डॉक्टर्स डे: एक दिन धरती के भगवानों के नाम

डॉक्टर्स डे के मौके पर जानिए देश में कैसी है स्वास्थ्य सेवाओं की हालात?

ETV UP/Uttarakhand
Updated: June 29, 2018, 7:53 PM IST
डॉक्टर्स डे: एक दिन धरती के भगवानों के नाम
File Photo
ETV UP/Uttarakhand
Updated: June 29, 2018, 7:53 PM IST
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की हालात ज्यादा बेहतर नहीं है. बड़ी आबादी के लिहाज से न व्यापक अस्पतालों की सुविधा है और न ही डॉक्टर्स की. सरकारी अस्पतालों में जितने डॉक्टर्स हैं, वो भारी दवाब में काम कर रहे हैं. वैसे हर साल 1 जुलाई का दिन नेशनल डॉक्टर्स डे के तौर पर मनाया जाता है. इस मौके पर जानिए देश में क्या है डॉक्टरों की स्थिति और क्यों मनाया जाता है ये दिन?

कैसे हुई डॉक्टर्स डे की शुरुआत
दुनिया में सबसे पहले डॉक्टर्स डे की शुरुआत 30 मार्च 1933 में अमेरिका के जॉर्जिया से हुई थी. फिजिशियन के सम्मान में इस दिन को तय करने का आइडिया यूडोरा ब्राउन एलमंड ने दिया. जो डॉक्टर चार्ल्स बी एलमंड की पत्नी थीं.

30 मार्च 1958 में यूएस के हाउस ऑफ रिप्रज़ेंटेटिव्स ने डॉक्टर्स डे रिज़ॉल्यूशन को अपनाया. भारत में डॉक्टर्स डे के लिए 1 जुलाई का दिन तय किया गया. इसी दिन महान फिजिशियन और बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ बिधान चंद्र रॉय का जन्म भी हुआ था. डॉ रॉय को देश के सर्वोच्च भारत रत्न  से भी नवाज़ा गया था. उन्हीं के सम्मान में उनके जन्मदिन के दिन पूरे देश में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है.



गांवों से नदारद हैं डॉक्टर्स
स्वास्थ्य सुविधाओं का अंदाज़ा इसी बात लगाया जा सकता है कि देश के ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 18.8% ही डॉक्टर ऐसे हैं, जो क्वालिफाइड हैं. जबकि ग्रामीण भारत में प्रैक्टिस करने वाले 31%
Loading...

एलोपैथिक डॉक्टरों के पास केवल सेकेंडरी लेवल तक की डिग्री है और 57% के पास कोई भी मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं है. ये तमाम आंकड़े द हेल्थ वर्कफोर्स 2016 के शोध में निकलकर सामने आए हैं.

महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ज़्यादा शिक्षित
रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या 38% है. ये महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा शिक्षित हैं.

शोध के मुताबिक देश में प्रति एक लाख की आबादी पर 80 एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी डॉक्टर्स हैं. अगर पड़ोसी मुल्क चीन से इसकी तुलना की जाए तो वहां ये आंकड़ा 130 डॉक्टरों का है. अगर मेडिकल क्वालिफिकेशन वाले डॉक्टरों की बात की जाए तो देश में प्रति एक लाख आबादी पर ऐसे डॉक्टरों की संख्या कुल 36 है.

नर्स और स्वास्थ्य सहयोगियों की बात करें तो भारत में प्रति एक लाख आबादी पर 61 मेडिकल वर्कर हैं. चीन में इनकी संख्या 96 है.

अगर भारत में मौजूद डेंटिस्टों की संख्या की बात करें तो यहां हालात और भी ज़्यादा ख़राब है. 2001 के आंकड़ों के मुताबिक 58 जिलों में एक भी डेंटिस्ट नहीं है. प्रति 1 लाख की आबादी पर देश में कुल 2.4 डेंटिस्ट मौजूद हैं. जबकि 175 जिलों में मौजूद एक भी डेंटिस्ट ऐसा नहीं है, जिसके पास मेडिकल क्वालिफिकेशन है.
First published: June 29, 2018, 7:00 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...