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जानिए कुछ महीनों में भारत में कौन सा बूम आने वाला है, भर जाएंगे अस्पताल

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 1:05 AM IST
जानिए कुछ महीनों में भारत में कौन सा बूम आने वाला है, भर जाएंगे अस्पताल
कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण भारत में बड़ी संख्या में बच्चे पैदा होंगे.

भारत आबादी के मामले में अब सिर्फ चीन से ही पीछे हैं. ऐसे में अगर कोरोना में हुए लॉकडाउन की वजह से भारत में बेबी बूम आता है तो कई स्तर पर परेशानियां खड़ी हो सकती हैं.

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कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर के देश इस समय लॉकडाउन में चल रहे हैं. कहीं मामले कम होने के बाद नियमों में कुछ ढील दी गई है तो कहीं पर अब भी सख्ती बरकरार है. लेकिन इस बीच एक रिपोर्ट ने सभी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. United Nations Population Fund की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में लॉकडाउन के दौरान के गर्भनिरोधक उपायों की कमी की वजह से कम और मध्यम आय वाले देशों में 70 लाख अवांछित गर्भधारण हो सकता है.

अगर भारत के केस में देखा जाए तो ये एक बड़ी समस्या वाली बात हो सकती है. भारत आबादी के मामले में अब सिर्फ चीन से ही पीछे हैं. ऐसे में अगर कोरोना में हुए लॉकडाउन की वजह से भारत में बेबी बूम आता है तो कई स्तर पर परेशानियां खड़ी हो सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत में तीन महीने तक लॉकडाउन रहेगा तो ये बूम आने की आशंका और ज्यादा प्रबल हो जाएगी.

हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक प्रेगनेंसी के ज्यादातर मामले गांवों से आ सकते हैं. इसका कारण बताया गया है कि शहरी इलाकों में गर्भनिरोधक उपायों की उपलब्धता, नौकरियों को लेकर मानसिक उलझन और साक्षरता अधिक होने की वजह से प्रेग्नेंसी के मामले कम सामने आ सकते हैं. लेकिन गांवों में ये संख्या बढ़ सकती है. लेकिन ऐसा नहीं है कि ये इकलौती रिपोर्ट है जो लॉकडाउन के दौरान पैदा होने वाले बच्चों पर दी गई है. इसके अलावा भी यूनीसेफ ने एक रिपोर्ट दी है जिसनके मुताबिक भारत में मार्च 2020 से लेकर दिसंबर 2020 तक दो करोड़ बच्चे पैदा होंगे.



रोहतक में कोरोना पॉजिटिव महिला ने दिया बच्ची को जन्म, बच्ची की रिपोर्ट आई नेगेटिव-corona positive give birth to baby in rohtak pgi hrrm
प्रतीकात्मक तस्वीर




क्या कहती है यूनीसेफ की रिपोर्ट
UNICEF के मुताबिक कोरोना वायरस के साये में दुनिया भर में करीब 116 मिलियन बच्चे पैदा होंगे. ये भी अनुमान है कि जनवरी-दिसंबर 2020 के दौरान भारत में 2 करोड़ बच्चों का जन्म होगा. यहां तक ​​कि धनी देश भी इस संकट से प्रभावित होंगे. जन्म की अनुमानित संख्या के मामले में अमेरिका  छठवें नंबर पर है. यहां 3.3 मिलियन से अधिक बच्चों का जन्म 11 मार्च और 16 दिसंबर के बीच होने का अनुमान है.

UNICEF ने कहा है कि 11 मार्च से लेकर 16 दिसंबर तक भारत में 2.1 बच्चों का जन्म होगा. साथ ही ये भी कहा गया है कि इस दौरान जन्म लेने वाले बच्चों और उनकी मां को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती है.

बाकी देशों का हाल
महामारी घोषित होने के बाद के 9 महीनों में सबसे अधिक जन्म भारत में होने की संभावना है. इस दौरान भारत के अलावा चीन (13.5 मिलियन), नाइजीरिया (6.4 मिलियन), पाकिस्तान (5 मिलियन) और इंडोनेशिया (4 मिलियन) बच्चों का जन्म होगा.

भारत के अस्पतालों में क्या हो सकती हैं दिक्कतें
अब अगर इन दोनों रिपोर्ट को आधार बनाया जाए तो आने वाले समय में भारत कोरोना से तो जूझेगा साथ ही उसे कई अन्य स्तर पर भी जूझना होगा. जैसे यूनीसेफ की रिपोर्ट में लगाए गए अनुमान के मुताबिक मार्च से दिसंबर के बीच पैदा होने वाले बच्चों के लिए अस्पतालों में बेड की व्यवस्था करना मुश्किल काम होगा. इस वक्त अस्तपालों का ज्यादातर ध्यान कोरोना के खात्मे की तरफ होगा. साथ ही अगर लॉकडाउन लंबा खिंचा तो अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस से लेकर अन्य कई तरह की परेशानियां खड़ी होने वाली हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर


United Nations Population Fund की रिपोर्ट का असर भी पड़ सकता है. ऐसे में ग्रामीण इलाकों में अनचाहे गर्भ से मुक्ति पाना भी महिलाओं के लिए आसान नहीं होगा. इस रिपोर्ट के मुताबिक इसका असर ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में होगा. अगर ऐसा हुआ तो सबसे ज्यादा मुश्किल महिलाओं को आने वाली है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से उन्हें शहर आने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

क्या किए जा सकते हैं उपाय
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि महिलाओं को इस अनचाहे गर्भधारण से बचाने के लिए सरकार को बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने होंगे. फैमिली प्लानिंग के तरीके समझाने होंगे. फैमिली प्लानिंग के उपायों को अतिआवश्यक चीजों की श्रेणी में डालना होगा. और भारत के ग्रामीण इलाकों में इस पहुंच ज्यादा मात्रा में करनी होगी. साथ ही ग्रामीण स्तर पर हेल्थ वर्कर्स को भी इसे लेकर आगाह करना होगा. हेल्थ केयर वर्कर्स को इस दौरान अतिरिक्त काम के लिए इंसेटिव भी प्रोवाइड कराया जाना चाहिए.
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First published: May 20, 2020, 11:33 PM IST
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