कितनी घातक है अमेरिकी असॉल्ट राइफल, जो अब दुश्मन के हौसले करेगी पस्त

कितनी घातक है अमेरिकी असॉल्ट राइफल, जो अब दुश्मन के हौसले करेगी पस्त
अमेरिकी असॉल्ट राइफल, जो इंडियन आर्मी की पुरानी रायफल को कर रही रिटायर (Photo-flickr)

लद्दाख में चीनी सैनिकों के कारण आए तनाव (India-China border tension in Ladakh) के बीच भारतीय सेना को अमेरिकी असॉल्ट रायफल (american assault rifle) मिली है. ये ज्यादा बड़े और खतरनाक कारतूस दाग सकती है.

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एक तरफ देश कोरोना से लड़ाई लड़ रहा है तो दूसरी ओर चीन से सीमा विवाद गहराया हुआ है. इसी बीच एक अच्छी खबर आई है. भारतीय सेना अमेरिका से असॉल्ट रायफल्स की दूसरी खेप मंगवा रही है. इससे पहले भी सेना को इसकी एक खेप की आपूर्ति हो चुकी है. अब दोबारा 72 हजार एसआईजी 716 असॉल्ट राइफल का ऑर्डर दिया जा चुका है. इससे ये उम्मीद बढ़ी है कि चीन के आक्रामण होने पर हमारे जवानों के पास भी उनसे लड़ने के लिए काफी साजो-सामान होगा.

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन के लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर सालों बाद दोबारा तनाव हुआ है. 15 जून की रात दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जावन शहीद हुए. झड़प में चीन के भी सैनिकों का नुकसान हुआ, ऐसा माना जा रहा है. हालांकि चीन ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया लेकिन वहां के सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी बातें चलती रहीं. फिलहाल गलवान घाटी में आया तनाव कम होता दिखाई नहीं दे रहा. ऐसे में भारत अपनी सेना को लगातार मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में पहले रूस के साथ लड़ाकू विमानों के लिए सौदा हुआ. अब अमेरिकी असॉल्ट रायफल्स का ऑर्डर भी इसी कदम को मजबूती दे रहा है.

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन के लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर सालों बाद दोबारा तनाव है (Photo-wallpaperflare)




पिछले साल भी पुलवामा हमले के बाद इसी रायफल की पहली खेप का ऑर्डर दिया गया था. असॉल्ट रायफल्स हैंडल करने में ज्यादा आसान और ज्यादा बड़े कारतूस वाली होती हैं. इससे हमला ज्यादा घातक हो जाता है. फिलहाल अमेरिका और यूरोपियन देशों की सेना इसी रायफल का इस्तेमाल कर रही है. ये रायफल लंबी दूरी के साथ-साथ पास के टारगेट पर भी उतनी ही सक्षमता से वार करती है. ये उन सारी आधुनिक तकनीकों से लैस है, जिनकी लड़ाई के दौरान जरूरत पड़ती है.
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वैसे हमारी आर्मी फिलहाल जिस इंडियन स्माल आर्म्स सिस्टम (इंसास) का इस्तेमाल कर रही है, उनमें कई बार मैगजीन टूटने की भी शिकायत आई है. अगर लड़ाई पहाड़ों पर यानी ठंडे इलाकों में हो रही हो तो ये जैम हो जाते हैं. लड़ाई के मैदान में ये सैनिकों के लिए जानलेवा हो सकता है. साथ ही लंबी रेंज के लिए भी इंसास प्रभावी नहीं है. ये खामियां देखते हुए साल 2017 में ही ये कहा गया था कि इस रायफल को चरणबद्ध तरीके से रिटायर किया जाएगा. इसी प्रक्रिया में अब अमेरिका से असॉल्ट रायफल्स मंगाई जा रही हैं.

पुलवामा हमले के बाद इसी रायफल की पहली खेप का ऑर्डर दिया गया था


इंसास रायफल में 5.56x45 कारतूस लगते हैं, जबकि असॉल्ट में लगने वाले कारतूस इससे काफी ज्यादा ताकतवर होते हैं. अमेरिका में हथियार बनाने वाली कंपनी सिग सॉयर इन रायफलों की आपूर्ति करने वाली है. पड़ोसी देशों से बढ़ते तनाव के बीच माना जा रहा है कि जल्दी से जल्दी इन रायफल्स की आपूर्ति हो सकेगी. यही कारण है कि इनकी खरीदी फास्ट-ट्रैक पर्चेज (FTP) के तहत हो रही है.

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ये सारी रायफल्स सेना के आतंकवाद निरोधी अभियान के तहत दी जाएंगी. बाकी के सैनिकों को AK- 203 मॉर्डन राइफल दी जाएगी. इसे बनाने के लिए रूस के सहयोग से भारत ने अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में काम शुरू कर दिया है. ये एके सीरीज की भरोसेमंद और मजबूत रायफल मानी जाती है जो सेमी ऑटोमैटिक और ऑटोमैटिक दोनों ही तरह से काम करती है. इनके अलावा डिफेंस मिनिस्ट्री ने हाल में इजरायल से 16 हजार लाइट मशीन गन (एलएमजी) खरीदने का ऑर्डर दिया है.

जलमार्ग पर भी खुद को मजबूत करने पर भारत जोर दे रहा है


वैसे केवल हथियारों की खरीद ही नहीं, चीन के आक्रामक रवैये का जवाब देने की तैयारी हर स्तर पर हो रही है. इसी के तहत अब अंडमान-निकोबार में सैन्य बेस तैयार करना देश की प्राथमिकता में है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस बारे में काफी वक्त से प्लान चल रहा था लेकिन गलवान मामले के बाद इसमें तेजी आ गई.

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समुद्री मार्ग पर खुद को मजबूत करने के लिए अब Andaman Nicobar Command (ANC) को मजबूत बनाने की बात हो रही है. बता दें कि ये कमांड साल 2001 में तैयार हुई थी. यह देश की इकलौती कमांड है, जिसमें थल, वायु और नौसेना तीनों का ऑपरेशन कमांडर एक ही है. इस कमांड की 19 सालों से अनदेखी होती रही लेकिन अब चीन को समुद्र का सुपर पावर बनने से रोकने के लिए भारत सरकार इसे पुर्नगठित करने जा रही है.
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