इंडियन एयरफोर्स ने पहली बार क्यों की एक खास नस्ल के डॉग की तैनाती

मुडहोल (Mudhol) प्रजाति के कुत्तों को सेना में खास तौर से बढ़ावा दिया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) का आगरा एयरबेस (Agra Airbase) में कर्नाटक से मुडहोल (Mudhol) प्रजाति के कुत्तों को खास तौर से लाया गया है जो एयरबेस में पक्षियों (Birds) को भगाने काम करेंगे.

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    हवाई जहाज (Air Planes) की उड़ान के रास्ते में पक्षियों का आना (Birds strike) बहुत ज्यादा खतरनाक होता है. यह खतरा हवाई अड्डों और एयर बेस पर बहुत ज्यादा होता है. इससे निपनटा भी एक बहुत बड़ी चुनौती है. इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में पहली बार एक भारतीय नस्ल के कुत्तों की तैनाती हुई है. वायुसेना के आगरा एयरबेस में चार भारतीय नस्ल के मुडहोल (Mudhol) कुत्तों को शामिल किया गया है.

    क्या करेंगे ये कुत्ते
    मुडहोल प्रजाति के कुत्ते भारत में कर्नाटक में बहुत पाए जाते हैं. यह पहली बार है कि इस तरह से कुत्तों की भर्ती की गई है जिससे पक्षियों के विमानों से टकराव की घटना में कमी लाई जा सके. ये कुत्ते रनवे पर आने वाले पक्षियों और जानवरों को दूर भगाने का काम करेंगे.

    कहां से लाया गया है कि इन कुत्तों को
    इन कुत्तों में से दो नर और दो मादा हैं जबकि इनसके साथ एक 15 दिन का पिल्ला भी लाया गया है. इन्हें कर्नाटक के मोडहुल स्थित कैनाइन रिसर्च एंड इनफॉर्मेशन सेंटर (CRIC) से लाया गया है. इसी जगह की वजह से इस प्रजाति को उनका नाम मिला है.

    खास प्रशिक्षण दिया जाएगा इन्हें
    इन कुत्तों को पक्षियों को डराने के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा. भारत में बहुत सारे एयरबेस में पक्षियों का टकराव एक बहुत बड़ी समस्या बना हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि मुडहोल कुत्तों को भले ही इस काम के लिए पहली बार भारतीय सेना के लिए किसी अंग में शामिल किया जा रहा हो, लेकिन ये पहले भी भारतीय सेना में शामिल किए जा चुके हैं.

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    रनवे पर हवाई जहाजों के रास्ते में पक्षियों (Birds)के आने से दुर्घटना हो जाती है. इन्हें भगाने के लिए इन कुत्तों को रखा गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    पहले सेना में शामिल किए जा चुके हैं ये
    पहले छह पिल्ले साल 2016 में मेरठ की आर्मी रेमाउंड एंड वर्टरनरी कॉर्प्स में शामिल किए गए थे जहां एक साल के प्रशिक्षण केबाद उन्हें जम्मू कश्मीर में तैनात कियागया था. इसके बाद यह पूरा क्षेत्र ही इस देसी नस्ल के इन कुत्तों को पालने का इलाका बन गया है. लेकिन अब इस इलाके में आम लोग भी इस नस्ल के कुत्ते खरीदने लगे हैं. देसी नस्ल के कुत्तों को इस तरह के काम के लिए पहली बार उपयोग में लाया जा रहा है. इससे पहले इसके लिए विदेशी कुत्तों का ही उपयोग किया जाता था.

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    खास होते हैं इस नस्ल के कुत्ते
    मुडहोल प्रजाति के कुत्ते बहुत ही चुस्त, तेज दिमाग वाले होते हैं जिससे वे बहुत तरह के काम करने के योग्य होते हैं. सेना का कहना है कि मुडहोल वहां पहुंच सकने में सक्षम हैं जहां सैनिक नहीं पहुंच सकते. ये पतले होते हैं और बहुत ही तेजी यानि 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकते हैं. ये शिकारी कुत्ते होते हैं और इन्हें बम की पहचान करने अपराधिक घटना में पहचान करन जैसे काम के लिए उपयोग में लाया जाता है क्योंकि इनके सूंघने की क्षमता बहुत तेज होती है.

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    अभी तक भारतीय सेना और पुलिस में विदेशी नस्ल (Foreign breed) के कुत्तों को ही प्राथमिकता दी जाती थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    सेना में बढ़ रहा है चलन
    अभी तक भारतीय सेना या पुलिस में डॉबरमान, जर्मन शेफर्ड और लैबरोडोर प्रजातियों के कुत्तों का ज्यादा उपयोग होता रहा है. लेकिन जब से प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के तहत देशी नस्लों पर जोर देने की बात कही है, तब से सेना और उसके अंगों के साथ पुलिस विभागों में यह चलन शुरू हो गया है.

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    मुडहोल कुत्तों की मांग पिछले कुछ समय में काफी बढ़ गई है. साल 2010 में जो मुडहोल पिल्ला दस हजार रुपये का आता था आज वह 14 हजार रुपये में आता है. जबकि जोड़ा 25 हजार तक में आता है. ये केवल सरकारी दर है. बाजार में इनकी कीमत ज्यादा ही होती है. ये सात मानक रंगों में आते हैं.

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