया है?

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Updated: July 14, 2019, 11:53 PM IST
चंद्रयान 2 मिशन के पीछे मोदी का प्रभाव? जानें क्या कह रही है दुनिया
बेंगलूरु में चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर व्हीकल पर काम करते इसरो के इंजीनियर.
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Updated: July 14, 2019, 11:53 PM IST
भारत का दूसरा मून मिशन- चंद्रयान 2 पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. विदेशी मीडिया और विज्ञान से जुड़े पत्र पत्रिकाओं में भारत के इस​ मिशन को काफी कवरेज मिल रहा है और कई कोणों से इस पर चर्चा जारी है. कहीं भारत के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की लागत सुर्खियों में है तो कहीं अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत के कौशल को लेकर विचार. आइए जानें, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के अध्ययन और संभावनाओं को तलाशने वाले इस मिशन के बारे में दुनिया क्या कह रही है.

पिछली खबरों में न्यूज़18 आपको बता चुका है कि चंद्रयान 2 मिशन में भारत के कौन से वैज्ञानिक महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं और भारत के इस मिशन का बजट कितना रहा है. विदेशी समाचार एजेंसी स्पूतनिक ने इस मिशन के बजट की तुलना हॉलीवुड फिल्म एवेंजर्स एंडगेम के बजट के साथ करते हुए लिखा है कि हॉलीवुड फिल्म की आधी से भी कम लागत में भारत का चंद्रयान चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए तैयार है.

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'सब चांद पर लौट रहे हैं, लेकिन क्यों?'

पश्चिम के प्रमुख मीडिया समूह द गार्जियन ने अपनी एक खबर को इस शीर्षक से छापा है. इस खबर में कहा गया है कि चांद के सिलसिले में दुनिया के पहले अभियान यानी अपोलो लैंडिंग की घटना को 50 साल पूरे होने को हैं और ऐसे समय में कई देश पिछले कुछ समय से चंद्रमा से जुड़े अंतरिक्ष कार्यक्रमों में रुचि दिखा रहे हैं. इस लेख में अंतरिक्ष की दौड़ और होड़ के कारणों पर चर्चा की गई है.

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'क्यों सब फिर चांद पर जाना चाहते हैं?'
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न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी गार्जियन से मिलते जुलते शीर्षक से ही लेख प्रकाशित किया है. इस लेख में कहा गया है कि चांद की सतह पर पहुंचना, भारत के लिए सिर्फ यही म​हत्व दिखाएगा कि उसने तकनीकी विकास कर लिया है. चीन भी इस क्षेत्र में खुद को स्थापित कर चुका है. और अमेरिका व नासा के लिए चांद अब एक आम बात हो गई है और मंगल के रास्ते में चंद्रमा उसके लिए बहुत स्वाभाविक पड़ाव है.

तकनीकी कुशलता दिखाने की इच्छा
अमेरिका के राष्ट्रीय सार्वजनिक रेडियो ने भारत के चंद्रयान 2 मिशन को लेकर भी कुछ ऐसी ही बात कही. रेडियो ने कहा कि चीन, भारत के साथ ही इज़राइल और दक्षिण कोरिया जैसे छोटे देश भी चंद्रमा पर पैठ बनाने के लिए रोबोटिक मिशन को अंजाम दे रहे हैं. चांद से जुड़ी उनकी महत्वाकांक्षाएं तकनीकी कौशल दिखाने की इन देशों की इच्छा का ही नतीजा हैं. साथ ही, ये देश ग्लोबल नेशनलिज़्म की होड़ में भी शामिल हो रहे हैं.

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'बढ़ रही हैं अंतरिक्ष से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं'
वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने लेख का शीर्षक दिया है 'भारत का चंद्रयान मिशन संकेत है कि उसकी अंतरिक्ष संबंधी महत्वाकांक्षा बढ़ रही है'. इस लेख में लिखा गया है कि भारत में हालांकि अंतरिक्ष कार्यक्रमों की शुरूआत 1960 के दशक में हो चुकी थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव में नई इच्छाएं उभर रही हैं. भारत का अंतरराष्ट्रीय कद बढ़ाने और रक्षा क्षमताओं के लिए एक प्राचीर दर्शाने की इच्छा के चलते मोदी अंतरिक्ष कार्यक्रमों को ज़्यादा तवज्जो दे रहे हैं.

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इसके अलावा स्पेस.कॉम, phys.org, प्लेनेटरी और साइंटिफिक अमेरिकन जैसे विज्ञान संबंधी पोर्टलों एवं पत्रिकाओं में भारत के चंद्रयान 2 मिशन के तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा की जा रही है और इसे भारत के एक बड़े दखल और उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. भारत के पहले चंद्रयान मिशन के साथ ही नासा के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के साथ भी चंद्रयान 2 मिशन की तुलना की जा रही है.

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First published: July 14, 2019, 11:52 PM IST
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