बेरूत की तरह भारत में भी कई जगहों पर इकट्ठा है खतरनाक रासायनिक कचरा

बेरूत की तरह भारत में भी कई जगहों पर इकट्ठा है खतरनाक रासायनिक कचरा
बेरूत ब्लास्ट भारत के लिए भी चेतावनी है कि देश में रासायनिक कचरे का सही प्रबंधन और उससे सुरक्षा पर ध्यान देना होगा.

बेरूत में हुए धमाके (Beirut blast) दुनिया के साथ ही भारत (India) के लिए भी चेतावनी है जहां के हर राज्य में खतरनाक रासायनिक कचरा (Chemical waste) बनने के इलाके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 5:10 PM IST
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हाल ही में लेबनान (Lebanon) की राजधानी बेरूत (Beirut) एक भीषण धमाके से हिल गयी. बेरूत के बंदरगाह पर हुए इस हादसे में 137 लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए. यह धमाका किसी आंतकी हमले या सैन्य कार्रवाई की वजह से नहीं बल्कि बंदरगाह पर बड़ी मात्रा में रखे अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate) के आग में चपेट में आने की वजह से हुआ था. इस हादसे ने दुनिया भर में, खास तौर पर भारत (India) में, रासायनिक कचरे (Chemical Waste) और उससे संबंधित हादसों के प्रति चेताया है.

सालों से बिना सुरक्षा के रखा था अमोनियम नाइट्रेट
बंदरगाह पर दो धमाके हुए. दोनों ही धमाके बंदरगाह के एक गोदाम में करीब 2750 टन के अमोनियम नाइट्रेट के आग पकड़ने से हुए. इसमें दूसरा धमाका बहुत ही तेज हुआ जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया. इसका असर 240 किलोमीटर दूर तक महसूस किया गया. इतनी बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट सालों से बिना किसी पर्याप्त सुरक्षा के रखा गया था जिससे साफ तौर पर लापरवाही का मामला नजर आता है.

एक चेतावनी के तौर पर देखा जाना जरूरी
इस हादसे को दुनिया भर में लोग एक चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं जिससे कि आसपास में इस तरह के खतरनाक रसायनों का भंडारण और उत्पादन को नियंत्रित किया जाना चाहिए. वैसे तो अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग रासायनिक खाद के उत्पादन के लिए होता है, लेकिन इससे विस्फोटक भी बनाया जाता है.



भारत में भी हो चुकें खतरनाक रासायनिक हादसे
केवल अमोनियम नाइट्रेट ही एक खतरनाक रसायन नहीं है. बल्कि दुनिया में बहुत से ऐसे उत्पाद हैं जिनसे खतरनाक रासायनिक कचरा निकलता है. भारत में भी ये रसायन बहुत चिंता पैदा करते हैं और इनसे कई खतरनाक हादसे भी हो चुके हैं जिनमें 35 साल पहले हुई भोपाल गैस त्रासदी आज भी दुनिया की सबसे विनाशकारी औद्योगिक हादसे के तौर पर गिनी जाती है.

Bhopal Gas Tragedy
भोपाल गैस हादसे को 35 साल हो चुके हैं फिर रासायनिक कचरे को लेकर देश में कोई ठोस नीति लागू नहीं हैं.


भारत में दो सौ से ज्यादा जगहों पर बनते हैं ऐसे रसायन
डाउन टू अर्थ कि रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2019 के अंत में आई रिपोर्ट में 22 राज्यों में 239 औद्योगिक साइट की पहचान की गई है जिसमें खरनाक रसायन जमा है. इसमें डीडीटी, साइनाइड, नाइट्रेट, क्रोमियम, लेड, पारा, हाइड्रोकार्बन टाल्यूईन, आर्सनिक, फ्लोराइड, जैसे बहुत से रसायन कचरे के तौर पर बन रहे हैं.

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भारत में हादसे होने की आशंका
आज भी भारत में रासायनिक दुर्घटनाओं पर नजर रखने और उनका सही रिकॉर्ड रखने की पुख्ता व्यवस्था नहीं है. भोपाल हादसे के बाद कई नियम, गाइडलाइन तैयार हुई लेकिन उनका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव नहीं दिखाई दिया. रिपोर्ट के अनुसार भारत के  301 जिलों में 1,861 प्रमुख औद्योगिक ईकाइयां ऐसी हैं जिनमें रासायनिक हादसे होने की आशंका बनी रहती है. इसके अलावा असंगठित क्षेत्रों में भी तीन हजार से ज्यादा खतरनाक फैक्ट्रियां मौजूद हैं, जिनका कोई विनियमन नहीं है.

सरकार को और ज्यादा गंभीर होने की जरूरत
एक तरफ सरकार रसायन उद्योग के लिए निवेश बढ़ाने के लिए तमाम तरह के प्रयास कर रही है तो वहीं खतरनाक रसायन के उत्पादन के नियंत्रण संबंधी उपायों में कमी साफ देखी जा सकती है. पिछले कुछ सालों में हुए रासायनिक हादसों में बेतहाशा इजाफे इसे प्रमाणित करते दिख रहे हैं. इसी साल जून में ही आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम की बालाजी केमिकल्स फैक्ट्री में भीषण हादसा हुआ. इस फार्माकेमिकल यूनिट में इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है. कई बार इस तरह के हादसों की रिपोर्ट तक नहीं होती.

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के विशाखापट्टनम (Visakhapatnam) में गुरुवार को तड़के एक रासायनिक संयंत्र से गैस का रिसाव हो जाने के कारण एक बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हो गई और करीब 300 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. वहीं 5 हजार से ज्यादा लोग बीमार हैं.
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के विशाखापट्टनम (Visakhapatnam) में गैस लीक के बाद घटना में 12 लोगों की मौत हो गयी थी. प्रभावितों में मासूम भी शामिल थे.


यह है बड़ी समस्या
दरअसल रसायन उद्योगों के साथ सबसे बड़ी समस्या उसके होने वाले उत्पादोत्पाद यानी की बाय प्रोडेक्ट (By Product) हैं. देखा यह गया है कि रासायनिक उद्योगों में हादसे या तो किसी उत्पाद के बनाने में काम में आने वाले खतरनाक पदार्थ के रखरखाव में लापरवाही से होते हैं, या फिर उनके बाय प्रोडेक्ट को बिना किसी उचित उपचार के ही पास के नदी नाले में छोड़ दिया जाता है जो आसपास की जमीन, जलस्रोत, आदि के लिए घातक सिद्ध होता है. ये रसायन धीरे धीरे आसापस के जलस्रोतों में मिल कर उसे खतरनाक तरीके से प्रदूषित कर देते हैं.

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यदि हमारे देश में नाइट्रेट, फोरेट, ग्लाइफोसेट जैसे खतरनाक रसायन बनना बंद न हुए तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में बेरूत, भोपाल और विशाखापट्नम जैसे हादसों का सिलसिला चल निकलेगा.
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